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सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल गंभीर, हाई कोर्ट ने स्वास्थ्य निगरानी का दिया आदेश

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सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल गंभीर, हाई कोर्ट ने स्वास्थ्य निगरानी का दिया आदेश
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प्रख्यात शिक्षाविद् और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 19वें दिन जंतर मंतर, नई दिल्ली में गंभीर स्वास्थ्य स्थिति से जूझ रहे हैं। उनकी बिगड़ती हालत को देखते हुए, दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकारों को उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। वांगचुक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और देश की शिक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठा रहे हैं। इसी बीच, दिल्ली हाई कोर्ट 20 जुलाई, 2026 को जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस निगरानी के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका पर भी सुनवाई करेगा। यह घटनाक्रम 17 जुलाई, 2026 को सामने आया, जब वांगचुक की दृढ़ता और उनके आंदोलन को मिल रहे समर्थन के बावजूद उनकी शारीरिक स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

बिगड़ता स्वास्थ्य और न्यायालय का हस्तक्षेप

सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की स्थिति लगातार खराब हो रही है, जिसने गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं। उन्हें नियमित रूप से जांचने वाले डॉक्टर सतीश लांबा ने गुरुवार, 16 जुलाई, 2026 को चेतावनी दी थी कि वांगचुक का स्वास्थ्य गंभीर अवस्था में पहुंच गया है। डॉक्टर लांबा के अनुसार, वांगचुक ने 9 किलो से अधिक वजन कम किया है, लेकिन वे मानसिक रूप से सतर्क बने हुए हैं। हालांकि, उन्होंने बाद में शाम को चेतावनी दी कि उनका शरीर मांसपेशियों का उपभोग कर रहा था और उनके अंग इसके बाद प्रभावित हो सकते हैं। अपनी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति के बावजूद, वांगचुक ने अपना उपवास समाप्त करने से इनकार कर दिया है, यह कहते हुए कि सरकार से कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर उपवास तोड़ना गलत संदेश देगा। इसके बजाय, उन्होंने लोगों से 20 जुलाई को प्रस्तावित कॉकक्रोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च को मजबूत करने का आग्रह किया। दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पष्ट रूप से आदेश दिया है कि वांगचुक की नियमित रूप से सरकारी डॉक्टरों द्वारा चिकित्सा जांच की जानी चाहिए, ताकि उनके जीवन को कोई खतरा न हो।

शिक्षा प्रणाली में सुधार और बढ़ता समर्थन

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का मुख्य उद्देश्य देश की शिक्षा प्रणाली में सुधार लाना और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करना है। वह शिक्षा क्षेत्र में कथित अनियमितताओं और प्रणालीगत खामियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। उनके आंदोलन को विभिन्न हलकों से समर्थन मिल रहा है। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने जंतर मंतर पर सोनम वांगचुक से मुलाकात कर अपना समर्थन व्यक्त किया, जो इस मुद्दे को राष्ट्रीय राजनीतिक मंच पर भी ला रहा है। इसके अतिरिक्त, सिक्किम विश्वविद्यालय छात्र संघ (SUSA) ने भी सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को अपना समर्थन दिया है, विशेष रूप से कथित परीक्षा अनियमितताओं के मुद्दे पर। यह व्यापक समर्थन दर्शाता है कि वांगचुक द्वारा उठाए गए मुद्दे केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश भर में छात्रों और शिक्षाविदों के बीच गहरी चिंता का विषय हैं। उनकी दृढ़ता और त्याग शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव लाने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

जंतर मंतर पर पुलिस निगरानी और निजता का अधिकार

सोनम वांगचुक के विरोध प्रदर्शन के समानांतर, दिल्ली हाई कोर्ट सोमवार, 20 जुलाई, 2026 को जंतर मंतर पर कॉकक्रोच जनता पार्टी के प्रदर्शनकारियों द्वारा कथित "घुसपैठपूर्ण निगरानी" के खिलाफ एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने पर सहमत हो गया है। यह याचिका पूर्व जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष आइशे घोष ने दायर की है। याचिका में दिल्ली पुलिस द्वारा स्थायी निगरानी टावर की स्थापना और संचालन के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों की व्यवस्थित फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील ने दावा किया कि पुलिसकर्मी विरोध स्थल पर मोबाइल और कैमरों के साथ घूम रहे थे, जिससे प्रदर्शनकारी छात्रों का मनोबल टूट रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस का यह आचरण प्रदर्शनकारियों के मौलिक निजता के अधिकार का घोर उल्लंघन था। इस याचिका पर सुनवाई का परिणाम यह निर्धारित करेगा कि क्या विरोध प्रदर्शन स्थलों पर पुलिस की निगरानी की सीमाएं क्या होनी चाहिए और क्या यह नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करती है। यह मामला लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों के अधिकार और निजता के अधिकार के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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