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8th Pay Commission: UPS-NPS में फंसे रिटायर्ड कर्मचारियों की बढ़ी चिंता, पेंशन संकट पर सरकार से बड़ी मांग

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8th Pay Commission: UPS-NPS में फंसे रिटायर्ड कर्मचारियों की बढ़ी चिंता, पेंशन संकट पर सरकार से बड़ी मांग
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देश में 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं तेज हैं। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को उम्मीद है कि नए वेतन आयोग से वेतन और पेंशन में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इसी बीच यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से जुड़े रिटायर्ड कर्मचारियों की समस्याएं सामने आने लगी हैं। कई सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें न तो NPS के तहत पूरी पेंशन मिल रही है और न ही UPS में उनका नाम शामिल किया गया है।

अखिल भारतीय एनपीएस एम्पलाइज फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. मनजीत सिंह पटेल ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि हजारों कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। उनका कहना है कि कुछ कर्मचारियों को पेंशन का लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा है, जबकि कई मामलों में रिकॉर्ड और डेटा अपडेट नहीं होने से दिक्कतें बढ़ गई हैं।

UPS और NPS को लेकर क्यों बढ़ रही है चिंता?

सरकार ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) की जगह NPS लागू किया था, जिसमें कर्मचारियों और सरकार दोनों का योगदान निवेश के आधार पर जमा होता है। बाद में कर्मचारियों की मांग पर यूनिफाइड पेंशन स्कीम यानी UPS को लेकर चर्चा शुरू हुई, ताकि रिटायरमेंट के बाद निश्चित पेंशन सुनिश्चित की जा सके।

लेकिन वर्तमान में कई कर्मचारी ऐसे हैं जो रिटायर होने के बाद भी स्पष्ट नहीं कर पा रहे कि उन्हें किस योजना के तहत लाभ मिलेगा। कर्मचारी संगठनों का दावा है कि कुछ विभागों में UPS लागू होने की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है, जिसके कारण पेंशन भुगतान में देरी हो रही है।

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8वें वेतन आयोग से बढ़ी उम्मीदें

8वें वेतन आयोग के गठन के बाद केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने आयोग के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें न्यूनतम बेसिक सैलरी 65 हजार रुपये करने, फिटमेंट फैक्टर 3.8 लागू करने और पेंशन सुधारों को प्राथमिकता देने की मांग शामिल है।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मौजूदा महंगाई और बढ़ते खर्चों को देखते हुए पेंशन व्यवस्था को मजबूत बनाना जरूरी है। कई संगठनों ने यह भी मांग की है कि NPS कर्मचारियों को OPS का विकल्प दिया जाए ताकि उन्हें निश्चित पेंशन सुरक्षा मिल सके।

रिटायर्ड कर्मचारियों की क्या है मुख्य परेशानी?

रिटायर हो चुके कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें पेंशन से जुड़ी प्रक्रियाओं में भारी परेशानी हो रही है। कुछ मामलों में कर्मचारियों के खाते UPS पोर्टल पर अपडेट नहीं हुए हैं, जबकि कई कर्मचारियों को यह तक नहीं बताया गया कि वे किस योजना के अंतर्गत आते हैं।

पेंशन भुगतान में देरी होने से बुजुर्ग कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। मेडिकल खर्च, दवाइयां और घरेलू जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो रहा है। कर्मचारी संगठनों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि UPS और NPS के बीच स्पष्ट नीति बनाई जाए ताकि रिटायर्ड कर्मचारियों को परेशान न होना पड़े।

OPS बहाली की मांग फिर तेज

8वें वेतन आयोग की चर्चाओं के बीच पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग भी तेज हो गई है। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि OPS में कर्मचारियों को अंतिम वेतन के आधार पर सुनिश्चित पेंशन मिलती थी, जबकि NPS बाजार आधारित व्यवस्था होने के कारण जोखिम से जुड़ी हुई है।

कुछ संगठनों ने आयोग के सामने यह सुझाव रखा है कि कर्मचारियों को OPS चुनने का विकल्प दिया जाए। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि OPS लागू करने से सरकारी खजाने पर भारी बोझ बढ़ सकता है।

सरकार के सामने बड़ी चुनौती

सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह कर्मचारियों की पेंशन सुरक्षा और वित्तीय बोझ के बीच संतुलन कैसे बनाए। एक तरफ लाखों कर्मचारी निश्चित पेंशन की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार वित्तीय अनुशासन बनाए रखना चाहती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें आने के बाद पेंशन ढांचे में बड़ा बदलाव संभव है। इससे केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनर्स और भविष्य में रिटायर होने वाले कर्मचारियों को राहत मिल सकती है।

निष्कर्ष

8वें वेतन आयोग के बीच UPS और NPS से जुड़े पेंशन संकट ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। रिटायर्ड कर्मचारियों की समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं और कर्मचारी संगठन जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं। आने वाले समय में सरकार और वेतन आयोग की सिफारिशें यह तय करेंगी कि कर्मचारियों को भविष्य में कितनी आर्थिक सुरक्षा मिल पाएगी। 

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