राजनीति 6 मिनट पढ़ें

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: सियासी संग्राम तेज, दो चरणों में होगी वोटिंग

110 व्यूज़
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: सियासी संग्राम तेज, दो चरणों में होगी वोटिंग
राजनीति

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। राज्य की सत्ता पर काबिज रहने के लिए सत्तारूढ़ दल और विपक्षी पार्टियां पूरी ताकत झोंक रही हैं। चुनावी रैलियां, घोषणाएं, आरोप-प्रत्यारोप और रणनीतिक गठबंधन इस चुनाव को बेहद अहम बना रहे हैं।

भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 दो चरणों में आयोजित किए जा रहे हैं। पहला चरण 23 अप्रैल और दूसरा चरण 29 अप्रैल को होगा। कुल 294 विधानसभा सीटों पर मतदान कराया जाएगा और मतगणना 4 मई को होगी।

इस चुनाव में लगभग 6.7 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिससे यह देश के सबसे बड़े चुनावी मुकाबलों में से एक बन गया है। बहुमत के लिए 148 सीटों की आवश्यकता होगी।

राजनीतिक परिदृश्य की बात करें तो राज्य में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर सत्ता में वापसी के लिए प्रयासरत हैं, जबकि बीजेपी राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

उत्पाद लोड हो रहे हैं…

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में पार्टी कार्यकर्ताओं से बातचीत के दौरान दावा किया कि पश्चिम बंगाल में माहौल बीजेपी के पक्ष में बन रहा है, जिससे चुनावी प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई है।

वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगा...

वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि परिसीमन (delimitation) के जरिए राज्य को बांटने की साजिश की जा रही है, जिससे चुनावी माहौल और तनावपूर्ण हो गया है।

इस चुनाव में एक बड़ा मुद्दा मतदाता सूची का संशोधन भी बना हुआ है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर विवाद बढ़ गया है, जिसमें लाखों मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने का आरोप लगाया जा रहा है। इससे चुनाव की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं और राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।

चुनाव आयोग ने निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कई प्रशासनिक कदम उठाए हैं। पुलिस अधिकारियों का तबादला, केंद्रीय बलों की तैनाती और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है ताकि मतदान शांतिपूर्ण ढंग से हो सके।

पहले चरण के चुनाव में ही 3.6 करोड़ से अधिक मतदाता मतदान करेंगे, जिससे इस चुनाव की विशालता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

चुनावी प्रचार के दौरान विकास, भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी और पहचान की राजनीति जैसे मुद्दे प्रमुख बने हुए हैं। बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में महिलाओं को आर्थिक सहायता, भ्रष्टाचार पर सख्ती और रोजगार सृजन जैसे वादे किए हैं।

वहीं टीएमसी अपनी सरकार की उपलब्धियों, सामाजिक योजनाओं और क्षेत्रीय पह...

वहीं टीएमसी अपनी सरकार की उपलब्धियों, सामाजिक योजनाओं और क्षेत्रीय पहचान के मुद्दों को लेकर जनता के बीच जा रही है। दोनों ही पार्टियां मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही हैं।

इस चुनाव में सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। चुनावी हिंसा की आशंका को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। इसके साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों से लोगों के आने-जाने के कारण ट्रेनों की अतिरिक्त व्यवस्था भी की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का असर सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा। यह चुनाव आने वाले लोकसभा चुनावों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में चुनावी जंग बेहद दिलचस्प और कांटे की टक्कर वाली होती नजर आ रही है। अब यह देखना होगा कि जनता किस पार्टी पर भरोसा जताती है और किसके हाथ में सत्ता की कमान जाती है।

टैग्स

और पढ़ें

लेखक
Aameen Parveen
Aameen Parveen is a reporter at Sakar Bharat, covering local news, civic issues, and ground reports with accuracy, clarity, and strong public focus.