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भारत-साइप्रस संबंध मजबूत: PM मोदी-राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिडेस की मुलाकात

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भारत-साइप्रस संबंध मजबूत: PM मोदी-राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिडेस की मुलाकात
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भारत और साइप्रस के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती देने के उद्देश्य से, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस की शुक्रवार, 22 मई 2026 को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य एजेंडा व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करना था। दोनों नेताओं ने साझा हितों और सहयोग के नए आयामों पर विचार-विमर्श किया, जिसका लक्ष्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को गहरा करना और आपसी समझ को बढ़ाना है। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में लोकतांत्रिक मूल्यों और अंतर्राष्ट्रीय कानून के प्रति प्रतिबद्धता वाले देशों के बीच सहयोग का महत्व लगातार बढ़ रहा है।

उच्चस्तरीय वार्ता का एजेंडा

मुलाकात के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिडेस ने व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के लिए नए अवसरों की पहचान की गई, जिसमें फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यटन जैसे क्षेत्र शामिल हैं। कनेक्टिविटी पर भी गहन चर्चा हुई, जिसमें डिजिटल कनेक्टिविटी और समुद्री परिवहन लिंक को बेहतर बनाने के माध्यम से लोगों से लोगों के संपर्क को बढ़ावा देने के तरीकों पर विचार किया गया। आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त परियोजनाओं और निवेश फंडों की स्थापना की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत में पूर्वी भूमध्य सागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए सहयोग पर जोर दिया गया। दोनों नेताओं ने बहुपक्षीय मंचों, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र में साझा हितों को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। यह बैठक दोनों देशों के बीच एक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिडेस का भव्य स्वागत

साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस गुरुवार को नई दिल्ली पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा ने उनकी अगवानी की। राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिडेस को औपचारिक स्वागत समारोह और गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जो भारत द्वारा साइप्रस के साथ अपने संबंधों को दिए जाने वाले उच्च सम्मान को दर्शाता है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस यात्रा की जानकारी साझा करते हुए इसे भारत-साइप्रस साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम बताया। यह स्वागत समारोह सिर्फ एक औपचारिकता नहीं था, बल्कि यह दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक भी था। भारत और साइप्रस दोनों ही गुटनिरपेक्ष आंदोलन के शुरुआती सदस्य रहे हैं और तब से लेकर अब तक अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे का समर्थन करते रहे हैं। राष्ट्रपति की यह यात्रा दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग की भावना को और भी सुदृढ़ करने का अवसर प्रदान करती है।

भारत-साइप्रस संबंधों का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

भारत और साइप्रस के बीच राजनयिक संबंध दशकों पुराने हैं, जो आपसी सम्मान, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और अंतर्राष्ट्रीय शांति व सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता पर आधारित हैं। दोनों देशों ने हमेशा एक-दूसरे के संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया है। साइप्रस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के दावे का लगातार समर्थन किया है, जो दोनों देशों के बीच गहरे रणनीतिक तालमेल को दर्शाता है। ऐतिहासिक रूप से, साइप्रस ने भारत को यूरोप और मध्य पूर्व के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार के रूप में देखा है, जबकि भारत ने साइप्रस को भूमध्यसागरीय क्षेत्र में एक विश्वसनीय भागीदार माना है। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों से लोगों के संपर्क भी काफी मजबूत रहे हैं, जिसमें शिक्षा और पर्यटन प्रमुख भूमिका निभाते हैं। भारतीय प्रवासी साइप्रस में सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं, जिससे दोनों समाजों के बीच सेतु का निर्माण हो रहा है। यह ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वर्तमान उच्चस्तरीय वार्ता के लिए एक मजबूत नींव प्रदान करती है।

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भविष्य की राह और सहयोग के नए आयाम

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिडेस की मुलाकात ने भारत-साइप्रस संबंधों के लिए एक नई राह तैयार की है। इस बैठक से कई नए समझौतों और समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है, जो विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को संस्थागत रूप देंगे। विशेष रूप से, रक्षा सहयोग, साइबर सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी प्रयासों में संयुक्त कार्य समूहों के गठन की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है। भारत, अपनी 'एक्ट वेस्ट' नीति के तहत साइप्रस को एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में देखता है, जो यूरोप के साथ उसके संबंधों को मजबूत करने में सहायक हो सकता है। वहीं, साइप्रस के लिए, भारत एक विशाल और तेजी से बढ़ता बाजार है, जो उसके आर्थिक विविधीकरण के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद कर सकता है। शिक्षा के क्षेत्र में छात्र विनिमय कार्यक्रमों और अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच एक मजबूत, बहुआयामी और स्थायी साझेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी, जो भविष्य में दोनों देशों के लोगों के लिए समृद्धि और विकास के नए द्वार खोलेगी।

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