गैस की कीमतों और सप्लाई पर दबाव, LPG से PNG की ओर बढ़ रहा रुझान
देश में रसोई गैस (LPG) को लेकर हालात तेजी से बदल रहे हैं। एक ओर गैस की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, वहीं दूसरी ओर सप्लाई और वैश्विक परिस्थितियों के कारण बाजार में अस्थिरता देखने को मिल रही है। इसका सीधा असर आम लोगों के बजट और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है।
15 अप्रैल 2026 के ताजा आंकड़ों के अनुसार देश के प्रमुख शहरों में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत करीब ₹912 से ₹965 के बीच बनी हुई है, जबकि कमर्शियल गैस सिलेंडर ₹2000 से ₹2300 तक पहुंच चुका है।
कीमतों में बढ़ोतरी से बढ़ा बोझ
गैस सिलेंडर की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण आम परिवारों का घरेलू बजट बिगड़ रहा है। खासकर मध्यम वर्ग और गरीब वर्ग के लिए रसोई गैस का खर्च पहले से ज्यादा हो गया है।
कमर्शियल LPG के महंगे होने का असर होटल, ढाबा और स्ट्रीट फूड कारोबार पर भी पड़ा है। हाल ही में कई शहरों में खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ गए हैं, क्योंकि दुकानदारों की लागत बढ़ गई है।
वैश्विक संकट का असर
गैस की कीमतों और सप्लाई पर अंतरराष्ट्रीय हालात का भी बड़ा असर पड़ रहा है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अनिश्चितता के कारण LPG की सप्लाई प्रभावित हुई है।
भारत अपनी कुल LPG जरूरत का लगभग 60% आयात करता है, जिसमें से करीब 90% हिस्सा पहले मध्य पूर्व से आता था। ऐसे में वैश्विक संकट का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ रहा है।
इसके चलते भारत अब अमेरिका, रूस और अन्य देशों से गैस आयात बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, ताकि सप्लाई में कमी न हो।
PNG की ओर बढ़ता रुझान
गैस की बढ़ती कीमतों और सप्लाई की अनिश्चितता के बीच अब लोग LPG छोड़कर PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
हाल ही में लाखों उपभोक्ताओं ने PNG कनेक्शन अपनाया है, क्योंकि यह सस्ता, सुरक्षित और लगातार उपलब्ध रहने वाला विकल्प माना जा रहा है।
सरकार भी PNG को बढ़ावा दे रही है, ताकि घरेलू गैस पर निर्भरता कम हो और ऊर्जा आपूर्ति अधिक स्थिर हो सके।
सरकार के कदम
सरकार ने गैस संकट को देखते हुए कई अहम कदम उठाए हैं। घरेलू उपयोग के लिए गैस की सप्लाई को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि कमर्शियल सेक्टर में कुछ कटौती की गई है।
इसके अलावा 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर की सुविधा भी शुरू की गई है, जिसे अब सिर्फ फोटो आईडी के जरिए खरीदा जा सकता है। इससे प्रवासी मजदूर और गरीब वर्ग को राहत मिलने की उम्मीद है।
सरकार ने कालाबाजारी रोकने के लिए सख्ती भी बढ़ाई है और देशभर में गैस वितरण पर निगरानी तेज कर दी है।
आम लोगों पर असर
गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है। घर का बजट बढ़ रहा है और लोग खर्च कम करने के लिए विकल्प तलाश रहे हैं।
कई परिवार अब गैस के उपयोग में कटौती कर रहे हैं या सस्ते विकल्प जैसे PNG या बायोगैस की ओर जा रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में भी लोग वैकल्पिक ईंधन अपनाने लगे हैं।
उद्योग और कारोबार पर प्रभाव
गैस की बढ़ती कीमतों का असर उद्योगों पर भी पड़ा है। खासकर खाद्य, फार्मा और छोटे उद्योगों को लागत बढ़ने का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार ने उद्योगों को राहत देने के लिए गैस सप्लाई का एक हिस्सा सुनिश्चित किया है, ताकि उत्पादन प्रभावित न हो।
भविष्य की दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। वैश्विक बाजार, डॉलर की स्थिति और भू-राजनीतिक घटनाएं इसमें अहम भूमिका निभाएंगी।
साथ ही, भारत में ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों—जैसे PNG, बायोगैस और सोलर—का उपयोग बढ़ने की संभावना है, जिससे LPG पर निर्भरता कम हो सकती है।
निष्कर्ष
गैस (LPG) आज हर घर की जरूरत है, लेकिन बढ़ती कीमतों और सप्लाई की चुनौतियों ने इसे एक बड़ा आर्थिक मुद्दा बना दिया है।
ऐसे में सरकार और उपभोक्ताओं दोनों के लिए जरूरी है कि वे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर ध्यान दें और भविष्य के लिए टिकाऊ समाधान अपनाएं।
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