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इंद्र नूयी का साहसिक दावा: अमेरिकी योग्यता से बनीं वैश्विक CEO

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इंद्र नूयी का साहसिक दावा: अमेरिकी योग्यता से बनीं वैश्विक CEO
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भारतीय मूल की दिग्गज उद्यमी और पेप्सिको की पूर्व सीईओ इंद्र नूयी ने हाल ही में एक सनसनीखेज बयान देकर वैश्विक मंच पर बहस छेड़ दी है। उन्होंने दावा किया है कि वह अमेरिका के अलावा दुनिया के किसी भी अन्य देश में, यहां तक कि अपने गृह देश भारत में भी, एक वैश्विक कंपनी की सीईओ नहीं बन पातीं। यह बयान पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री और वर्तमान में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के हूवर इंस्टीट्यूशन की निदेशक कोंडोलीज़ा राइस के साथ एक बातचीत के दौरान आया, जिसमें नूयी ने अमेरिकी प्रणाली को योग्यता-आधारित बताया। उनका मानना है कि यह प्रणाली प्रतिभा को पुरस्कृत करती है और व्यक्तियों के लिए अपार अवसर पैदा करती है, चाहे उनकी पृष्ठभूमि कुछ भी हो।

अमेरिकी योग्यता प्रणाली: नूयी का दृष्टिकोण

इंद्र नूयी का यह बयान अमेरिका में अवसरों की समानता और योग्यता के महत्व पर प्रकाश डालता है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, "यह [अमेरिका] वह जगह है जहाँ एक अप्रवासी अपनी जेब में कुछ भी न होने के बावजूद एक प्रतिष्ठित अमेरिकी लाल, सफेद और नीली कंपनी का सीईओ बन सकता है। मैं दुनिया के किसी भी अन्य देश, यहां तक कि भारत में भी, सीईओ नहीं बन पाती। ऐसा इसलिए है क्योंकि यहाँ अमेरिका में प्रणाली योग्यता-आधारित है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यहाँ के संरक्षक यह परवाह नहीं करते कि आप पुरुष हैं या महिला, वे बस चाहते हैं कि सबसे अच्छे दिमाग शीर्ष पर पहुँचें।" यह टिप्पणी तुरंत वायरल हो गई और इसने विभिन्न देशों में करियर के विकास के अवसरों पर एक नई बहस छेड़ दी है।

नूयी का यह दृढ़ विश्वास अमेरिकी कार्य संस्कृति की उस विशेषता को दर्शाता है जहां लिंग, जातीयता या सामाजिक पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना प्रतिभा और कड़ी मेहनत को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। उनका अनुभव उन हजारों अप्रवासियों के लिए एक प्रेरणा है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए अमेरिका आते हैं। 70 वर्षीय भारतीय मूल की यह महिला उन चुनिंदा लोगों में से एक हैं जो शीर्ष पर पहुंची हैं, और उनकी सफलता की कहानी अमेरिका की 'योग्यता-आधारित' प्रणाली के उनके दावे को पुष्ट करती है।

मद्रास से येल तक: इंद्र नूयी का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

इंद्र कृष्णमूर्ति का जन्म 28 अक्टूबर, 1955 को मद्रास (अब चेन्नई) में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता एक बैंक अधिकारी थे और माँ गृहिणी थीं। वह अपने दो भाई-बहनों और दादा-दादी के साथ एक संयुक्त परिवार में पली-बढ़ीं। बचपन से ही नूयी ने अपनी पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उन्होंने होली एंजल्स स्कूल में भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित में महारत हासिल की और साथ ही क्रिकेट टीम में भी हिस्सा लिया। उनकी माँ का प्रभाव उनके जीवन पर गहरा था, जो हर रात खाने की मेज पर उनसे और उनकी बहन से पूछती थीं: "अगर तुम भारत की प्रधानमंत्री होती तो कल क्या करती?" इस तरह के प्रश्न ने उनमें नेतृत्व और निर्णय लेने की क्षमता विकसित की।

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18 साल की उम्र में, उन्होंने 1974 में मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से बी.एस. की डिग्री प्राप्त की, जहाँ उन्होंने एक महिला रॉक बैंड में गिटार भी बजाया। रूढ़िवादी चेन्नई में उस समय महिलाओं के लिए जींस पहनना और मंच पर प्रदर्शन करना उचित नहीं माना जाता था, लेकिन नूयी ने सामाजिक अपेक्षाओं के खिलाफ विद्रोह किया। उन्होंने उन पलों के बारे में कहा, "उन पलों ने मुझे साहस सिखाया। अगर मैं उम्मीदों को धता बताते हुए मंच पर चल सकती थी, तो मैं किसी भी बोर्डरूम में चल सकती थी।" 1976 में, उन्होंने प्रतिष्ठित भारतीय प्रबंधन संस्थान, कलकत्ता से एमबीए की डिग्री हासिल की। इसके बाद, उन्होंने येल विश्वविद्यालय में आवेदन किया और उन्हें प्रवेश मिल गया। हालांकि, तीन बच्चों और एक मध्यमवर्गीय जीवनशैली के साथ, उनके परिवार के लिए येल की फीस वहन करना मुश्किल था, और उनके पिता ने इसे असंभव बताया था। यह उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ था जिसने उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए और भी अधिक दृढ़ बना दिया।

करियर की शुरुआत और वैश्विक नेतृत्व की ओर

अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद, इंद्र नूयी ने एक व्यवसाय रणनीतिकार के रूप में अपना करियर शुरू किया। उनकी पहली नौकरी एक ब्रिटिश कपड़ा फर्म, मेट्टूर बियर्डसेल में थी। इसके बाद वह जॉनसन एंड जॉनसन मुंबई में उत्पाद प्रबंधक के पद पर आ गईं। यहाँ उन्हें भारत में 'स्टेफ्री' मासिक धर्म पैड पेश करने का चुनौतीपूर्ण कार्य सौंपा गया, जो उस समय भारत में ऐसे उत्पादों के लिए प्रत्यक्ष विज्ञापन पर प्रतिबंध के कारण और भी मुश्किल था। हालांकि, नूयी ने अपनी रणनीतिक कुशलता से इस चुनौती को सफलतापूर्वक पार किया।

एक उद्यमी, पत्नी, माँ और मीडिया व्यक्तित्व के रूप में, इंद्र नूयी ने अपनी सभी भूमिकाओं को अनुकरणीय सहजता के साथ संभाला है। उनकी कहानी दुनिया भर की हजारों महिलाओं को अपने सपनों को चुनने और उन्हें हकीकत में बदलने के लिए प्रेरित करती है। उनका जीवन संघर्ष, दृढ़ता और सफलता का एक प्रमाण है, जो दर्शाता है कि सही अवसर और एक योग्यता-आधारित प्रणाली के साथ, कोई भी व्यक्ति अपनी पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना सर्वोच्च ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। उन्होंने यह साबित किया है कि महिलाएं सब कुछ कर सकती हैं, और उनकी कहानी आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बनी हुई है।

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