गुंडिचा मंदिर से श्रीमंदिर लौटे महाप्रभु, गरियाबंद में गूंजा जय जगन्नाथ
गरियाबंद। भगवान जगन्नाथ की बाहुड़ा रथयात्रा शुक्रवार को गरियाबंद में धार्मिक उल्लास, आस्था और पारंपरिक वैभव के साथ संपन्न हुई। 24 दिनों तक चले धार्मिक महोत्सव के समापन अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अपने श्रीमंदिर लौटे। पूरे नगर में "जय जगन्नाथ" के जयघोष गूंजते रहे और हजारों श्रद्धालुओं ने महाप्रभु के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
शाम को गुंडिचा (शीतला) मंदिर से विधि-विधान के साथ बाहुड़ा रथयात्रा प्रारंभ हुई। रथ यादवपारा, बजरंग चौक, तिरंगा चौक, संतोषी मंदिर, गौरव पथ और राम-जानकी मंदिर होते हुए श्रीमंदिर पहुंचा। यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। विभिन्न स्थानों पर भक्तों ने पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया तथा श्रद्धाभाव से रथ के दर्शन किए। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए हलवा-पूरी महाप्रसाद का वितरण भी किया गया।
सुबह से ही जगन्नाथ मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, मंगल आरती, भजन-कीर्तन और महाप्रसाद वितरण का आयोजन हुआ। भगवान के श्रीमंदिर लौटने की खुशी में पूरा शहर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।
धार्मिक मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का 108 कलशों के पवित्र जल, चंदन और औषधीय द्रव्यों से देवस्नान कराया जाता है। इसके बाद भगवान 16 दिनों तक अनासर (एकांतवास) में रहते हैं, जहां वैदिक परंपरा के अनुसार उनका औषधीय उपचार किया जाता है। नेत्रोत्सव के पश्चात आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को तीनों विग्रह भव्य रथों में सवार होकर गुंडिचा मंदिर के लिए प्रस्थान करते हैं और आठ दिनों के प्रवास के बाद बाहुड़ा रथयात्रा के माध्यम से पुनः श्रीमंदिर लौटते हैं।
बाहुड़ा रथयात्रा के दौरान माता लक्ष्मी की मान-मनौव्वल की परंपरा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ के श्रीमंदिर पहुंचने पर माता लक्ष्मी प्रतीकात्मक रूप से मंदिर का द्वार बंद कर देती हैं, क्योंकि भगवान उन्हें साथ लेकर मौसीबाड़ी नहीं गए थे। लगभग 15 मिनट तक पूजा-अर्चना और मान-मनौव्वल की रस्म पूरी होने के बाद मंदिर के द्वार खोले गए और भगवान का पुनः स्वागत किया गया।
बाहुड़ा रथयात्रा के सफल आयोजन के साथ गरियाबंद में भगवान जगन्नाथ के 24 दिवसीय धार्मिक महोत्सव का श्रद्धा, भक्ति और उल्लासपूर्ण वातावरण में समापन हुआ। पूरे आयोजन के दौरान नगर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।
और पढ़ें
- छत्तीसगढ़ न्यूज़
- ताज़ा खबरें
- बाबाधाम यात्रियों को खुशखबरी: महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखंड को मिली विशेष ट्रेनें
- खरोरा में गूंजी शिव महापुराण कथा, जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल ने किया कथा श्रवण
- स्वतंत्रता दिवस 2026: झारखंड के 29 पुलिसकर्मी पुलिस पदक से सम्मानित
- हरेली तिहार पर गुरुचरण सिंह होरा का संदेश: प्रकृति, परंपरा और किसान सम्मान का पर्व है हरेली