सेवा ही सच्ची श्रद्धांजलि: गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी दिवस पर विशाल छबील का आयोजन | Raipur News Today
आज की रायपुर खबर के अनुसार... रायपुर। सिखों के पांचवें गुरु एवं शहीदों के सरताज गुरु श्री अर्जुन देव जी के पावन शहीदी दिवस पर राजधानी रायपुर में सेवा, श्रद्धा और मानवता का प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिला। दशमेश सेवा सोसाइटी द्वारा शुक्रवार को शास्त्री चौक में विशाल छबील लगाकर राहगीरों, आम नागरिकों और श्रद्धालुओं को मीठा शरबत एवं चना प्रसाद वितरित किया गया।
भीषण गर्मी के बीच आयोजित इस सेवा कार्य में सिख समाज की महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सुबह से शुरू हुई छबील सेवा में हजारों लोगों ने शरबत ग्रहण कर गुरु अर्जुन देव जी की शहादत को नमन किया। पूरे क्षेत्र में सेवा, भाईचारे और श्रद्धा का वातावरण बना रहा।

कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत...
कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा, ग्रैंड ग्रुप के चेयरमैन गुरुचरण सिंह होरा, समाजसेवी एवं संयोजक प्रीतपाल सिंह होरा, पूर्व विधायक कुलदीप जुनेजा, पूर्व विधायक विकास उपाध्याय, जसबीर सिंह भाटिया, परविंदर सिंह भाटिया, बलविंदर सिंह अरोरा, राजेंद्र सिंह भूटानी, बॉबी सिंह होरा, दिलेंदर सिंह ढिल्लन, कमलजीत सिंह गुम्बर और लवली सिंह सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
विधायक पुरंदर मिश्रा ने क्या कहा
विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि गुरु अर्जुन देव जी का बलिदान पूरी मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि सिख समाज सदैव सेवा, समर्पण और भाईचारे की मिसाल पेश करता आया है। वहीं, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा ने गुरु साहिब की शहादत को त्याग, तपस्या और धर्म की रक्षा का सर्वोच्च प्रतीक बताया।
ग्रैंड ग्रुप के चेयरमैन गुरुचरण सिंह होरा ने क्या कहा
ग्रैंड ग्रुप के चेयरमैन गुरुचरण सिंह होरा ने कहा कि गुरु अर्जुन देव जी ने प्रेम, सहनशीलता और मानवता का संदेश देकर समाज को एकता के सूत्र में बांधने का कार्य किया। संयोजक प्रीतपाल सिंह होरा ने बताया कि गुरु अर्जुन देव जी ने ‘आदि ग्रंथ’ का संकलन कर सिख धर्म को आध्यात्मिक दिशा प्रदान की और उनका जीवन सत्य, सेवा एवं त्याग का प्रतीक रहा।
गौरतलब है कि गुरु अर्जुन देव जी सिख धर्म के प्रथम शहीद गुरु थे, जिन्होंने वर्ष 1606 में अपने धर्म और सिद्धांतों की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी स्मृति में सिख समुदाय हर वर्ष गर्मी के मौसम में छबील सेवा आयोजित कर शरबत एवं प्रसाद का वितरण करता है। यह परंपरा केवल सेवा का कार्य नहीं, बल्कि मानवता, करुणा और भाईचारे का जीवंत संदेश भी है।
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