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विश्व पर्यावरण दिवस पर PM मोदी: 'सतत विकास ही भविष्य की राह', संकल्प करें मजबूत

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विश्व पर्यावरण दिवस पर PM मोदी: 'सतत विकास ही भविष्य की राह', संकल्प करें मजबूत
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विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर, 5 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए 'सतत विकास' को भविष्य की एकमात्र अनिवार्य राह बताया। आभासी माध्यम से दिए गए अपने प्रेरक संदेश में, प्रधानमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया और सभी नागरिकों से इस दिशा में अपने संकल्पों को और मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने जोर दिया कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने, प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर व सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने हेतु सतत विकास ही एकमात्र मार्ग है। इस संबोधन का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सामूहिक प्रयासों से हरित भविष्य की नींव रखना था, ताकि भारत वैश्विक पर्यावरणीय प्रयासों में अपनी अग्रणी भूमिका निभा सके।

सतत विकास: भविष्य की अनिवार्य दिशा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि विकास और पर्यावरण संरक्षण को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता, बल्कि वे एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने कहा, "सतत विकास का अर्थ है कि हम अपनी वर्तमान जरूरतों को पूरा करते हुए भविष्य की पीढ़ियों की जरूरतों से समझौता न करें।" उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आर्थिक प्रगति को पर्यावरणीय स्थिरता के साथ संतुलित करना आवश्यक है, ताकि प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग हो सके और पारिस्थितिकी तंत्र को कोई क्षति न पहुँचे। प्रधानमंत्री ने भारत के 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य का भी उल्लेख किया, जिसे उन्होंने सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य केवल एक संख्या नहीं, बल्कि एक जीवनशैली और मानसिकता में बदलाव का प्रतीक है, जहाँ प्रत्येक व्यक्ति पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझे। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सरकार नई नीतियों और जनभागीदारी पर विशेष जोर दे रही है, ताकि ऊर्जा दक्षता, नवीकरणीय ऊर्जा और चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों को बढ़ावा दिया जा सके, जिससे दीर्घकालिक पर्यावरणीय लाभ मिल सकें।

भारत की पहल और वैश्विक नेतृत्व

प्रधानमंत्री मोदी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए भारत द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों और वैश्विक मंच पर इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कई महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू की हैं, जैसे स्वच्छ भारत अभियान जिसने स्वच्छता के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाई और ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार किया; उज्ज्वला योजना जिसने करोड़ों घरों को धुएँ से मुक्त कर महिलाओं के स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को लाभ पहुँचाया; और जल जीवन मिशन जिसने हर घर तक नल से जल पहुँचाने का लक्ष्य रखा है, जिससे जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है। उन्होंने भारत में वन आवरण में लगातार हो रही वृद्धि और सौर ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय विस्तार को भी रेखांकित किया, जो देश की हरित ऊर्जा की ओर बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रधानमंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) जैसी पहलों में भारत के नेतृत्व की सराहना की, जिसने वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने COP26 (ग्लासगो) में प्रस्तुत 'पंचामृत' लक्ष्यों का भी जिक्र किया, जो जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं और विश्व को एक स्पष्ट संदेश देते हैं।

प्रकृति से सामंजस्य और जनभागीदारी का आह्वान

अपने संदेश में, प्रधानमंत्री मोदी ने प्रकृति के साथ भारत के सदियों पुराने सामंजस्यपूर्ण संबंध को याद किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को हमेशा माँ के रूप में पूजा गया है और हमें इस विरासत को आधुनिक संदर्भ में आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकार की जिम्मेदारी न समझें, बल्कि इसे अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी के रूप में लें और दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव लाएँ। प्रधानमंत्री ने मिशन लाइफ (LiFE - Lifestyle for Environment) का उल्लेख किया, जो पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देने पर केंद्रित है और व्यक्तियों को जागरूक व जिम्मेदार उपभोक्ता बनने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि एक पेड़ लगाने, पानी बचाने, सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का उपयोग कम करने और ऊर्जा बचाने जैसे छोटे-छोटे व्यक्तिगत प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं और एक सामूहिक सकारात्मक प्रभाव पैदा कर सकते हैं। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से प्रतिदिन कम से कम एक पर्यावरण-अनुकूल कार्य करने का संकल्प लेने का आह्वान किया, क्योंकि ऐसे सामूहिक प्रयास ही एक हरित और स्वस्थ भविष्य की नींव रखेंगे, जिससे आने वाली पीढ़ियाँ भी स्वच्छ वातावरण में साँस ले सकेंगी।

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चुनौतियों के बीच अवसर और हरित अर्थव्यवस्था

प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियाँ गंभीर हैं और इनसे निपटने के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है, लेकिन उन्होंने इन्हें नवाचार और हरित अर्थव्यवस्था के लिए अवसरों के रूप में भी प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि हरित ऊर्जा, ई-मोबिलिटी, अपशिष्ट प्रबंधन और चक्रीय अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में निवेश से न केवल पर्यावरण को लाभ होगा, बल्कि नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे और आर्थिक विकास को गति मिलेगी। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे इन क्षेत्रों में अपनी रचनात्मकता और ऊर्जा का उपयोग करें, और नए स्टार्टअप तथा समाधानों के साथ सामने आएँ। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत इन चुनौतियों को अवसरों में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में विश्व का नेतृत्व करने की क्षमता रखता है, विशेष रूप से सौर और पवन ऊर्जा में। उन्होंने कहा कि "हमारा संकल्प है कि हम एक ऐसा भारत बनाएँ जो न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हो, बल्कि पर्यावरणीय रूप से भी समृद्ध और टिकाऊ हो।" यह दृष्टिकोण एक ऐसे भविष्य की कल्पना करता है जहाँ प्रकृति और प्रगति साथ-साथ चलें, एक-दूसरे का समर्थन करें और सभी के लिए एक बेहतर जीवन सुनिश्चित करें।

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लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

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