पश्चिम बंगाल: 60 रथ यात्रा समितियों को ₹5 लाख की वित्तीय सहायता
इस खबर की वेब स्टोरी देखें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार, 13 जुलाई, 2026 को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि राज्य की 60 रथ यात्रा समितियों को 5 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम राज्य में सदियों पुराने धार्मिक आयोजनों को संरक्षित और बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि इस वर्ष हुगली जिले के तारकेश्वर में आयोजित होने वाली 30 किलोमीटर लंबी श्रावण यात्रा के दौरान भक्तों पर हेलिकॉप्टरों से फूलों की वर्षा की जाएगी। यह निर्णय विशेष रूप से जर्जर रथों के जीर्णोद्धार पर केंद्रित है और राज्य सरकार की ओर से इस धार्मिक पर्व में सक्रिय भागीदारी का पहला संकेत है।
ऐतिहासिक रथों का जीर्णोद्धार और संरक्षण
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अपनी घोषणा में इस बात पर जोर दिया कि कई पुराने रथ, विशेषकर जो लकड़ी से बने हैं, उन्हें तत्काल मरम्मत और जीर्णोद्धार की आवश्यकता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि रथ यात्रा समितियाँ इस वित्तीय सहायता का उपयोग रथों की मरम्मत और नवीनीकरण के लिए करेंगी। पश्चिम बंगाल में रथ यात्रा का उत्सव राज्य के कई हिस्सों में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, और इस पर्व के इर्द-गिर्द कई स्थानों पर मेलों का आयोजन भी होता है, जो स्थानीय संस्कृति और अर्थव्यवस्था का अभिन्न अंग हैं।
अधिकारी ने क्या बताया
अधिकारी ने बताया कि कुछ रथ यात्रा उत्सव, जैसे पूर्वी मेदिनीपुर में महिषादल और हुगली में महेश, सदियों पुराने हैं। उदाहरण के लिए, महिषादल की रथ यात्रा लगभग 250 साल पुरानी है, जबकि महेश की रथ यात्रा छह सदियों से भी अधिक पुरानी है और इसे पुरी के बाद दूसरा सबसे पुराना रथ उत्सव माना जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारें इन रथ यात्राओं के दौरान केवल कुछ यातायात पुलिस कर्मियों को भेजती थीं, लेकिन वर्तमान राज्य सरकार ने इस वर्ष से रथ यात्रा में सक्रिय रूप से भाग लेने का निर्णय लिया है। यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है जो राज्य के धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
सरकार की अभूतपूर्व पहल और सक्रिय भागीदारी
यह पहली बार है कि पश्चिम बंगाल सरकार रथ यात्रा समितियों को इस तरह की वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के अनुसार, यह पहल न केवल धार्मिक परंपराओं को बनाए रखने में मदद करेगी, बल्कि उन समुदायों को भी सशक्त करेगी जो इन आयोजनों के पीछे वर्षों से अथक प्रयास कर रहे हैं। राज्य सरकार का यह कदम धार्मिक आयोजनों को केवल सुरक्षा प्रदान करने से बढ़कर, उनके संरक्षण और संवर्धन में सीधी भागीदारी का प्रतीक है।
श्रावण यात्रा के दौरान हेलिकॉप्टरों से फूलों की वर्षा का निर्णय भी एक नई और अनूठी पहल है, जो भक्तों के अनुभव को और भी दिव्य और यादगार बनाएगी। यह कदम धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और राज्य की आध्यात्मिक छवि को मजबूत करने में भी सहायक हो सकता है। यह दर्शाता है कि सरकार केवल भौतिक संरचनाओं के जीर्णोद्धार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि धार्मिक उत्सवों के समग्र अनुभव को बेहतर बनाने के लिए भी प्रतिबद्ध है। यह पहल राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित होने वाले अन्य धार्मिक आयोजनों के लिए भी एक मिसाल कायम कर सकती है।
धार्मिक सद्भाव और भविष्य की योजनाएं
मुख्यमंत्री अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल शुरुआत है। उन्होंने कहा कि भविष्य में और अधिक रथ यात्रा समितियों को इस सूची में शामिल किया जाएगा। यह घोषणा दर्शाती है कि सरकार की योजना दीर्घकालिक है और इसका उद्देश्य राज्य भर में धार्मिक त्योहारों को व्यापक समर्थन देना है। यह कदम राज्य में धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा देने और विभिन्न समुदायों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने में भी मदद करेगा।
राज्य सरकार का यह निर्णय धार्मिक आयोजनों के प्रति उसके दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है। यह राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को संरक्षित करने का एक प्रयास है। इस पहल से रथों का जीर्णोद्धार होगा और स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों व व्यापारियों को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा। यह पश्चिम बंगाल में धार्मिक पर्यटन को एक नई दिशा दे सकता है और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक उजागर कर सकता है।
और पढ़ें
- देश न्यूज़
- ताज़ा खबरें
- चीनी मीडिया ने की PM मोदी की तारीफ, जिनपिंग का 7 साल बाद भारत दौरा
- बालेश्वर से रेस्क्यू 5 ओरंगुटान नंदनकानन में: 2 बीमार, तस्करी जांच जारी
- भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने उत्तराखंड में की पूजा, 2027 चुनाव का शंखनाद
- कटनी-पेंड्रा चौथी रेल लाइन से बिजलीघरों को निर्बाध कोयला, MP-CG को लाभ