सोनम वांगचुक ने अस्पताल से 'संसद चलो' मार्च में शामिल होने की अपील की
प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सोमवार, 20 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल के अधिकारियों से अस्थायी रूप से छुट्टी देने का अनुरोध किया है। उनका यह अनुरोध कॉकक्रोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित 'संसद चलो' मार्च में शामिल होने के लिए है। अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 23वें दिन पर, वांगचुक को 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस द्वारा विरोध स्थल से हटाकर जबरन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने इस कार्रवाई को "अवैध हिरासत" करार दिया है और अपनी स्वास्थ्य स्थिति को सामान्य बताते हुए, संसद मार्च में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की तीव्र इच्छा व्यक्त की है। उनकी यह अपील उनके संघर्ष और लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
अस्पताल से निकलने की अपील
सोनम वांगचुक ने सफदरजंग अस्पताल के अधिकारियों को एक हस्तलिखित पत्र सौंपा, जिसमें उन्होंने अपनी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी दी। पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा था, "यह बताने के लिए है कि मैं आज बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूं। मेरे स्वास्थ्य के मापदंड भी काफी सामान्य दिख रहे हैं।" इस कथन के साथ, उन्होंने अस्पताल प्रशासन से अनुरोध किया, "इसलिए मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि कृपया मुझे अस्पताल छोड़ने की अनुमति दें, भले ही अस्थायी रूप से, ताकि मैं आज सुबह संसद मार्च – 'संसद चलो' में शामिल हो सकूं।" यह अपील उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और चल रहे विरोध प्रदर्शन के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है। वांगचुक का मानना है कि उनकी शारीरिक स्थिति उन्हें ऐसे महत्वपूर्ण आंदोलन में भाग लेने की अनुमति देती है। यह मुखर अपील अस्पताल के भीतर उनकी कथित 'अवैध हिरासत' के खिलाफ उनके संघर्ष को और अधिक बल प्रदान करती है।
जबरन अस्पताल में भर्ती और कानूनी लड़ाई
वांगचुक को जुलाई 18 को उनके विरोध स्थल से हटाया गया और दिल्ली पुलिस द्वारा जबरन सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने इस कार्रवाई के पीछे उनके स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों और दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला दिया था। हालांकि, वांगचुक ने पुलिस की इस कार्रवाई को "अवैध हिरासत" बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें उनकी मर्जी के खिलाफ अस्पताल में रोका जा रहा है, जबकि उनके सभी स्वास्थ्य मापदंड सामान्य हैं। इस बीच, दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोनम वांगचुक की पत्नी द्वारा दायर एक अपील पर सुनवाई करने की सहमति व्यक्त की है। यह अपील एक न्यायाधीश के उस फैसले को चुनौती देती है जिसमें वांगचुक को उनकी पसंद के एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था। यह कानूनी लड़ाई न केवल उनके स्वास्थ्य और स्वतंत्रता के अधिकार को लेकर एक महत्वपूर्ण मोड़ बन गई है, बल्कि नागरिक स्वतंत्रता पर सरकारी नियंत्रण के सवाल भी उठाती है।
स्वास्थ्य बुलेटिन और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल
सफदरजंग अस्पताल ने दिन की शुरुआत में एक नया स्वास्थ्य बुलेटिन जारी किया था, जिसमें कहा गया कि सोनम वांगचुक के महत्वपूर्ण मापदंड स्थिर हैं, लेकिन उनकी स्थिति को अभी भी करीबी चिकित्सा निगरानी की आवश्यकता है। बुलेटिन में यह भी उल्लेख था कि उनके रक्त मापदंडों को निरंतर नैदानिक अवलोकन की आवश्यकता है। वांगचुक अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 23वें दिन पर हैं, जो उनके संघर्ष की गंभीरता को दर्शाता है। इससे पहले, उन्होंने CJP के 'संसद चलो' मार्च से पहले अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने के लिए तीन प्रमुख शर्तें भी रखी थीं, हालांकि इन शर्तों का पूर्ण विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। उनकी यह लंबी भूख हड़ताल पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के अधिकारों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को राष्ट्रीय पटल पर लाने का एक सशक्त माध्यम बन गई है।
'संसद चलो' मार्च और CJP का उद्देश्य
कॉकक्रोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित 'संसद चलो' मार्च का उद्देश्य संभवतः महत्वपूर्ण सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है, विशेषकर उन मुद्दों पर जिनके लिए सोनम वांगचुक लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। वांगचुक जैसे प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं की इस आंदोलन में भागीदारी इसे और अधिक बल प्रदान करेगी। यह मार्च ऐसे संवेदनशील समय में हो रहा है जब वांगचुक स्वयं अपनी स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका यह प्रयास न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष को उजागर करता है, बल्कि व्यापक रूप से उन सभी आवाजों को भी प्रतिध्वनित करता है जो न्याय, पर्यावरणीय संरक्षण और सुशासन के लिए संघर्षरत हैं। इस मार्च में उनकी संभावित उपस्थिति आंदोलनकारियों के मनोबल को बढ़ा सकती है और राष्ट्रीय स्तर पर उनके मुद्दों को अधिक प्रमुखता से उठा सकती है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ सकता है।