छत्तीसगढ़ विजन 2047: धान से हटकर फसल विविधीकरण, डिजिटल कृषि पर जोर
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की कृषि नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है, जिसके तहत 'नवा अंजोर विजन 2047' के अंतर्गत धान की पारंपरिक खेती पर अत्यधिक निर्भरता को कम करते हुए फसल विविधीकरण और अत्याधुनिक डिजिटल कृषि तकनीकों पर जोर दिया जाएगा। यह पहल छत्तीसगढ़ को "धान के कटोरे" की पहचान से आगे बढ़कर एक विविध और टिकाऊ कृषि अर्थव्यवस्था में बदलने के उद्देश्य से की गई है, जिसका लक्ष्य किसानों की आय में वृद्धि करना, मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखना, जल संसाधनों का संरक्षण करना और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करना है। यह निर्णय हाल ही में नीतिगत चर्चाओं और विशेषज्ञ परामर्शों के बाद लिया गया है।
धान पर निर्भरता से मुक्ति और विविधीकरण की आवश्यकता
छत्तीसगढ़ को लंबे समय से भारत के "धान के कटोरे" के रूप में जाना जाता रहा है, जहां धान राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकि, धान की एकल फसल प्रणाली ने कई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। इसमें पानी की अत्यधिक खपत, मिट्टी के पोषक तत्वों का लगातार क्षरण, कीटों और बीमारियों का बढ़ता प्रकोप, तथा बाजार में धान के मूल्यों में होने वाले उतार-चढ़ाव के कारण किसानों की आय पर अनिश्चितता शामिल है। इन समस्याओं को देखते हुए, 'नवा अंजोर विजन 2047' का मुख्य उद्देश्य किसानों को धान के अलावा अन्य लाभदायक फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना है।
सरकार का लक्ष्य दलहन, तिलहन, औषधीय पौधों, फलों, सब्जियों और मोटे अनाजों जैसी उच्च-मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देना है। इन फसलों की खेती से न केवल किसानों को बेहतर बाजार मूल्य और अधिक आय प्राप्त होगी, बल्कि यह मिट्टी के स्वास्थ्य को सुधारने में भी मदद करेगी क्योंकि ये फसलें मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करती हैं और पानी की कम खपत करती हैं। इसके अतिरिक्त, फसल विविधीकरण राज्य की पोषण सुरक्षा को भी बढ़ाएगा और उपभोक्ताओं को विभिन्न प्रकार के खाद्य विकल्प उपलब्ध कराएगा, जिससे कृषि क्षेत्र में समग्र स्थिरता आएगी।
डिजिटल खेती: भविष्य की राह
'नवा अंजोर विजन 2047' का एक और महत्वपूर्ण स्तंभ डिजिटल खेती को अपनाना है, जो कृषि पद्धतियों में क्रांति लाने की क्षमता रखती है। छत्तीसगढ़ सरकार कृषि में अत्याधुनिक तकनीकों जैसे ड्रोन, सेंसर-आधारित निगरानी प्रणाली, भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) मैपिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) के उपयोग पर विशेष जोर दे रही है। ये प्रौद्योगिकियां किसानों को अधिक सटीक और डेटा-संचालित निर्णय लेने में सक्षम बनाएंगी, जिससे कृषि उत्पादकता और दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
डिजिटल उपकरणों का उपयोग करके किसान स्मार्ट सिंचाई प्रणालियों को लागू कर सकते हैं, जो पानी के उपयोग को अनुकूलित करती हैं और बर्बादी को कम करती हैं। इसके अलावा, सटीक उर्वरक प्रबंधन तकनीकों से मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने और रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग को कम करने में मदद मिलेगी। कीटों और बीमारियों की प्रारंभिक पहचान प्रणाली फसल के नुकसान को कम करेगी, जबकि मौसम संबंधी सटीक जानकारी और बाजार के रुझानों तक पहुंच किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर योजना बनाने और उचित मूल्य प्राप्त करने में मदद करेगी। यह डिजिटल क्रांति ग्रामीण युवाओं को कृषि क्षेत्र में नए रोजगार के अवसर भी प्रदान करेगी।
नवा अंजोर विजन 2047: एक समग्र कृषि विकास
'नवा अंजोर विजन 2047' केवल फसल विविधीकरण और डिजिटल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के कृषि क्षेत्र के समग्र और सतत विकास के लिए एक व्यापक खाका प्रस्तुत करता है। इसमें कृषि अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना शामिल है, ताकि नई फसल किस्मों और कृषि तकनीकों का विकास किया जा सके जो राज्य की विशिष्ट जलवायु और मिट्टी की परिस्थितियों के अनुकूल हों। इसके साथ ही, कृषि शिक्षा का उन्नयन किया जाएगा, जिससे युवा किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों, उद्यमिता और प्रौद्योगिकी के उपयोग में प्रशिक्षित किया जा सके।
ग्रामीण बुनियादी ढांचे का विकास भी इस विजन का एक अभिन्न अंग है, जिसमें भंडारण सुविधाओं, कोल्ड चेन और सड़क नेटवर्क में सुधार शामिल है। सरकार कृषि-प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित करेगी, जिससे कृषि उत्पादों का मूल्यवर्धन हो सके। यह विजन सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच मजबूत सहयोग पर भी जोर देता है, जिससे निवेश आकर्षित हो। महिला किसानों को कृषि उद्यमिता में सशक्त बनाना और उन्हें वित्तीय सहायता व प्रशिक्षण प्रदान करना भी इस रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।