राजस्थान में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी, मौसम विभाग ने दी चेतावनी
राजस्थान के कई हिस्सों में इन दिनों भीषण गर्मी और लू का प्रकोप जारी है, जिसने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। बुधवार, 27 मई 2026 को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के अधिकांश जिलों में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार बना हुआ है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग ने आगामी दिनों के लिए भी गर्मी से राहत मिलने की कोई संभावना नहीं जताई है और नागरिकों को विशेष सावधानी बरतने की चेतावनी दी है। यह असामान्य और तीव्र गर्मी राज्य में सामान्य से अधिक तापमान के कारण है, और इसके पीछे पश्चिमी शुष्क हवाओं का लगातार प्रवाह एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।
तापमान का बढ़ता ग्राफ और लू का कहर
राजस्थान, जिसे अपनी रेगिस्तानी जलवायु के लिए जाना जाता है, इस समय गर्मी की ऐसी चपेट में है कि दिन के समय घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। राज्य के पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों में स्थिति विशेष रूप से गंभीर बनी हुई है। जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर, चुरू और श्रीगंगानगर जैसे शहरों में अधिकतम तापमान लगातार 46 से 48 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में दिनभर गर्म और धूल भरी लू चल रही है, जिससे सड़क पर सन्नाटा पसरा रहता है। राजधानी जयपुर में भी पारा 43 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, जबकि कोटा और उदयपुर जैसे शहरों में भी गर्मी का असर साफ देखा जा सकता है। रात के समय भी न्यूनतम तापमान में अपेक्षित गिरावट नहीं हो रही है, जिससे लोगों को दिन और रात दोनों समय गर्मी से जूझना पड़ रहा है। लू के कारण त्वचा में जलन, डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक के मामले बढ़ रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं भी अलर्ट पर आ गई हैं।
मौसम विभाग की चेतावनी और स्वास्थ्य संबंधी सलाह
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राजस्थान के लिए अगले 48 से 72 घंटों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है, जिसका अर्थ है कि भीषण गर्मी और लू की स्थिति जारी रहेगी। विभाग ने आम जनता को अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी है। बच्चों, बुजुर्गों और पुरानी बीमारियों से ग्रस्त लोगों को विशेष रूप से दिन के समय धूप में निकलने से बचने की हिदायत दी गई है। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। पर्याप्त मात्रा में पानी, नींबू पानी, छाछ और ओआरएस घोल का सेवन करने पर जोर दिया गया है ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। हल्के रंग के, ढीले और सूती कपड़े पहनने की सलाह भी दी गई है। इसके साथ ही, पशुधन और पालतू जानवरों को भी सीधी धूप से बचाने और उन्हें पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है। स्थानीय प्रशासन ने भी सार्वजनिक स्थानों पर पानी के टैंकरों की व्यवस्था की है और लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं।
कृषि और जल संसाधनों पर गहराता संकट
लगातार जारी भीषण गर्मी और शुष्क मौसम का सीधा असर राजस्थान की कृषि और जल संसाधनों पर पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में भूजल स्तर तेजी से नीचे गिर रहा है, जिससे पेयजल संकट की आशंका बढ़ गई है। ग्रामीण इलाकों में हैंडपंप और कुएं सूखने लगे हैं, और लोगों को दूर से पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। सिंचाई के लिए पानी की कमी के कारण किसानों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। आलू, प्याज और अन्य सब्जियों की फसलें सूखने की कगार पर हैं, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। खरीफ की बुवाई से पहले इस तरह की गर्मी मिट्टी की नमी को पूरी तरह खत्म कर सकती है, जिससे आने वाले समय में बुवाई में दिक्कतें आ सकती हैं। राज्य के कई बांधों और जलाशयों में पानी का स्तर लगातार घट रहा है, जो भविष्य में गंभीर जल संकट का संकेत दे रहा है। सरकार को इन चुनौतियों से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि किसानों और आम जनता को राहत मिल सके।
आगामी दिनों का पूर्वानुमान और मानसून की स्थिति
मौसम विभाग के अनुसार, आगामी कुछ दिनों तक राजस्थान में गर्मी से कोई खास राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। पश्चिमी हवाओं का प्रभाव जारी रहेगा, जिससे तापमान उच्च बना रहेगा। हालांकि, जून के पहले सप्ताह के अंत तक कुछ स्थानों पर प्री-मानसून गतिविधियों के कारण हल्की बारिश की संभावना जताई गई है, जो थोड़ी राहत दे सकती है। लेकिन व्यापक राहत केवल मानसून के आगमन के बाद ही मिलेगी। राज्य में मानसून के सामान्य तिथि जून के तीसरे सप्ताह में आने की उम्मीद है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इसके आगमन में थोड़ी देरी की संभावना भी व्यक्त की जा रही है। तब तक, नागरिकों को भीषण गर्मी का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा और सभी आवश्यक सावधानियां बरतनी होंगी। सरकार और स्थानीय निकायों को भी इस दौरान आपातकालीन सेवाओं और जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है ताकि गर्मी से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।