छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी का असर: AIIMS Raipur और जिला अस्पतालों में डिहाइड्रेशन व हीट स्ट्रोक के बढ़े मरीज | Raipur News Today
आज की रायपुर खबर के अनुसार... राज्य में लगातार बढ़ते तापमान ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। राजधानी AIIMS Raipur सहित प्रदेश के विभिन्न जिला अस्पतालों में गर्मी से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा दर्ज किया गया है। खासतौर पर डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) और हीट स्ट्रोक के मामलों में वृद्धि ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
डॉक्टरों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में तापमान में लगातार वृद्धि के कारण शरीर में पानी की कमी और लू लगने की घटनाएं बढ़ी हैं। अस्पतालों में आने वाले मरीजों में बच्चे, बुजुर्ग और दिहाड़ी मजदूर सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय पर इलाज न मिले, तो हीट स्ट्रोक जानलेवा भी साबित हो सकता है।
अस्पतालों में बढ़ता दबाव
AIIMS Raipur के चिकित्सकों ने बताया कि ओपीडी में रोजाना आने वाले मरीजों में से बड़ी संख्या गर्मी से संबंधित समस्याओं की है। वहीं जिला अस्पतालों में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है। डॉक्टरों का कहना है कि कई मरीज अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आना, उल्टी और तेज बुखार जैसे लक्षणों के साथ पहुंच रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी के मौसम में शरीर का तापमान नियंत्रित रखना बेहद जरूरी होता है। लेकिन लापरवाही के कारण लोग धूप में लंबे समय तक काम करते हैं, जिससे उनके शरीर पर बुरा असर पड़ता है।
स्वास्थ्य विभाग की चेतावनी
छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग ने विशेष रूप से दोपहर 12 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक धूप में बाहर निकलने से बचने की अपील की है। इसके अलावा, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, हल्के और ढीले कपड़े पहनने तथा सिर को ढककर बाहर निकलने की सलाह दी गई है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने यह भी कहा है कि यदि किसी व्यक्ति को चक्कर, सिरदर्द, तेज प्यास, या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत नजदीकी अस्पताल में संपर्क करना चाहिए।
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ी समस्या
राज्य के ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी गंभीर होती जा रही है। कई जगहों पर पीने के पानी की कमी और तेज धूप के कारण लोगों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खेतों और निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूरों में हीट स्ट्रोक का खतरा ज्यादा देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के कारण लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे स्थिति बिगड़ जाती है। ऐसे में प्रशासन द्वारा जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।
बच्चों और बुजुर्गों पर खास असर
डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे और बुजुर्ग गर्मी के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। बच्चों में डिहाइड्रेशन जल्दी होता है, जबकि बुजुर्गों में शरीर की तापमान नियंत्रित करने की क्षमता कम हो जाती है। इसलिए इन दोनों वर्गों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
कैसे करें बचाव?
विशेषज्ञों ने कुछ जरूरी उपाय बताए हैं, जिनका पालन कर गर्मी से बचा जा सकता है:।
- दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ का सेवन करें
- बाहर निकलते समय छाता या टोपी का उपयोग करें
- हल्के रंग के और ढीले कपड़े पहनें
- खाली पेट बाहर न निकलें
- अधिक गर्मी महसूस होने पर तुरंत छांव में आराम करें
प्रशासन की तैयारी
स्वास्थ्य विभाग ने सभी अस्पतालों को अलर्ट मोड पर रखा है। जरूरी दवाइयों और आईवी फ्लूइड्स की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही, डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि आपात स्थिति में तुरंत इलाज उपलब्ध कराया जा सके।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में बढ़ती गर्मी ने स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। ऐसे में जरूरी है कि लोग लापरवाही न बरतें और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। समय पर सावधानी और जागरूकता ही डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याओं से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
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