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इंदौर में नए ट्रैफिक नियम: हेलमेट, सीटबेल्ट, इंश्योरेंस पर सख्ती

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इंदौर में नए ट्रैफिक नियम: हेलमेट, सीटबेल्ट, इंश्योरेंस पर सख्ती
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मध्य प्रदेश के सबसे बड़े शहर इंदौर में सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जल्द ही नए और कड़े ट्रैफिक नियम लागू किए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सड़क सुरक्षा समिति ने इंदौर समेत देश के विभिन्न शहरों में ऐसी नीति को भविष्य में लागू कराने के निर्देश दिए हैं, जिसकी तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी हैं। इन नई गाइडलाइंस के तहत वाहन चालकों के लिए हेलमेट, सीटबेल्ट और वाहन इंश्योरेंस अनिवार्य होगा, जिसके बिना पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल नहीं मिलेगा। यह फैसला इंदौर में तेजी से बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं के चौंकाने वाले आंकड़ों के मद्देनजर लिया गया है, जहां बीते 5 सालों में 25,598 सड़क हादसों में 3,434 लोगों की जान जा चुकी है और 21,520 लोग घायल हुए हैं।

'नो इंश्योरेंस नो पेट्रोल' की नई पहल

इंदौर में अब वाहन चालकों को सड़क सुरक्षा के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाने के लिए एक अनोखी और सख्त पहल की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी के निर्देशानुसार, पेट्रोल पंपों पर उन वाहन चालकों को पेट्रोल या डीजल नहीं दिया जाएगा जिनके पास हेलमेट नहीं होगा, जिन्होंने सीटबेल्ट नहीं लगाई होगी, या जिनके वाहन का इंश्योरेंस वैध नहीं होगा। यह नियम सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस नियम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर वाहन चालक अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानियां बरते। यह नई रणनीति खासकर युवाओं और उन लोगों को लक्षित करती है जो अक्सर इन बुनियादी सुरक्षा नियमों की अनदेखी करते हैं, जिससे गंभीर दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ जाता है।

सड़क सुरक्षा समिति के कड़े निर्देश और आंकड़े

सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी ने इंदौर में सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रभावी नियंत्रण के निर्देश दिए हैं। समिति के अध्यक्ष और पूर्व न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने बुधवार को विभिन्न विभागों, स्कूल-कॉलेजों, पेट्रोल पंप संचालकों और सामाजिक संगठनों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग अब शैक्षणिक संस्थानों में विशेष शिविर लगाएगा, जहां छात्र-छात्राओं के ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन इंश्योरेंस जैसे कार्य पूर्ण कराए जाएंगे। इसके अलावा, इंदौर में जिन 75,000 वाहनों में अभी तक हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं लगी हैं, उन्हें चिह्नित कर जल्द से जल्द नई नंबर प्लेट लगवाई जाएंगी। न्यायमूर्ति सप्रे ने हेलमेट और सीटबेल्ट के अनिवार्य उपयोग के साथ-साथ ड्रिंक एंड ड्राइव के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। इंदौर नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने भी इस अभियान में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है। शहर में 16 ब्लैक स्पॉट (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) चिह्नित किए गए हैं, जहां बीते 3 सालों में 123 लोगों की मौत हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी 15 ऐसे ब्लैक स्पॉट हैं, जहां पिछले 3 सालों में 116 लोगों की दुर्घटनाओं में जान गई है। इन सभी ब्लैक स्पॉट को खत्म करने और गड्ढे वाली सड़कों में सुधार लाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी कार्यालयों में सख्ती

नए नियमों के तहत, शैक्षणिक संस्थानों में भी सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य किया जाएगा। शहर के सभी बड़े स्कूलों और कॉलेजों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि अब केवल वही छात्र-छात्राएं परिसर में प्रवेश कर सकेंगे जो हेलमेट पहनकर आएंगे। यह कदम छात्रों में कम उम्र से ही सड़क सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इसके साथ ही, सरकारी कार्यालयों में भी बिना हेलमेट के आने वाले कर्मचारियों की सतत निगरानी की जाएगी और उनके खिलाफ भी उचित कार्रवाई की जा सकती है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सरकारी कर्मचारी स्वयं नियमों का पालन करके आम जनता के सामने एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करें। इन सख्त निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए यातायात विभाग और पुलिस को संयुक्त रूप से अभियान चलाने के लिए कहा गया है। इन उपायों से न केवल सड़क हादसों में कमी आने की उम्मीद है, बल्कि इंदौर की यातायात व्यवस्था भी अधिक अनुशासित और सुरक्षित बनेगी।

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