बैसाखी पर्व पर देशभर में उत्साह, देवेंद्रनगर गुरुद्वारे में शबद कीर्तन और अरदास | Raipur News Today
आज की रायपुर खबर के अनुसार... आज पूरे देश में बैसाखी पर्व हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। बैसाखी 2026, बैसाखी पर्व, खालसा पंथ स्थापना दिवस और सिख धर्म से जुड़े इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला। छत्तीसगढ़ के देवेंद्रनगर स्थित गुरुद्वारे में भी इस अवसर पर विशेष शबद कीर्तन और अरदास का आयोजन किया गया, जहां बड़ी संख्या में सिख समाज के लोग एकत्रित हुए।
गुरुद्वारे में आयोजित कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने गुरु साहिब का नाम जपते हुए पूरे समाज की खुशहाली, शांति और समृद्धि की कामना की। बैसाखी पर्व समाचार के तहत यह आयोजन आध्यात्मिक ऊर्जा और भाईचारे का प्रतीक बनकर सामने आया। शबद कीर्तन के माध्यम से गुरु की महिमा का गुणगान किया गया और वातावरण भक्तिमय हो उठा।
इस मौके पर छत्तीसगढ़ टेनिस संघ के महासचिव एवं ग्रैंड ग्रुप के चेयरमैन...
इस मौके पर छत्तीसगढ़ टेनिस संघ के महासचिव एवं ग्रैंड ग्रुप के चेयरमैन गुरुचरण सिंह होरा अपने परिवार के साथ गुरुद्वारे पहुंचे और मत्था टेककर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। उनके साथ पूर्व विधायक गुरुमुख सिंह होरा, दिलेर सिंह होरा, बेटी सोनिया सचदेव, बहू नैना खनूजा होरा और परिवार के अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ बैसाखी समारोह में उनकी उपस्थिति ने आयोजन को और विशेष बना दिया।
गुरुचरण सिंह होरा ने इस अवसर पर सभी को बैसाखी की शुभकामनाएं देते हुए...
गुरुचरण सिंह होरा ने इस अवसर पर सभी को बैसाखी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व खुशहाली, समृद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि बैसाखी केवल फसल कटाई का त्योहार नहीं है, बल्कि यह समाज में एकता, भाईचारे और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश भी देता है। उन्होंने गुरु साहिब के चरणों में प्रार्थना करते हुए सभी के जीवन में शांति और समृद्धि की कामना की।
उन्होंने आगे कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी का जीवन सिख समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने वर्ष 1699 में बैसाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना कर समाज में समानता और साहस का संदेश दिया। उन्होंने जातिगत भेदभाव को समाप्त करते हुए सभी को एकजुट करने का कार्य किया। गुरु जी ने पंच प्यारों को अमृत पान कराया और स्वयं भी उनसे अमृत ग्रहण कर एक अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया।

बैसाखी का पर्व भारतीय संस्कृति की विविधता और एकता का प्रतीक माना जाता है। बैसाखी का महत्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह दिन लोगों को नई ऊर्जा और नए संकल्प के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
धार्मिक दृष्टि से बैसाखी सिख धर्म का एक प्रमुख पर्व है। इस दिन सिख धर्मावलंबी गुरुद्वारों में विशेष पूजा-अर्चना, अरदास और कीर्तन करते हैं। बैसाखी धार्मिक महत्व के तहत यह पर्व गुरु की शिक्षाओं को याद करने और उन्हें जीवन में अपनाने का अवसर प्रदान करता है। गुरुद्वारों में नगर कीर्तन निकाले जाते हैं और लंगर का आयोजन कर सेवा भाव को बढ़ावा दिया जाता है।
देशभर में बैसाखी उत्सव 2026 के तहत अलग-अलग स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां लोगों ने पारंपरिक परिधान पहनकर भांगड़ा और गिद्धा जैसे लोक नृत्यों के जरिए अपनी खुशी जाहिर की। किसानों के लिए यह पर्व नई फसल के आगमन का प्रतीक है, जिससे उनके जीवन में नई उम्मीद और खुशहाली आती है।
समग्र रूप से देखा जाए तो बैसाखी का पर्व न केवल सिख धर्म बल्कि पूरे भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो एकता, भाईचारे और सकारात्मकता का संदेश देता है। देवेंद्रनगर गुरुद्वारे में आयोजित कार्यक्रम ने इस संदेश को और मजबूत किया, जहां श्रद्धालुओं ने एकजुट होकर समाज और देश की खुशहाली की कामना की।
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