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उच्च शिक्षा सुधार की दिशा में बड़ा कदम, संसद में जल्द पेश होगा नया विधेयक | Raipur News Today

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उच्च शिक्षा सुधार की दिशा में बड़ा कदम, संसद में जल्द पेश होगा नया विधेयक | Raipur News Today
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आज की रायपुर खबर के अनुसार... रायपुर/नई दिल्ली, 8 जुलाई। संसद की संयुक्त समिति ने "विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025" को अंतिम रूप दे दिया है। अब इस महत्वपूर्ण विधेयक को संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। रायपुर लोकसभा सांसद एवं संयुक्त समिति के सदस्य बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि यह विधेयक देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी, आधुनिक और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

बुधवार को नई दिल्ली स्थित संसद परिसर में आयोजित संयुक्त समिति की बैठक में विधेयक के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक के दौरान समिति के सदस्यों ने नीतिगत बिंदुओं पर विचार-विमर्श करते हुए अपने सुझाव दिए, जिसके बाद विधेयक को अंतिम स्वरूप प्रदान किया गया।

बैठक में शामिल सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने क्या बताया

बैठक में शामिल सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने बताया कि समिति ने विधेयक के सभी प्रावधानों पर बिंदुवार चर्चा कर आवश्यक सुझावों को शामिल किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी मानसून सत्र में इस विधेयक को संसद में प्रस्तुत किया जाएगा।

बृजमोहन अग्रवाल ने क्या कहा

बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि "विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025" राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक, पारदर्शी और छात्र-केंद्रित बनाया जा सकेगा। साथ ही शिक्षण संस्थानों में नवाचार, अनुसंधान, कौशल विकास और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप मानव संसाधन तैयार करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

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उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब देश के विश्ववि...

उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब देश के विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थान केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित न रहकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान और रोजगारोन्मुखी कौशल विकसित करने पर ध्यान दें। यह विधेयक उच्च शिक्षा प्रणाली को पारंपरिक ढांचे से बाहर निकालकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप बनाने का प्रयास करेगा।

सांसद अग्रवाल के अनुसार यह विधेयक उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्ता सुधार, नवाचार को बढ़ावा देने, अनुसंधान को प्रोत्साहित करने तथा विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि संसद से पारित होने के बाद यह कानून भारत की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएगा।

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