वैशाख अमावस्या 2026: पितृ दोष शांति के लिए विशेष दिन, जानें तिथि, पूजा विधि और दान का महत्व – वास्तु गुरु राणा सिकंदर के अनुसार | Raipur News Today
आज की रायपुर खबर के अनुसार... हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को पितरों की पूजा और तर्पण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। साल 2026 में वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल, शुक्रवार को पड़ रही है। इस दिन को सतुआ अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इस अवसर पर सत्तू का दान विशेष रूप से किया जाता है।
वास्तु गुरु राणा सिकंदर के अनुसार, यह दिन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि ऊर्जा संतुलन और वास्तु सुधार के लिहाज से भी बेहद प्रभावशाली माना जाता है। इस दिन किए गए उपाय पितृ दोष को शांत करने के साथ-साथ घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
तिथि और शुभ समय
पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 16 अप्रैल की रात से प्रारंभ होकर 17 अप्रैल 2026 की शाम तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर 17 अप्रैल को ही यह पर्व मनाया जाएगा।
वास्तु गुरु राणा सिकंदर बताते हैं कि सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और पूजा करना सबसे अधिक फलदायी होता है। इस समय किया गया तर्पण पितरों तक सीधे पहुंचता है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
क्यों खास है यह अमावस्या?
वैशाख माह भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है और अमावस्या पितरों को। ऐसे में यह संयोग अत्यंत शुभ बन जाता है।
राणा सिकंदर के अनुसार, इस दिन घर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए विशेष उपाय किए जाने चाहिए। यदि घर में लगातार परेशानी, आर्थिक संकट या मानसिक तनाव बना रहता है, तो यह पितृ दोष का संकेत हो सकता है।
पूजा विधि – वास्तु के अनुसार कैसे करें
वास्तु गुरु राणा सिकंदर के अनुसार, इस दिन पूजा करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए:।
- सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें
- घर के मंदिर की साफ-सफाई करें और गंगाजल छिड़कें
- भगवान विष्णु और पितरों की पूजा करें
- दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों का तर्पण करें
- पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं
उनका कहना है कि पूजा के समय मन को शांत और एकाग्र रखना बेहद जरूरी है, तभी इसका पूर्ण लाभ मिलता है।
पितृ दोष दूर करने के खास उपाय
राणा सिकंदर के अनुसार, वैशाख अमावस्या के दिन ये उपाय जरूर करने चाहिए:।
- पितरों के नाम जल और तिल अर्पित करें
- काले तिल और जल से तर्पण करें
- गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराएं
- गाय, कुत्ते और पक्षियों को भोजन दें
- घर के दक्षिण-पश्चिम कोने को साफ और व्यवस्थित रखें
वास्तु के अनुसार दक्षिण दिशा पितरों से जुड़ी होती है, इसलिए इस दिशा को स्वच्छ और संतुलित रखना अत्यंत जरूरी है।
क्या दान करना सबसे शुभ?
इस दिन दान का विशेष महत्व बताया गया है। राणा सिकंदर के अनुसार, यदि सही वस्तुओं का दान किया जाए तो पितृ दोष जल्दी शांत होता है।
- सत्तू, जल से भरा घड़ा
- तिल, गुड़ और अन्न
- छाता, जूते-चप्पल
- वस्त्र और दक्षिणा
दान करते समय श्रद्धा और निस्वार्थ भाव रखना सबसे जरूरी माना गया है।
क्या न करें
इस दिन कुछ कार्यों से बचना भी जरूरी है:।
- नकारात्मक सोच और क्रोध से दूर रहें
- मांसाहार और नशे से परहेज करें
- किसी का अपमान न करें
- झूठ और धोखे से बचें
राणा सिकंदर के अनुसार, अमावस्या के दिन किया गया हर कर्म कई गुना प्रभाव डालता है, इसलिए अच्छे कर्मों पर ध्यान देना चाहिए।
निष्कर्ष
वैशाख अमावस्या 2026 पितरों की कृपा पाने और जीवन की बाधाओं को दूर करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। वास्तु गुरु राणा सिकंदर के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा, तर्पण और दान करने से न केवल पितृ दोष शांत होता है, बल्कि घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का भी आगमन होता है।
यदि इस दिन बताए गए सरल उपाय अपनाए जाएं, तो जीवन में स्थिरता और शांति प्राप्त की जा सकती है।
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