AIIMS रायपुर की चेतावनी: बच्चों में बढ़ रही डेंटल समस्याएं, समय रहते इलाज जरूरी | Raipur News Today
आज की रायपुर खबर के अनुसार... AIIMS Raipur द्वारा जारी हालिया रिपोर्ट ने अभिभावकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में बच्चों के बीच दांतों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं और यह स्थिति अब गंभीर रूप ले चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते उचित ध्यान और उपचार नहीं किया गया, तो यह समस्या आगे चलकर बच्चों के संपूर्ण स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 5 से 15 वर्ष के बच्चों में दांतों की सड़न (कैविटी), मसूड़ों की सूजन, और दांतों की असामान्य वृद्धि जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। खासतौर पर शहरी क्षेत्रों के बच्चों में जंक फूड और मीठे पेय पदार्थों के अत्यधिक सेवन को इसका मुख्य कारण माना गया है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और नियमित दंत जांच न होना भी बड़ी वजह बन रहा है।
AIIMS रायपुर के दंत विशेषज्ञों के अनुसार, लगभग 60 से 70 प्रतिशत बच्चों में किसी न किसी प्रकार की डेंटल समस्या पाई जा रही है। यह आंकड़ा पिछले कुछ वर्षों की तुलना में काफी अधिक है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों में दांतों की सफाई को लेकर लापरवाही, दिन में दो बार ब्रश न करना और सही तरीके से ब्रशिंग न करना भी समस्याओं को बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि बच्चों में बढ़ती डिजिटल लाइफस्टाइल भी अप्रत्यक्ष रूप से डेंटल हेल्थ को प्रभावित कर रही है। मोबाइल और टीवी के अधिक उपयोग के कारण बच्चे बाहर खेलना कम कर रहे हैं और इसके बजाय स्नैक्स और मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन अधिक कर रहे हैं। इससे दांतों पर बैक्टीरिया का असर बढ़ जाता है और कैविटी बनने की संभावना अधिक हो जाती है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कई अभिभावक बच्चों के दूध के दांतों को गंभीरता से नहीं लेते, जबकि यही दांत भविष्य के स्थायी दांतों के लिए आधार तैयार करते हैं। यदि इनकी सही देखभाल नहीं की गई, तो आगे चलकर दांतों की संरचना और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
AIIMS रायपुर के विशेषज्ञों ने अभिभावकों को सलाह दी है कि वे बच्चों को नियमित रूप से दंत चिकित्सक के पास जांच के लिए ले जाएं। साथ ही बच्चों को बचपन से ही सही ब्रशिंग तकनीक सिखाना, मीठे और चिपचिपे खाद्य पदार्थों से दूरी बनाना, और संतुलित आहार देना बेहद जरूरी है।
सरकार और स्वास्थ्य विभाग को भी इस दिशा में जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता बताई गई है। स्कूल स्तर पर डेंटल हेल्थ चेकअप कैंप आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि शुरुआती चरण में ही समस्याओं की पहचान कर उनका समाधान किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में बच्चों में डेंटल समस्याएं एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन सकती हैं। इसलिए अभिभावकों, स्कूलों और स्वास्थ्य संस्थानों को मिलकर इस दिशा में काम करने की जरूरत है।
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