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मोदी, ताकाइची ने मारुति के अत्याधुनिक खरखौदा प्लांट का संयुक्त उद्घाटन किया

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मोदी, ताकाइची ने मारुति के अत्याधुनिक खरखौदा प्लांट का संयुक्त उद्घाटन किया
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आज दोपहर सवा तीन से साढ़े तीन बजे के आसपास, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हरियाणा के खरखौदा में मारुति सुजुकी इंडिया की नई विनिर्माण सुविधा का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। यह उद्घाटन नई दिल्ली में आयोजित भारत-जापान आर्थिक मंच के साथ हुआ, जिसमें 150 से अधिक जापानी कंपनियां भाग ले रही हैं। यह पहल भारत में विनिर्माण को बढ़ावा देने, रोजगार के अवसर पैदा करने और दोनों देशों के बीच आर्थिक तथा रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह अत्याधुनिक संयंत्र मारुति सुजुकी की 'मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड' रणनीति का एक प्रमुख हिस्सा है, जो देश की औद्योगिक क्षमताओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगा।

उत्पादन क्षमता और भारी निवेश

खरखौदा संयंत्र मारुति सुजुकी का भारत में चौथा विनिर्माण संयंत्र है, जो गुरुग्राम, मानेसर और गुजरात में मौजूदा सुविधाओं के बाद स्थापित किया गया है। यह संयंत्र लगभग 800 एकड़ भूमि पर फैला हुआ है और इसमें एक एकीकृत आपूर्तिकर्ता पार्क भी शामिल है। वर्तमान में, इसमें दो परिचालन विनिर्माण इकाइयाँ हैं जिनकी संयुक्त स्थापित क्षमता प्रति वर्ष 5 लाख वाहन है। कंपनी की योजना इस क्षमता को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर प्रति वर्ष 10 लाख वाहन करने की है, जो अंततः 40 लाख वार्षिक उत्पादन क्षमता के मील के पत्थर की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है। मारुति सुजुकी ने इस सुविधा के लिए कुल 35,000 करोड़ रुपये का निवेश निर्धारित किया है, जिससे 21,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। यह निवेश न केवल क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति देगा, बल्कि भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

अत्याधुनिक तकनीक और उद्योग 5.0 का समावेश

यह नया संयंत्र कंपनी के 'सुजुकी स्मार्ट फैक्ट्री' कॉन्सेप्ट पर आधारित है, जिसमें उद्योग 5.0-सक्षम विनिर्माण और AI-संचालित मानव-जागरूक सहयोगी रोबोट, जिन्हें कोबोट्स भी कहा जाता है, का उपयोग किया गया है। इन उन्नत तकनीकों का उद्देश्य विनिर्माण सटीकता, उत्पादकता और कार्यस्थल सुरक्षा में सुधार करना है। कोबोट्स मानवीय कार्यबल के साथ मिलकर काम करते हुए जटिल प्रक्रियाओं को अधिक कुशलता और सुरक्षा के साथ पूरा करने में मदद करेंगे। यह तकनीकी नवाचार मारुति सुजुकी को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेगा और इसे ऑटोमोबाइल विनिर्माण में अग्रणी बनाए रखेगा। यह संयंत्र भारत में स्मार्ट विनिर्माण के लिए एक बेंचमार्क स्थापित करेगा, जो अन्य उद्योगों को भी इसी तरह की तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।

हरित विनिर्माण और स्थिरता के लक्ष्य

स्थिरता के मोर्चे पर, खरखौदा सुविधा पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं को अपनाते हुए संचालित होगी। यह संयंत्र 100% नवीकरणीय बिजली पर चलेगा, जिसमें 100% जल पुनर्चक्रण की सुविधा होगी, और यह एक जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (तरल अपशिष्ट का शून्य निष्कासन) विनिर्माण इकाई के रूप में कार्य करेगा। मारुति सुजुकी की योजना वित्त वर्ष 2026-27 तक संयंत्र के भीतर एक बायोगैस संयंत्र स्थापित करने की भी है। इसके अतिरिक्त, कंपनी पूर्ण उत्पादन क्षमता पर 70 मेगावाट तक की क्षमता वाला एक इन-हाउस सौर ऊर्जा संयंत्र विकसित करने और पर्यावरण-अनुकूल लॉजिस्टिक्स का समर्थन करने के लिए एक इन-प्लांट रेलवे साइडिंग बनाने की भी योजना बना रही है। ये पहल मारुति सुजुकी की पर्यावरणीय जिम्मेदारी के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं और इसे भारत में हरित विनिर्माण के अग्रदूतों में से एक बनाती हैं।

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भारत-जापान आर्थिक संबंधों का सुदृढ़ीकरण

खरखौदा संयंत्र का उद्घाटन भारत और जापान के बीच मजबूत होते आर्थिक और रणनीतिक संबंधों का प्रतीक है। यह उद्घाटन भारत-जापान आर्थिक मंच के साथ हुआ, जिसमें 150 से अधिक जापानी कंपनियां भाग ले रही हैं, जो भारत में निवेश और व्यापार के प्रति उनकी गहरी रुचि को दर्शाता है। जापान ने भारत के साथ सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने के लिए $12.5 बिलियन के निवेश का भी समर्थन किया है, जो दोनों देशों के बीच व्यापक सहयोग को रेखांकित करता है। यह संयंत्र न केवल मारुति सुजुकी के लिए एक महत्वपूर्ण विस्तार है, बल्कि यह भारत को वैश्विक विनिर्माण मानचित्र पर एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने और भारत-जापान साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में भी सहायक होगा।

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