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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नीलगंगा में की पूजा, सिंहस्थ 2028 पर दिया बड़ा बयान

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नीलगंगा में की पूजा, सिंहस्थ 2028 पर दिया बड़ा बयान
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गंगा दशहरा के पावन अवसर पर धर्म नगरी उज्जैन के नीलगंगा आश्रम में मां गंगा की प्रतिमा का विधि-विधान से पूजन और अभिषेक किया। हर साल की परंपरा का निर्वहन करते हुए, मुख्यमंत्री अपने व्यस्त कार्यक्रमों के बीच नीलगंगा सरोवर पहुंचे और गुप्त गंगा के दर्शन कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। इस दौरान उन्होंने संतों का सानिध्य प्राप्त किया और आगामी सिंहस्थ 2028 को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया, जिसमें उन्होंने सनातन संस्कृति के वैश्विक प्रदर्शन पर जोर दिया।

सनातन संस्कृति के वैभव का वैश्विक प्रदर्शन: सिंहस्थ 2028

नीलगंगा घाट पर आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में आध्यात्मिक ऊर्जा और आस्था का विशेष माहौल देखने को मिला। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संतों के सानिध्य में संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में सिंहस्थ 2028 एक ऐसा भव्य आयोजन होगा, जिसमें पूरी दुनिया सनातन संस्कृति का वैभव और उज्जैन की आध्यात्मिक गरिमा प्रत्यक्ष देखेगी। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह महाकुंभ भारतीय सभ्यता और संस्कृति का एक वैश्विक उत्सव होगा। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि मां शिप्रा के पवित्र घाटों पर संतों की भावना और सदियों पुरानी परंपराओं के अनुरूप ही सिंहस्थ का भव्य आयोजन सुनिश्चित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि सिंहस्थ हर 12 साल में आयोजित होने वाला एक महत्वपूर्ण हिंदू तीर्थ मेला है, जो धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक बड़ा केंद्र बनता है। मुख्यमंत्री का यह बयान प्रदेश सरकार की ओर से सिंहस्थ की तैयारियों और उसे विश्व पटल पर लाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक होगा, बल्कि यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगा।

संतों का सानिध्य और आध्यात्मिक प्रेरणा

इस पवित्र अवसर पर कई प्रमुख संत और धर्माचार्य उपस्थित रहे, जिन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का स्वागत किया और उन्हें अपना आशीर्वाद प्रदान किया। उपस्थित संतों में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि महाराज, अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज, शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज और नारायण गिरि महाराज जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तित्व शामिल थे। संतों के सानिध्य में मुख्यमंत्री ने प्रदेश की समृद्धि और शांति के लिए प्रार्थना की। इस प्रकार के आयोजनों में संतों की उपस्थिति न केवल धार्मिक अनुष्ठानों को गरिमा प्रदान करती है, बल्कि यह सरकार और धार्मिक समुदायों के बीच समन्वय और सहयोग को भी दर्शाती है। मुख्यमंत्री ने संतों से मार्गदर्शन प्राप्त किया और उज्जैन को एक विश्वस्तरीय धार्मिक केंद्र बनाने के लिए उनके सुझावों पर विचार करने का आश्वासन दिया। यह परंपरा भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है, जहाँ शासक धर्मगुरुओं से परामर्श और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, जो समाज में आध्यात्मिक मूल्यों की स्थापना में सहायक होता है। यह संवाद उज्जैन के विकास और धार्मिक महत्व को और अधिक बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

नीलगंगा आश्रम का विकास और सौंदर्यीकरण

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर नीलगंगा आश्रम स्थित गंगा सरोवर में विकास और सौंदर्यीकरण के कार्य तेजी से जारी हैं। इन कार्यों के लिए करीब 4 करोड़ 56 लाख रुपए की महत्वपूर्ण राशि आवंटित की गई है। इस परियोजना के तहत, सरोवर के चारों ओर एक आधुनिक परिक्रमा पथ का निर्माण किया जा रहा है, जो श्रद्धालुओं को एक सुगम और पवित्र अनुभव प्रदान करेगा। इसके अतिरिक्त, आश्रम परिसर में अन्य सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है ताकि आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इन विकास कार्यों का मुख्य उद्देश्य उज्जैन की आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करते हुए उसे एक आधुनिक तीर्थस्थल के रूप में विकसित करना है, खासकर सिंहस्थ 2028 से पहले, जब लाखों श्रद्धालु यहाँ एकत्रित होंगे। यह पहल न केवल स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान को भी सुदृढ़ करेगी और श्रद्धालुओं के लिए एक बेहतर अनुभव सुनिश्चित करेगी।

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का नीलगंगा आश्रम का दौरा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं था, बल्कि यह प्रदेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। उनके बयान और चल रहे विकास कार्य यह संकेत देते हैं कि उज्जैन आगामी वर्षों में एक महत्वपूर्ण वैश्विक धार्मिक केंद्र के रूप में उभरेगा, जहाँ सनातन धर्म का वैभव और दिव्यता पूरी दुनिया के सामने प्रस्तुत की जाएगी। यह प्रदेश के लिए गौरव का विषय है और धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

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