गोमूत्र की ताकत से कमाल: जैविक खेती से एक एकड़ में 26 क्विंटल तक धान उत्पादन | Raipur News Today
आज की रायपुर खबर के अनुसार... रायपुर/छत्तीसगढ़:।
देशभर में जहां रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों को लेकर चिंता बढ़ रही है, वहीं छत्तीसगढ़ के किसानों ने जैविक खेती की दिशा में एक नया उदाहरण पेश किया है। गोमूत्र आधारित खेती पद्धति अपनाकर किसानों ने न केवल उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि लागत भी कम की है। ताजा उदाहरण में एक किसान ने सिर्फ एक एकड़ जमीन में 26 क्विंटल तक धान उत्पादन कर सभी को चौंका दिया है।
दरअसल, यह सफलता गोमूत्र, गोबर और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से तैयार जैविक खाद और कीटनाशक के कारण संभव हो पाई है। किसान ने पारंपरिक रासायनिक उर्वरकों को पूरी तरह छोड़कर देसी गाय के गोमूत्र से तैयार घोल का इस्तेमाल किया। इस घोल में नीम, धतूरा और अन्य जैविक तत्व मिलाकर इसे और प्रभावी बनाया गया।
जैविक खेती की बढ़ती लोकप्रियता।
छत्तीसगढ़ सहित देश के कई हिस्सों में अब किसान जैविक खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। गोमूत्र आधारित खेती न केवल पर्यावरण के लिए सुरक्षित है, बल्कि इससे मिट्टी की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि रासायनिक खादों के लगातार उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता खराब होती है, जबकि जैविक खेती इसे सुधारने में मदद करती है।
कम लागत, ज्यादा मुनाफा।
इस पद्धति की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम लागत है
इस पद्धति की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम लागत है। जहां रासायनिक खेती में उर्वरक और कीटनाशकों पर हजारों रुपये खर्च होते हैं, वहीं गोमूत्र आधारित खेती में यह लागत काफी कम हो जाती है। किसान ने बताया कि उन्होंने बहुत कम खर्च में बेहतर उत्पादन हासिल किया, जिससे उनकी आय में भी बढ़ोतरी हुई।
कीट नियंत्रण में भी कारगर।
गोमूत्र से तैयार जैविक कीटनाशक फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को नियंत्रित करने में बेहद प्रभावी साबित हो रहे हैं। इससे न केवल फसल सुरक्षित रहती है, बल्कि रासायनिक दवाओं के दुष्प्रभाव से भी बचाव होता है। यह तरीका पूरी तरह प्राकृतिक होने के कारण स्वास्थ्य के लिए भी सुरक्षित माना जाता है।
मिट्टी और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद।
जैविक खेती से मिट्टी की संरचना बेहतर होती है और उसमें मौजूद पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है। इससे फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। इसके साथ ही, रासायनिक अवशेषों से मुक्त अनाज लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता है।
सरकार और विशेषज्ञों की पहल।
राज्य सरकार और कृषि विभाग भी किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। कई जगहों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम और कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, ताकि किसान इस तकनीक को समझ सकें और अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकें।
अन्य किसानों के लिए प्रेरणा।
एक एकड़ में 26 क्विंटल धान उत्पादन का यह उदाहरण अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है। इससे यह साबित होता है कि सही तकनीक और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।
निष्कर्ष।
गोमूत्र आधारित जैविक खेती आज के समय में किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है। यह न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक है। अगर इसी तरह किसान इस दिशा में आगे बढ़ते रहे, तो आने वाले समय में भारत जैविक खेती के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकता है।