देश 9 मिनट पढ़ें

ओटीटी सामग्री पर कसेगा शिकंजा, CBFC मंजूरी अनिवार्य

इस खबर की वेब स्टोरी देखें
40 व्यूज़
ओटीटी सामग्री पर कसेगा शिकंजा, CBFC मंजूरी अनिवार्य
देश

भारत में डिजिटल सामग्री के बढ़ते प्रभाव और हाल ही में उठे विवादों के मद्देनजर, केंद्र सरकार ने ओटीटी (ओवर-द-टॉप) प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज होने वाली फिल्मों और वेब सीरीज के लिए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की मंजूरी को अनिवार्य करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह कदम पंजाबी सुपरस्टार दिलजीत दोसांझ की आगामी फिल्म 'जट्ट एंड जूलियट 3' के गाने 'सतलुज' को लेकर उठे विवाद के ठीक बाद आया है, जिसमें सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर से संबंधित संवेदनशील मुद्दों पर गीत के बोलों को लेकर आपत्ति जताई गई थी। इस नए नियम का उद्देश्य ओटीटी सामग्री की जवाबदेही सुनिश्चित करना, विभिन्न प्लेटफार्मों पर एकरूपता लाना और संवेदनशील विषयों पर सामग्री के गैर-जिम्मेदाराना प्रस्तुतीकरण को रोकना है। यह नीतिगत बदलाव सभी भारतीय ओटीटी प्लेटफार्मों पर लागू होगा और जल्द ही इसके औपचारिक दिशानिर्देश जारी होने की उम्मीद है, जिससे कंटेंट निर्माताओं और प्लेटफार्म संचालकों दोनों के लिए नई चुनौतियां और अवसर पैदा होंगे।

ओटीटी सामग्री पर कसता शिकंजा

अब तक, पारंपरिक सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली फिल्मों के विपरीत, ओटीटी प्लेटफॉर्म पर जारी होने वाली सामग्री को CBFC की पूर्व-मंजूरी की आवश्यकता नहीं थी। इन प्लेटफार्मों पर आमतौर पर सामग्री को स्व-नियमन दिशानिर्देशों के तहत वर्गीकृत किया जाता था, जिसमें दर्शक की आयु के अनुसार सामग्री को रेटिंग दी जाती थी (जैसे U, U/A 7+, U/A 13+, U/A 16+, A)। हालांकि, इन स्व-नियमन तंत्रों को अक्सर अपर्याप्त पाया गया है, खासकर जब सामग्री सामाजिक, राजनीतिक या धार्मिक रूप से संवेदनशील मुद्दों को छूती है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का मानना है कि ओटीटी सामग्री के लिए CBFC प्रमाणन अनिवार्य करके, सरकार डिजिटल मीडिया और पारंपरिक मीडिया के बीच नियामक अंतर को पाटना चाहती है। इस कदम से सामग्री निर्माताओं पर अधिक जिम्मेदारी आएगी, क्योंकि उन्हें अब अपनी सामग्री को सार्वजनिक रूप से जारी करने से पहले एक बाहरी नियामक निकाय के मानकों को पूरा करना होगा। यह भारत में डिजिटल सामग्री परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है, जिसका सीधा असर सामग्री निर्माण की प्रक्रिया, रिलीज की समय-सीमा और अंततः दर्शकों को मिलने वाली सामग्री पर पड़ेगा।

विवादों का बढ़ता ग्राफ और सरकारी हस्तक्षेप

ओटीटी प्लेटफार्मों पर सामग्री को लेकर विवादों का इतिहास रहा है। 'तांडव', 'मिर्जापुर', और हाल ही में दिलजीत दोसांझ के गीत 'सतलुज' जैसे कई उदाहरण हैं जहां सामग्री के कुछ हिस्सों को लेकर सार्वजनिक आक्रोश और कानूनी शिकायतें दर्ज की गईं। 'सतलुज' गीत पर आपत्ति इसलिए जताई गई क्योंकि इसके बोलों को सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर परियोजना से जुड़े ऐतिहासिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दे को गलत तरीके से या भड़काऊ ढंग से प्रस्तुत करने वाला माना गया। इस तरह के विवादों ने सरकार को ओटीटी सामग्री पर अधिक प्रत्यक्ष नियंत्रण स्थापित करने के लिए प्रेरित किया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का तर्क है कि जब तक ओटीटी सामग्री को एक स्वतंत्र नियामक निकाय द्वारा प्रमाणित नहीं किया जाता, तब तक राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और सार्वजनिक नैतिकता को प्रभावित करने वाली सामग्री को अनियंत्रित रूप से प्रसारित होने का जोखिम बना रहता है। यह कदम सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह डिजिटल स्पेस को अधिक जवाबदेह और सुरक्षित बनाना चाहती है, खासकर युवा दर्शकों के लिए।

प्रमाणन प्रक्रिया और उसके संभावित प्रभाव

नए नियमों के तहत, ओटीटी पर रिलीज होने वाली प्रत्येक फिल्म और वेब सीरीज को अब CBFC से प्रमाणन प्राप्त करना होगा, ठीक उसी तरह जैसे सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली फिल्मों के लिए होता है। इसका अर्थ है कि सामग्री को U (सार्वजनिक), U/A (कुछ प्रतिबंधों के साथ सार्वजनिक) या A (वयस्क) जैसी श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा। यह प्रक्रिया सामग्री निर्माताओं के लिए अतिरिक्त कदम और समय की मांग करेगी, जिससे रिलीज की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। CBFC के पास आपत्तिजनक दृश्यों या संवादों को हटाने या संशोधित करने का अधिकार भी होगा, जिससे रचनात्मक स्वतंत्रता पर बहस छिड़ सकती है। हालांकि, सरकार का तर्क है कि यह कदम केवल जिम्मेदार रचनात्मकता को बढ़ावा देगा और अत्यधिक संवेदनशीलता या अनुचित सामग्री के प्रसार को रोकेगा। इस बदलाव से ओटीटी प्लेटफार्मों और सामग्री निर्माताओं के लिए अनुपालन लागत में भी वृद्धि हो सकती है, क्योंकि उन्हें अब प्रमाणन प्रक्रिया के लिए आवेदन करना होगा और संभावित संशोधनों को शामिल करना होगा। दीर्घकालिक प्रभाव यह होगा कि भारतीय ओटीटी सामग्री अधिक मुख्यधारा और व्यापक दर्शकों के लिए उपयुक्त हो सकती है, लेकिन साथ ही, यह कुछ विशिष्ट या जोखिम भरी सामग्री के उत्पादन को भी हतोत्साहित कर सकती है

उत्पाद लोड हो रहे हैं…

डिजिटल इंडिया के लिए नई चुनौती और अवसर

ओटीटी सामग्री पर CBFC प्रमाणन अनिवार्य करने का निर्णय भारत के डिजिटल मीडिया परिदृश्य के लिए एक नई चुनौती और अवसर दोनों प्रस्तुत करता है। चुनौती यह है कि क्या यह विनियमन नवाचार और रचनात्मकता को बाधित करेगा या क्या यह एक अधिक परिपक्व और जिम्मेदार सामग्री उद्योग को जन्म देगा। अवसर यह है कि यह भारत को एक ऐसा देश बना सकता है जहां डिजिटल सामग्री उच्च गुणवत्ता और नैतिक मानकों को पूरा करती है। यह कदम डिजिटल इंडिया के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप भी है, जहां सरकार डिजिटल सेवाओं और सामग्री को विनियमित करने और उन्हें अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में काम कर रही है। वैश्विक स्तर पर भी कई देशों में डिजिटल सामग्री को लेकर बहस चल रही है, और भारत का यह कदम अन्य देशों के लिए एक मॉडल बन सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म और सामग्री निर्माता इन नए नियमों के अनुकूल कैसे होते हैं, और क्या यह भारतीय डिजिटल मनोरंजन उद्योग को एक नई दिशा देगा। इस नियामक बदलाव के साथ, उम्मीद है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सामग्री न केवल मनोरंजक होगी बल्कि सामाजिक रूप से जिम्मेदार भी होगी।

टैग्स

और पढ़ें

लेखक

आपकी प्रतिक्रिया