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महाकाल मंदिर: सावन में कावड़ियों को सीधी एंट्री, दर्शन व्यवस्था में बड़े बदलाव

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महाकाल मंदिर: सावन में कावड़ियों को सीधी एंट्री, दर्शन व्यवस्था में बड़े बदलाव
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उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण-भादो मास के दौरान श्रद्धालुओं, विशेषकर कावड़ियों, के लिए दर्शन व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए हैं। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष एवं कलेक्टर रोशन कुमार सिंह की अध्यक्षता में रविवार को संपन्न हुई बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इन नए नियमों के तहत, भक्तों को भगवान महाकाल के दर्शन और उनकी सवारी में शामिल होने के लिए अधिक सुगम और व्यवस्थित अनुभव मिलेगा, जिसमें कावड़ियों के लिए सीधी एंट्री की सुविधा भी शामिल है। यह पहल श्रावण-भादो के दौरान बढ़ती भीड़ को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने और सभी श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए उन्हें सहज दर्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है।

श्रावण-भादो की भव्य सवारियां और उनका महत्व

श्रावण और भादो मास में भगवान श्री महाकालेश्वर की पारंपरिक सवारियां निकाली जाती हैं, जो भक्तों के लिए अत्यंत पावन और दर्शनीय होती हैं। इन सवारियों की तैयारियां अंतिम चरण में हैं, ताकि श्रद्धालुओं को भगवान महाकाल के भव्य रूप के दर्शन सुव्यवस्थित ढंग से हो सकें। श्रावण मास की प्रथम सवारी 3 अगस्त 2026 को निकाली जाएगी, जबकि भादो मास में भगवान महाकाल की अंतिम राजसी सवारी 7 सितंबर 2026 को निकलेगी। इस दौरान, श्रावण मास में कुल चार सवारियां और भादो मास में दो सवारियां निकाली जाएंगी, जिनमें देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ेंगे।

इन सवारियों की तारीखें इस प्रकार निर्धारित की गई हैं: प्रथम सवारी सोमवार 3 अगस्त, द्वितीय सवारी सोमवार 10 अगस्त, तृतीय सवारी सोमवार 17 अगस्त और चतुर्थ सवारी सोमवार 24 अगस्त को होगी। इसी तरह, भादो मास में पंचम सवारी सोमवार 31 अगस्त और राजसी सवारी सोमवार 7 सितंबर 2026 को निकाली जाएगी। ये सभी सवारियां मंदिर सभा मंडप में विधि-विधान से पूजन-अर्चन के बाद अपने निर्धारित समय पर प्रारंभ होंगी और महाकाल लोक, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी से होते हुए रामघाट शिप्रा तट पहुंचेगी। शिप्रा तट पर पूजन-अर्चन के बाद सवारी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती समाज मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार, गुदरी बाजार होते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर में वापस आएगी।

दर्शन व्यवस्था में अहम बदलाव और कावड़ियों को सीधी एंट्री

मंदिर प्रशासन ने श्रावण-भादो मास की विशेष भीड़ को देखते हुए दर्शन व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य कावड़ियों और अन्य श्रद्धालुओं को महाकाल मंदिर में अधिक सुगम और सीधी एंट्री प्रदान करना है, जिससे उन्हें लंबी कतारों में लगने की परेशानी से मुक्ति मिल सके। कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत, विशेष रूप से कावड़ियों के लिए प्राथमिकता के आधार पर सीधी एंट्री की व्यवस्था की गई है, ताकि वे अपनी कावड़ यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर सकें और बिना किसी बाधा के भगवान शिव का जलाभिषेक कर सकें।

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यह कदम श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाने और उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा से बचाने के लिए उठाया गया है। इसके अलावा, सामान्य श्रद्धालुओं के लिए भी दर्शन की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया गया है, जिससे भीड़ का प्रबंधन प्रभावी ढंग से हो सके। मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी पुख्ता की गई है, और स्वयंसेवकों की तैनाती भी की जाएगी ताकि भीड़ नियंत्रण और मार्गदर्शन में सहायता मिल सके। ये बदलाव श्रद्धालुओं के बीच खुशी का माहौल लेकर आए हैं, क्योंकि अब उन्हें अपने आराध्य के दर्शन और पूजन के लिए कम समय प्रतीक्षा करनी पड़ेगी

भस्म आरती के समय में परिवर्तन और विशेष सवारी मार्ग

श्रावण-भादो मास के दौरान भस्म आरती के समय में भी परिवर्तन किया गया है, जो 30 जुलाई से 7 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि में, प्रतिदिन भगवान श्री महाकालेश्वर की भस्म आरती के लिए मंदिर के पट प्रातः 3 बजे खुलेंगे। हालांकि, प्रत्येक सोमवार को भस्म आरती का समय विशेष रूप से प्रातः 2:30 बजे निर्धारित किया गया है, ताकि सोमवार को उमड़ने वाली अत्यधिक भीड़ को समायोजित किया जा सके। यह बदलाव भक्तों को भस्म आरती के दिव्य दर्शन का अवसर प्रदान करने के लिए किया गया है, जो महाकाल मंदिर की एक अनूठी और महत्वपूर्ण परंपरा है।

राजसी सवारी, जो 7 सितंबर 2026 को निकाली जाएगी, उपरोक्त सामान्य मार्ग के अतिरिक्त एक विशेष विस्तारित मार्ग से गुजरेगी। यह सवारी टंकी चौराहा से मिर्जा नईमबेग, तेलीवाड़ा चौराहा, कंठाल, सतीगेट, सराफा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार, गुदरी चौराहा होते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर में वापस पहुंचेगी। यह विशेष मार्ग राजसी सवारी के महत्व को दर्शाता है और अधिक से अधिक भक्तों को इस भव्य आयोजन का हिस्सा बनने का अवसर देता है। प्रशासन ने इन सभी बदलावों के सफल क्रियान्वयन के लिए विस्तृत योजना बनाई है, जिसमें सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

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