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भारत में सोने के आयात पर ब्रेक: अप्रैल में 30 साल की सबसे बड़ी गिरावट, टैक्स अनिश्चितता बनी वजह

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भारत में सोने के आयात पर ब्रेक: अप्रैल में 30 साल की सबसे बड़ी गिरावट, टैक्स अनिश्चितता बनी वजह
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अप्रैल 2026 में भारत में सोने के आयात में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक यह गिरावट इतनी तेज है कि आयात करीब 30 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। यह स्थिति देश के गोल्ड मार्केट, ज्वेलरी सेक्टर और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे रही है।

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है, जहां हर महीने औसतन 50 से 60 टन सोना आयात होता है। लेकिन अप्रैल 2026 में यह आंकड़ा घटकर करीब 15 टन रह गया, जो पिछले साल के लगभग 35 टन के मुकाबले काफी कम है।

क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?

इस गिरावट के पीछे कई अहम कारण सामने आए हैं। सबसे बड़ा कारण टैक्स और सरकारी नियमों से जुड़ी अनिश्चितता है। रिपोर्ट के अनुसार, आयातित सोने पर 3% IGST (इंटीग्रेटेड GST) को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पहले बैंकों को इस टैक्स से राहत थी, लेकिन अब अचानक इसकी मांग शुरू होने से आयातकों और बैंकों में भ्रम की स्थिति बन गई है।

इसके चलते कई बैंकों ने सोने की नई शिपमेंट रोक दी है और पहले से मंगाया गया सोना भी कस्टम में फंसा हुआ है।

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दूसरा बड़ा कारण सरकारी मंजूरी में देरी है। अप्रैल की शुरुआत में बैंकों को गोल्ड इम्पोर्ट के लिए जरूरी अनुमति समय पर नहीं मिली, जिससे आयात प्रक्रिया प्रभावित हुई।

मांग बनी रही, लेकिन सप्लाई घटी

दिलचस्प बात यह है कि सोने की मांग पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अक्षय तृतीया जैसे बड़े त्योहार के बावजूद आयात में गिरावट आई, जिससे साफ है कि समस्या मांग की नहीं बल्कि सप्लाई की है।

ज्वेलर्स और ट्रेडर्स को घरेलू बाजार में सोना जुटाने के लिए वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है, जैसे कि इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज (IIBX)। हालांकि वहां से मिलने वाली मात्रा सीमित है।

कीमतों और बाजार पर असर

सोने के आयात में गिरावट का असर कीमतों और बाजार दोनों पर पड़ सकता है। सप्लाई कम होने से घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है, हालांकि हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय कारणों से कीमतों में उतार-चढ़ाव भी देखा गया है।

इसके अलावा, ज्वेलरी सेक्टर पर भी असर पड़ रहा है। कई ज्वेलर्स नई खरीदारी कम कर रहे हैं और पुराने सोने को रीसायकल कर रहे हैं।

सरकार की रणनीति क्या है?

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार यह कदम जानबूझकर उठा रही है ताकि सोने के आयात को नियंत्रित किया जा सके। इससे देश का व्यापार घाटा (Trade Deficit) कम करने और रुपये को मजबूती देने में मदद मिल सकती है।

हालांकि इसका नकारात्मक असर यह है कि वैध व्यापार भी प्रभावित हो रहा है और बाजार में अनिश्चितता बढ़ रही है।

पहले से ही गिरावट का ट्रेंड

मार्च 2026 में भी सोने के आयात में बड़ी गिरावट देखी गई थी। उस समय आयात 30% महीने-दर-महीने और 59% साल-दर-साल घट गया था।

इससे साफ है कि यह गिरावट अचानक नहीं बल्कि पिछले कुछ महीनों से जारी एक ट्रेंड का हिस्सा है।

आगे क्या होगा?

आने वाले समय में सोने का आयात सरकार के फैसलों और टैक्स नियमों पर निर्भर करेगा। यदि IGST विवाद सुलझता है और आयात की मंजूरी प्रक्रिया आसान होती है, तो बाजार में फिर से तेजी आ सकती है।

लेकिन फिलहाल स्थिति यह संकेत दे रही है कि सोने का कारोबार दबाव में है और आने वाले महीनों में इसका असर कीमतों, ज्वेलरी बिजनेस और निवेश पर देखने को मिल सकता है।

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