घर में आईना लगाने की सही दिशा, जानिए वास्तु गुरु राणा सिकंदर की सलाह
रायपुर। वास्तु शास्त्र में घर की प्रत्येक वस्तु का अपना विशेष महत्व माना गया है। इनमें आईना (दर्पण) भी एक ऐसा तत्व है, जिसे केवल सजावट के लिए नहीं बल्कि ऊर्जा के संतुलन से भी जोड़ा जाता है। वास्तु गुरु राणा सिकंदर के अनुसार यदि घर में आईना सही दिशा और उचित स्थान पर लगाया जाए तो सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है, जबकि गलत स्थान पर लगा आईना मानसिक तनाव, आर्थिक बाधाओं और पारिवारिक असंतुलन का कारण बन सकता है।
वास्तु गुरु राणा सिकंदर बताते हैं कि घर में आईना लगाने के लिए उत्तर और पूर्व दिशा सबसे शुभ मानी जाती है। इन दिशाओं में लगा दर्पण प्राकृतिक प्रकाश को बढ़ाने के साथ-साथ सकारात्मक ऊर्जा को सक्रिय करता है। विशेष रूप से उत्तर दिशा को धन और अवसरों की दिशा माना जाता है, इसलिए यहां लगा आईना शुभ फल देने वाला माना जाता है।
वहीं दक्षिण दिशा में आईना लगाने से बचने की सलाह दी जाती है
वहीं दक्षिण दिशा में आईना लगाने से बचने की सलाह दी जाती है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार इस दिशा में लगा आईना नकारात्मक प्रभाव बढ़ा सकता है और घर के सदस्यों के बीच तनाव या आर्थिक अस्थिरता का कारण बन सकता है।
शयनकक्ष में भी आईना लगाते समय सावधानी बरतनी चाहिए। वास्तु गुरु राणा सिकंदर के अनुसार बिस्तर का प्रतिबिंब आईने में दिखाई नहीं देना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो इससे नींद प्रभावित हो सकती है और दांपत्य जीवन में तनाव बढ़ने की संभावना रहती है। यदि बेडरूम में आईना रखना आवश्यक हो तो उसे उपयोग के बाद पर्दे से ढंकना बेहतर माना जाता है।
मुख्य प्रवेश द्वार के ठीक सामने आईना लगाने से भी बचना चाहिए। मान्यता है कि इससे घर में प्रवेश करने वाली सकारात्मक ऊर्जा वापस लौट जाती है। इसके अलावा टूटा, चटका हुआ या धुंधला आईना घर में नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है।
डाइनिंग एरिया में ऐसा आईना लगाना शुभ माना जाता है जिसमें भोजन की मेज का प्रतिबिंब दिखाई दे। वास्तु मान्यताओं के अनुसार यह अन्न और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। साथ ही आईने को हमेशा साफ और चमकदार रखना चाहिए ताकि सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहे।
वास्तु गुरु राणा सिकंदर का कहना है कि घर में किसी भी प्रकार का वास्तु परिवर्तन करने से पहले दिशा और स्थान का सही आकलन आवश्यक है। छोटे-छोटे वास्तु नियमों का पालन करके भी घर में सुख, शांति और सकारात्मक वातावरण बनाए रखा जा सकता है।