शिपराक गोयल ने NEET UG में लहराया परचम, बने छत्तीसगढ़ टॉपर
जुलाई 17, 2026 को जारी NEET-UG परीक्षा परिणामों में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के शिपराक गोयल ने असाधारण प्रदर्शन करते हुए राज्य का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कुल 690 अंक प्राप्त कर न केवल ऑल इंडिया रैंक 117 हासिल की, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में अव्वल आकर अपनी मेधा का लोहा मनवाया। यह सफलता ऐसे समय में आई है जब प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव छात्रों पर लगातार बढ़ रहा है, और शिपराक ने अपनी शांत व सुलझी हुई रणनीति से इस कठिन परीक्षा को सहजता से पार करने का मार्ग दिखाया है। उनकी यह उपलब्धि हजारों मेडिकल उम्मीदवारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है, जो डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं।
मिथकों को तोड़ती शिपराक की रणनीति
अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं, खासकर NEET जैसी कठिन परीक्षाओं को लेकर समाज में कई भ्रांतियां फैली हुई हैं। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर अक्सर यह प्रचारित किया जाता है कि डॉक्टर बनने के लिए छात्रों को अपनी नींद, आराम और व्यक्तिगत जीवन का त्याग कर 16-16 घंटे या इससे भी अधिक समय तक पढ़ाई करनी पड़ती है। हालांकि, शिपराक गोयल इस धारणा से बिल्कुल असहमत हैं। अपनी तैयारी के दिनों को याद करते हुए, उन्होंने एक व्यावहारिक और संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत किया, जो छात्रों के लिए एक नया मार्गदर्शक है। शिपराक का स्पष्ट मानना है कि पढ़ाई की गुणवत्ता मात्रा से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया, "इंटरनेट और सोशल मीडिया पर 16-16 घंटे पढ़ने के जो दावे किए जाते हैं, वे अक्सर वास्तविकता से परे होते हैं और केवल एक ढर्रे पर बनी बातें हैं। मेरा दृढ़ विश्वास है कि यदि कोई छात्र प्रतिदिन 8 से 10 घंटे की पढ़ाई नियमितता, एकाग्रता और पूरी ईमानदारी के साथ करता है, तो यह NEET जैसी किसी भी कठिन परीक्षा को क्रैक करने के लिए पर्याप्त है।" उनका मानना है कि यह नियम केवल एक या दो दिन के लिए नहीं, बल्कि पूरे दो साल तक बिना किसी रुकावट के लागू होना चाहिए, जिसे वे 'कंसिस्टेंसी' कहते हैं। इस निरंतरता और अनुशासन से ही छात्र बिना किसी अतिरिक्त दबाव या तनाव के अपनी मंजिल तक पहुंच सकते हैं। शिपराक की यह बात उन हजारों छात्रों के लिए एक बड़ी राहत है जो अत्यधिक पढ़ाई के बोझ तले दबकर अपनी मानसिक शांति खो देते हैं।
तनाव मुक्त दृष्टिकोण से सफलता का मार्ग
शिपराक गोयल अपनी सफलता का श्रेय केवल अकादमिक तैयारी को नहीं देते, बल्कि उनके शांत और तनावमुक्त मानसिक दृष्टिकोण को भी इसका एक बड़ा कारण मानते हैं। उन्होंने NEET की परीक्षा को किसी बड़ी जंग या जीवन-मरण के प्रश्न के रूप में देखने के बजाय, इसे एक सामान्य टेस्ट की तरह लिया। उनका मानना है कि किसी भी परीक्षा को आवश्यकता से अधिक महत्व देने या उसे 'हौवा' बनाने से अनावश्यक तनाव पैदा होता है, जिससे छात्र अपनी क्षमता के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर पाते। यह एक ऐसी गलती है जो अक्सर मेधावी छात्रों को भी उनके लक्ष्य से भटका देती है।
शिपराक ने छात्रों को तनाव से बचने के लिए कुछ महत्वपूर्ण मंत्र दिए हैं। पहला, किसी भी परीक्षा को जरूरत से ज्यादा खास या बड़ा न मानें, अन्यथा आप खुद-ब-खुद भारी तनाव के शिकार हो जाएंगे। दूसरा, अपनी गलतियों से सीखें; अक्सर जरूरत से ज्यादा तनाव लेने पर छात्र परीक्षा हॉल में आते हुए सवाल भी गलत कर बैठते हैं, जिससे उनके अंक प्रभावित होते हैं। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण, खुद पर भरोसा रखें और परीक्षा को केवल एक सामान्य टेस्ट की तरह देखें। पूरे आत्मविश्वास के साथ सवालों के जवाब देना ही सफलता की कुंजी है। उनका यह दृष्टिकोण दिखाता है कि मानसिक दृढ़ता और सकारात्मक सोच अकादमिक ज्ञान जितनी ही महत्वपूर्ण है। वर्तमान समय में जब छात्रों में परीक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ रही हैं, शिपराक का यह संदेश बेहद प्रासंगिक है और उन्हें सही दिशा दिखाता है।
निरंतरता और आत्मविश्वास: जीत की कुंजी
शिपराक गोयल की सफलता की कहानी इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ संकल्प, सही रणनीति और निरंतरता किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है। उन्होंने अपनी तैयारी के दौरान कभी भी निरंतरता से समझौता नहीं किया। उनके अनुसार, दो साल तक प्रतिदिन 8 से 10 घंटे की गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई ही उनकी सफलता का मूल मंत्र रही, जिसने उन्हें बिना किसी अतिरिक्त दबाव के लक्ष्य तक पहुंचाया। उन्होंने यह भी बताया कि अपनी पढ़ाई को संतुलित रखने के लिए उन्होंने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखा, जो कि लंबे समय तक पढ़ाई करने के लिए बेहद जरूरी है।
उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ राज्य के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा है, खासकर ऐसे समय में जब मेडिकल प्रवेश परीक्षाएं अत्यधिक प्रतिस्पर्धी हो गई हैं। शिपराक ने यह साबित कर दिया है कि बड़े सपने देखने वाले और उन सपनों को पूरा करने के लिए सही दिशा में प्रयास करने वाले किसी भी छात्र के लिए कोई भी चुनौती असंभव नहीं है। उनकी कहानी उन सभी युवा उम्मीदवारों के लिए एक मार्गदर्शक है जो NEET UG जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने का सपना देखते हैं, और उन्हें यह सिखाती है कि संतुलित जीवनशैली, सकारात्मक मानसिकता, अटूट आत्मविश्वास और सबसे महत्वपूर्ण, अध्ययन में निरंतरता ही उन्हें अपने लक्ष्य तक पहुंचा सकती है।
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