देश 5 मिनट पढ़ें

RTE पर सरकार सख्त, स्कूलों पर बढ़ी निगरानी

106 व्यूज़
RTE पर सरकार सख्त, स्कूलों पर बढ़ी निगरानी
देश

देश में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून को लेकर सख्त रुख अपनाया है। हाल के निर्देशों में यह साफ किया गया है कि अब निजी स्कूलों में RTE के तहत होने वाले एडमिशन, फीस और चयन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सरकार का मानना है कि शिक्षा केवल एक सुविधा नहीं बल्कि हर बच्चे का मौलिक अधिकार है। इसी उद्देश्य के तहत अब शिक्षा विभाग द्वारा निगरानी तंत्र को मजबूत किया जा रहा है और स्कूलों पर सख्त नियम लागू किए जा रहे हैं।

निजी स्कूलों पर कड़ी निगरानी

नए निर्देशों के तहत निजी स्कूलों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वे RTE के तहत दाखिला लेने वाले बच्चों से किसी भी प्रकार की अतिरिक्त फीस नहीं ले सकते। यदि कोई स्कूल ऐसा करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें मान्यता रद्द करने तक के प्रावधान शामिल हैं।

अक्सर यह शिकायत सामने आती रही है कि कुछ स्कूल RTE छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं या उनसे अप्रत्यक्ष शुल्क वसूलते हैं। अब सरकार ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए जांच अभियान तेज कर दिए हैं।

उत्पाद लोड हो रहे हैं…

ऑनलाइन प्रक्रिया से बढ़ेगी पारदर्शिता

RTE एडमिशन प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे आवेदन से लेकर चयन तक की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना कम हो जाएगी।

कई राज्यों में अब लॉटरी सिस्टम के माध्यम से चयन किया जा रहा है, जिससे निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके। साथ ही अभिभावकों को भी जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं।

सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधार पर फोकस

सरकार केवल निजी स्कूलों पर सख्ती नहीं कर रही है, बल्कि सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसमें डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट क्लास, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने जैसे कदम शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता बेहतर होगी, तो RTE के तहत निजी स्कूलों पर निर्भरता भी कम हो जाएगी।

अभिभावकों और छात्रों को बड़ी राहत

सरकार के इस कदम से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित वर्ग के परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। RTE के तहत बच्चों को मुफ्त शिक्षा, किताबें और अन्य सुविधाएं मिलती हैं, जिससे उनकी पढ़ाई का बोझ कम होता है।

अब सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इन सुविधाओं का लाभ सही पात्र लोगों तक पहुंचे और कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।

शिकायत निवारण प्रणाली होगी मजबूत

RTE से जुड़े मामलों में शिकायतों के समाधान के लिए हेल्पलाइन, ऑनलाइन पोर्टल और जिला स्तर पर समितियों का गठन किया गया है। यदि किसी अभिभावक को नियमों का उल्लंघन दिखता है, तो वह सीधे शिकायत दर्ज करा सकता है।

अधिकारियों के अनुसार, शिकायत मिलने पर त्वरित जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।

आगे की रणनीति

सरकार आने वाले समय में RTE कानून को और प्रभावी बनाने के लिए डेटा आधारित मॉनिटरिंग, स्कूल रैंकिंग और सामाजिक ऑडिट जैसे कदम उठा सकती है।

शिक्षा विभाग का स्पष्ट संदेश है कि शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

टैग्स

और पढ़ें

लेखक
Aameen Parveen
Aameen Parveen is a reporter at Sakar Bharat, covering local news, civic issues, and ground reports with accuracy, clarity, and strong public focus.