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RTE को लेकर सरकार सख्त, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर | Raipur News Today

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RTE को लेकर सरकार सख्त, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर | Raipur News Today
रायपुर

आज की रायपुर खबर के अनुसार... देश में शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए सरकार अब और अधिक सख्त रुख अपनाती नजर आ रही है। Right to Education (RTE) कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें लगातार निगरानी बढ़ा रही हैं। खासतौर पर निजी स्कूलों में आरटीई के तहत 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर दाखिले, फीस प्रतिपूर्ति और पात्र बच्चों के चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नए निर्देश जारी किए जा रहे हैं।

सरकार का मानना है कि RTE का उद्देश्य केवल बच्चों को स्कूल में दाखिला दिलाना नहीं, बल्कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना भी है। इसी दिशा में अब शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों की नियमित जांच, ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत किया जा रहा है।

निजी स्कूलों पर बढ़ी निगरानी

हाल के निर्देशों के अनुसार, कई राज्यों में निजी स्कूलों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वे RTE के तहत प्रवेश लेने वाले छात्रों से किसी भी प्रकार की अतिरिक्त फीस या छिपे हुए शुल्क न लें। यदि कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें मान्यता रद्द करने तक के प्रावधान शामिल हैं।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कई बार अभिभावकों से शिकायत मिलती है कि स्कूल RTE छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं या उनसे अप्रत्यक्ष रूप से पैसे वसूलते हैं। ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए अब विशेष जांच अभियान चलाए जा रहे हैं।

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ऑनलाइन प्रक्रिया से पारदर्शिता

RTE प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे आवेदन, चयन और प्रवेश की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बन सकेगी और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना कम होगी। कई राज्यों में पोर्टल के माध्यम से लॉटरी सिस्टम अपनाया गया है, जिससे चयन निष्पक्ष तरीके से हो सके।

इसके अलावा, अभिभावकों को भी जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि वे अपने अधिकारों को समझें और किसी भी अनियमितता की शिकायत कर सकें।

सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधार पर फोकस

सरकार केवल निजी स्कूलों पर सख्ती नहीं कर रही, बल्कि सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधार पर भी विशेष ध्यान दे रही है। शिक्षकों की नियमित उपस्थिति, स्मार्ट क्लास, डिजिटल शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए योजनाएं लागू की जा रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता बेहतर होगी, तो RTE के तहत निजी स्कूलों पर निर्भरता भी कम होगी। इससे शिक्षा व्यवस्था में संतुलन आएगा और सभी बच्चों को समान अवसर मिल सकेगा।

अभिभावकों और छात्रों के लिए राहत

सरकार के सख्त रुख से अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित वर्ग के परिवारों को अब अपने बच्चों की शिक्षा को लेकर कम चिंता करनी पड़ेगी।

RTE के तहत बच्चों को न केवल मुफ्त शिक्षा मिलती है, बल्कि किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं। अब सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इन सुविधाओं का लाभ सही पात्र लोगों तक पहुंचे।

शिकायत निवारण प्रणाली मजबूत

RTE से जुड़े मामलों में शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए हेल्पलाइन नंबर, ऑनलाइन पोर्टल और जिला स्तर पर विशेष समितियां बनाई गई हैं। यदि किसी अभिभावक को स्कूल द्वारा नियमों का उल्लंघन नजर आता है, तो वह सीधे शिकायत दर्ज करा सकता है।

अधिकारियों के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद त्वरित जांच की जाती है और दोषी पाए जाने पर संबंधित स्कूल या अधिकारियों पर कार्रवाई की जाती है।

आगे की रणनीति

आने वाले समय में सरकार RTE के दायरे को और प्रभावी बनाने के लिए कई नई पहल कर सकती है। इसमें डेटा आधारित निगरानी, स्कूलों की रैंकिंग प्रणाली और सामाजिक ऑडिट जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।

सरकार का स्पष्ट संदेश है कि शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है और इस अधिकार के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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