इंदौर की छात्रा श्रेया ने लिखी पर्यावरण पर किताब, कविता संग्रह को सम्मान
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इंदौर की सेंट राफेल हायर सेकेंडरी स्कूल में नौवीं कक्षा में पढ़ने वाली श्रेया गुप्ता ने अपनी कम उम्र में ही साहित्यिक दुनिया में एक महत्वपूर्ण पहचान बनाई है। उन्होंने पर्यावरण जैसे गंभीर विषय पर 'प्रकृति की पुकार' नामक एक पुस्तक लिखी है, जो उनके गहन चिंतन और प्रकृति के प्रति प्रेम को दर्शाती है। इसके साथ ही, उनके कविता संग्रह 'जीवन के रंग' को हाल ही में एक प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय काव्य महोत्सव में अवार्ड से सम्मानित किया गया है, जिसने उन्हें युवा लेखकों की श्रेणी में एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया है। यह उपलब्धि न केवल श्रेया के साहित्यिक कौशल को उजागर करती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और समाज को सकारात्मक संदेश देने की उनकी इच्छा को भी दर्शाती है।
युवा लेखिका का पर्यावरण प्रेम
श्रेया गुप्ता की लेखन यात्रा का मूल उनके पर्यावरण प्रेम में निहित है। बचपन से ही वे प्रकृति के करीब रही हैं और पर्यावरण में हो रहे बदलावों को लेकर गहन चिंता व्यक्त करती रही हैं। श्रेया का मानना है कि आज की पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति अधिक संवेदनशील होने की आवश्यकता है, क्योंकि यही हमारे भविष्य की कुंजी है। इसी सोच ने उन्हें अपनी भावनाओं और विचारों को शब्दों के माध्यम से व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया। वह अक्सर अपने आसपास के पेड़ों, नदियों और वन्यजीवों को देखकर प्रेरित होती थीं और उनके संरक्षण के उपायों पर विचार करती थीं। यह कोई सामान्य बात नहीं है कि नौवीं कक्षा की एक छात्रा इतने गंभीर विषय पर पुस्तक लिखने का साहस करे और उसे सफलतापूर्वक पूरा भी करे। उनकी यह पहल दर्शाती है कि युवा मन में भी समाज और प्रकृति के प्रति कितनी गहरी समझ और जिम्मेदारी की भावना हो सकती है। श्रेया के माता-पिता और शिक्षकों ने भी उनकी इस रचनात्मक यात्रा में पूरा सहयोग दिया, जिससे उन्हें अपने विचारों को मूर्त रूप देने में मदद मिली।
'प्रकृति की पुकार' और 'जीवन के रंग'
श्रेया गुप्ता की पुस्तक 'प्रकृति की पुकार' पर्यावरण के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालती है। इस किताब में जंगल कटाई, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता के नुकसान जैसे ज्वलंत मुद्दों को सरल और मार्मिक भाषा में प्रस्तुत किया गया है। श्रेया ने अपनी पुस्तक के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया है कि यदि हमने समय रहते प्रकृति की पुकार को नहीं सुना, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। यह पुस्तक युवा पाठकों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने और उन्हें छोटे-छोटे कदमों से बदलाव लाने के लिए प्रेरित करने पर केंद्रित है। वहीं, उनका कविता संग्रह 'जीवन के रंग' मानवीय भावनाओं, रिश्तों और जीवन के विभिन्न अनुभवों का एक सुंदर चित्रण है। इस संग्रह में प्रकृति की सुंदरता, प्रेम, आशा और संघर्ष जैसे विषयों पर लिखी गई कविताएं शामिल हैं। 'जीवन के रंग' को अंतर्राष्ट्रीय काव्य महोत्सव में मिले अवार्ड ने श्रेया की प्रतिभा को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई है, जिससे उन्हें और अधिक लिखने की प्रेरणा मिली है। यह सम्मान न केवल उनकी कविताओं की गुणवत्ता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि उनकी लेखन शैली में एक विशेष परिपक्वता और भावनात्मक गहराई है।
समाज और साहित्य में योगदान
श्रेया गुप्ता की उपलब्धियां केवल व्यक्तिगत नहीं हैं, बल्कि उनका समाज और साहित्य जगत पर भी गहरा प्रभाव पड़ा है। उनकी पुस्तक 'प्रकृति की पुकार' ने कई युवा पाठकों और स्कूलों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति सोचने और कार्य करने के लिए प्रेरित किया है। वे युवा पीढ़ी के लिए एक आदर्श बन गई हैं, जो दिखाती हैं कि आयु कोई सीमा नहीं होती जब बात जुनून और उद्देश्य की हो। उनके लेखन के माध्यम से, श्रेया ने पर्यावरण के मुद्दों पर चर्चा को बढ़ावा दिया है और लोगों को अपने आसपास के वातावरण के प्रति अधिक सचेत रहने के लिए प्रोत्साहित किया है। उनके माता-पिता, जिन्होंने हमेशा उनकी रचनात्मकता को बढ़ावा दिया, और सेंट राफेल हायर सेकेंडरी स्कूल, इंदौर, जिसने उन्हें एक मंच प्रदान किया, उनकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह एक सशक्त उदाहरण है कि कैसे सही मार्गदर्शन और समर्थन से युवा अपनी क्षमता का पूर्ण उपयोग कर सकते हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। उनकी साहित्यिक यात्रा ने इंदौर शहर और उनके स्कूल का नाम भी रोशन किया है, जिससे अन्य छात्रों को भी अपनी प्रतिभाओं को निखारने की प्रेरणा मिली है।
भविष्य की योजनाएं और संदेश
अपनी इन प्रारंभिक सफलताओं के बाद, श्रेया गुप्ता की भविष्य के लिए कई योजनाएं हैं। वह और अधिक किताबें और कविता संग्रह लिखने की इच्छा रखती हैं, ताकि वे अपने विचारों और संदेशों को एक व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचा सकें। उनका मुख्य लक्ष्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना और युवाओं को इस महत्वपूर्ण कार्य में शामिल होने के लिए प्रेरित करना है। श्रेया का मानना है कि प्रत्येक व्यक्ति, चाहे वह कितना भी छोटा क्यों न हो, पर्यावरण के लिए कुछ न कुछ कर सकता है। उनका संदेश स्पष्ट है: हमें प्रकृति का सम्मान करना चाहिए और उसके साथ सामंजस्य बिठाकर रहना सीखना चाहिए। श्रेया की कहानी एक अनुस्मारक है कि युवा पीढ़ी में असीमित क्षमता होती है, और यदि उन्हें सही दिशा मिले, तो वे दुनिया में बड़े और सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। उनकी साहित्यिक यात्रा न केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह पर्यावरण के प्रति बढ़ती चिंता और युवा सशक्तिकरण का एक प्रतीक भी है।
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