राज्यपाल डेका से असम के शास्त्रीय नृत्य कलाकारों की सौजन्य मुलाकात
असम के शास्त्रीय नृत्य कला के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से, राज्य के प्रतिष्ठित शास्त्रीय नृत्य कलाकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में राजभवन, गुवाहाटी में राज्यपाल रमेन डेका से सौजन्य मुलाकात की। इस महत्वपूर्ण बैठक में, कलाकारों ने असम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने और नृत्य कला से जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की, जिसमें सरकारी सहायता और प्रोत्साहन की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य राज्य की पारंपरिक नृत्य शैलियों को पुनर्जीवित करने और उन्हें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान दिलाने के लिए राज्यपाल का समर्थन प्राप्त करना था।
कला और कलाकारों का सम्मान
बैठक का आरंभ राज्यपाल रमेन डेका के गर्मजोशी भरे स्वागत के साथ हुआ, जिन्होंने कलाकारों के समर्पण और असम की अनूठी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने के उनके अथक प्रयासों की सराहना की। प्रतिनिधिमंडल में पद्मश्री डॉ. इंदिरा पी.पी. बोरा, शास्त्रीय नृत्यांगना अंजना चौधरी, और सत्त्रिया नृत्य गुरु जितेंद्र नाथ गोस्वामी जैसे प्रमुख कलाकार शामिल थे, जो अपनी कला के माध्यम से असम की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने राज्यपाल को असम की विभिन्न शास्त्रीय नृत्य शैलियों, जैसे सत्त्रिया नृत्य, ओजापाली, और देवदासी नृत्य की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया। कलाकारों ने बताया कि इन नृत्य शैलियों को जीवित रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है, क्योंकि शहरीकरण और आधुनिकता के प्रभाव में कई युवा अपनी जड़ों से कट रहे हैं। उन्होंने इन कला रूपों की ऐतिहासिक महत्ता और सामाजिक भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
चुनौतियों और मांगों पर चर्चा
मुलाकात के दौरान, कलाकारों ने शास्त्रीय नृत्य के क्षेत्र में आने वाली कई गंभीर चुनौतियों को रेखांकित किया। उन्होंने प्रशिक्षण के लिए सीमित वित्तीय संसाधनों, प्रदर्शन के अवसरों की कमी और युवा पीढ़ी में घटती रुचि पर गहरी चिंता व्यक्त की। डॉ. इंदिरा पी.पी. बोरा ने अपनी बात रखते हुए कहा, "हमारी कला हमारी पहचान है, लेकिन इसे जीवित रखने और विकसित करने के लिए पर्याप्त सरकारी सहायता और बुनियादी ढांचे की सख्त जरूरत है। कई प्रतिभाशाली कलाकार आर्थिक तंगी के कारण इस क्षेत्र को छोड़ने पर मजबूर हो रहे हैं।" प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें कलाकारों के लिए मासिक वजीफा, छात्रवृत्ति योजनाएं, सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम और राज्य के विभिन्न हिस्सों में कला प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की मांग की गई। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर असम के शास्त्रीय नृत्यों को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष कोष बनाने का भी अनुरोध किया, ताकि इन कला रूपों को व्यापक पहचान मिल सके और कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर सकें। ज्ञापन में यह भी सुझाव दिया गया कि स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में शास्त्रीय नृत्य को शामिल किया जाए, ताकि कम उम्र से ही बच्चों में इसके प्रति रुचि विकसित हो सके।
राज्यपाल का आश्वासन और समर्थन
राज्यपाल रमेन डेका ने कलाकारों की चिंताओं को ध्यानपूर्वक सुना और उन्हें आश्वासन दिया कि राज्य सरकार असम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, "आप जैसे समर्पित कलाकार हमारी संस्कृति के सच्चे संरक्षक हैं, और आपकी मेहनत व्यर्थ नहीं जाएगी। सरकार आपकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी और कला के विकास के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करेगी।" राज्यपाल ने कलाकारों के कल्याण और कला के प्रचार-प्रसार के लिए संभावित सरकारी योजनाओं की समीक्षा करने का वादा किया। उन्होंने संस्कृति विभाग को कलाकारों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और उन्हें व्यावहारिक रूप देने के लिए एक कार्य योजना तैयार करने का निर्देश देने की बात कही। उन्होंने युवाओं को शास्त्रीय नृत्य सीखने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु जागरूकता अभियान चलाने की भी वकालत की, ताकि नई पीढ़ी इस विरासत से जुड़ सके। राज्यपाल ने कला और संस्कृति के क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया, ताकि सरकारी प्रयासों को पूरक बनाया जा सके और कला संस्थानों को वित्तीय स्थिरता मिल सके।
सांस्कृतिक पुनरुत्थान की दिशा में एक कदम
यह सौजन्य मुलाकात असम की शास्त्रीय नृत्य कला के पुनरुत्थान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। कलाकारों और राज्यपाल के बीच यह सीधा संवाद कलाकारों की आवाज़ को नीति-निर्माताओं तक पहुंचाने और उन्हें सीधे अपनी समस्याओं से अवगत कराने का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। इस तरह की पहल न केवल कलाकारों का मनोबल बढ़ाती है, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने और उसे विश्व मंच पर प्रस्तुत करने के लिए एक सामूहिक प्रयास को भी बढ़ावा देती है। यह अपेक्षा की जाती है कि इस बैठक के परिणामस्वरूप असम की शास्त्रीय नृत्य कला के विकास और संरक्षण के लिए ठोस नीतियां और कार्यक्रम सामने आएंगे, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी इस अनमोल विरासत का लाभ उठा सकें। कलाकारों ने राज्यपाल के सकारात्मक रुख और समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया, उम्मीद जताई कि उनकी मांगों पर जल्द ही कार्रवाई की जाएगी और असम की शास्त्रीय नृत्य परंपरा को नया जीवन मिलेगा।
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