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छत्तीसगढ़ की जेलों में शुरू होगी वीडियो कॉलिंग सुविधा, कैदियों के पुनर्वास की दिशा में बड़ा कदम

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छत्तीसगढ़ की जेलों में शुरू होगी वीडियो कॉलिंग सुविधा, कैदियों के पुनर्वास की दिशा में बड़ा कदम
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रायपुर। छत्तीसगढ़ की जेलों में बंद कैदियों के लिए अब अपने परिवार से जुड़ना पहले से ज्यादा आसान होने वाला है। राज्य सरकार ने जेलों में वीडियो कॉलिंग सुविधा शुरू करने का फैसला लिया है, जिसके तहत जेल विभाग और भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह पहल न केवल कैदियों की सुविधा बढ़ाएगी, बल्कि उनके सामाजिक पुनर्वास में भी अहम भूमिका निभाएगी।

मिली जानकारी के अनुसार, इस समझौते के तहत प्रदेश की सभी 33 जेलों में आधुनिक वीडियो और ऑडियो प्रिजन कॉलिंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा। इस तकनीक के माध्यम से कैदी अपने परिवार के सदस्यों से सीधे संवाद कर सकेंगे, जिससे मानसिक तनाव कम होगा और सामाजिक संबंध मजबूत होंगे।

पुनर्वास को मिलेगा बढ़ावा

जेल प्रशासन का मानना है कि कैदियों को परिवार से जोड़कर रखना उनके व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करता है। लंबे समय तक परिवार से दूर रहने के कारण कई कैदी मानसिक तनाव, अवसाद और अकेलेपन का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में वीडियो कॉलिंग सुविधा उन्हें भावनात्मक सहारा देगी और सुधार की दिशा में प्रेरित करेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि कैदियों के पुनर्वास में पारिवारिक संपर्क की बड़ी भूमिका होती है। जब कैदी अपने परिजनों से नियमित संपर्क में रहते हैं, तो वे समाज में वापस लौटने के लिए अधिक प्रेरित होते हैं और अपराध की पुनरावृत्ति की संभावना भी कम हो जाती है।

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सुरक्षा और निगरानी के साथ होगी सुविधा

जेलों में शुरू की जा रही यह वीडियो कॉलिंग सुविधा पूरी तरह नियंत्रित और निगरानी के दायरे में होगी। हर कॉल को निर्धारित नियमों के तहत संचालित किया जाएगा, ताकि किसी भी प्रकार की सुरक्षा में चूक न हो। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पहले कई जेलों में अवैध मोबाइल उपयोग के मामले सामने आ चुके हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे।

अब आधिकारिक और सुरक्षित वीडियो कॉलिंग सिस्टम लागू होने से अवैध गतिविधियों पर रोक लगेगी और कैदियों को एक वैध और नियंत्रित माध्यम मिलेगा।

तकनीकी सुधार की दिशा में बड़ा कदम

BSNL के साथ किया गया यह समझौता जेलों के डिजिटल आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसके तहत जेल परिसरों में आवश्यक नेटवर्क और उपकरण स्थापित किए जाएंगे, जिससे कॉलिंग की गुणवत्ता बेहतर रहे और सेवा सुचारू रूप से चल सके।

यह पहल ‘ई-गवर्नेंस’ और डिजिटल इंडिया के लक्ष्य के अनुरूप भी है, जहां तकनीक के माध्यम से प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा रहा है।

न्यायिक प्रक्रिया में भी मिलेगी मदद

वीडियो कॉलिंग सुविधा का उपयोग केवल परिवार से बातचीत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका उपयोग कानूनी प्रक्रिया में भी किया जा सकेगा। कैदी अपने वकीलों से आसानी से संपर्क कर सकेंगे, जिससे मुकदमों की सुनवाई और कानूनी सलाह लेना सरल हो जाएगा।

इससे अदालतों में पेशी के लिए कैदियों को बार-बार ले जाने की आवश्यकता भी कम होगी, जिससे समय और संसाधनों की बचत होगी।

मानवाधिकार और सुधार की दिशा में पहल

छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम मानवाधिकारों के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कैदियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और उन्हें समाज से जोड़े रखना आधुनिक सुधारात्मक न्याय प्रणाली का हिस्सा है।

राज्य में पहले भी कैदियों के पुनर्वास के लिए कई पहलें की गई हैं, जिनमें पारिवारिक मुलाकात कार्यक्रम और कौशल विकास योजनाएं शामिल हैं। अब वीडियो कॉलिंग सुविधा जुड़ने से यह प्रयास और मजबूत होगा।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ की जेलों में वीडियो कॉलिंग सुविधा की शुरुआत एक सकारात्मक और दूरदर्शी पहल है। इससे न केवल कैदियों का जीवन आसान होगा, बल्कि उनके पुनर्वास, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक जुड़ाव को भी मजबूती मिलेगी। आने वाले समय में यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

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