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LPG संकट पर विधानसभा में हंगामा, गैस की कमी से लोग लौटे लकड़ी-कोयले की ओर

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LPG संकट पर विधानसभा में हंगामा, गैस की कमी से लोग लौटे लकड़ी-कोयले की ओर
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राज्य में बढ़ते LPG संकट ने अब राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चिंता बढ़ा दी है। गैस सिलेंडर की कमी और समय पर आपूर्ति न होने से आम जनता परेशान है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि लोगों को मजबूरी में फिर से पारंपरिक ईंधन जैसे लकड़ी और कोयले का सहारा लेना पड़ रहा है। इस मुद्दे को लेकर विधानसभा में भी जमकर हंगामा हुआ, जहां विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए जवाब मांगा।

विधानसभा के हालिया सत्र में LPG गैस की कमी का मुद्दा गरमाया रहा

विधानसभा के हालिया सत्र में LPG गैस की कमी का मुद्दा गरमाया रहा। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार आम लोगों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में विफल रही है। कई विधायकों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में गैस सिलेंडर समय पर नहीं मिल रहे हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस दौरान सदन में नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिला।

दूसरी ओर, सरकार की ओर से सफाई देते हुए संबंधित मंत्री ने क्या कहा

दूसरी ओर, सरकार की ओर से सफाई देते हुए संबंधित मंत्री ने कहा कि आपूर्ति में कुछ तकनीकी और लॉजिस्टिक समस्याएं आई हैं, जिन्हें जल्द ही ठीक कर लिया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि LPG सिलेंडर सप्लाई को सामान्य करने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

इस संकट का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के लोगों पर पड़ा है। जिन परिवारों ने उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन लिया था, वे अब फिर से लकड़ी और कोयले पर खाना बनाने को मजबूर हैं। इससे न केवल उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है, बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान हो रहा है। धुएं के कारण महिलाओं और बच्चों में सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

उत्पाद लोड हो रहे हैं…

विशेषज्ञों का मानना है कि LPG की बढ़ती कीमतें और अनियमित सप्लाई इस समस्या की जड़ हैं। कई जगहों पर ब्लैक मार्केटिंग की भी शिकायतें सामने आई हैं, जहां गैस सिलेंडर ऊंचे दामों पर बेचे जा रहे हैं। इससे आम उपभोक्ता और भी ज्यादा परेशान हो रहा है।

गांवों में स्थिति और भी चिंताजनक है। कई ग्रामीणों ने क्या बताया

गांवों में स्थिति और भी चिंताजनक है। कई ग्रामीणों ने बताया कि गैस एजेंसियों पर बार-बार जाने के बावजूद उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है। कुछ स्थानों पर तो महीनों से सिलेंडर नहीं मिला है। ऐसे में लोग मजबूरी में जंगलों से लकड़ी इकट्ठा कर रहे हैं और पारंपरिक चूल्हों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो यह संकट और भी गहरा सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि गरीब परिवारों को सब्सिडी और अतिरिक्त सहायता दी जाए ताकि वे गैस का उपयोग जारी रख सकें।

इस पूरे मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ऊर्जा संसाधनों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था में सुधार की सख्त जरूरत है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट आने वाले दिनों में और भी गंभीर रूप ले सकता है।

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