MP में ब्रिक्स कृषि सम्मेलन: केंद्रीय मंत्री शिवराज ने बताईं 4 मुख्य प्राथमिकताएं
मध्य प्रदेश के लिए यह एक अत्यंत गौरवशाली और हर्ष का क्षण है, क्योंकि...
मध्य प्रदेश के लिए यह एक अत्यंत गौरवशाली और हर्ष का क्षण है, क्योंकि राज्य में आगामी ब्रिक्स (BRICS) देशों के कृषि मंत्रियों का भव्य सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। इस महत्वपूर्ण वैश्विक आयोजन को लेकर केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल से मिली जानकारी के अनुसार विस्तृत विवरण साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष ब्रिक्स सम्मेलन की केंद्रीय सोच के केंद्र में 'लघु और सीमांत किसान' हैं, जिन पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। सम्मेलन का उद्देश्य वैश्विक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और कृषि क्षेत्र में सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना है। विदेशी मेहमानों को मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और स्वादिष्ट व्यंजनों, विशेषकर मांडू और छप्पन के पकवानों का अनुभव भी कराया जाएगा, जिससे यह आयोजन यादगार बन सके।
ब्रिक्स की वैश्विक कृषि शक्ति
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ब्रिक्स देशों की अतुलनीय शक्ति और वैश्विक कृषि में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि दुनिया की लगभग आधी आबादी ब्रिक्स देशों के अंतर्गत आती है, जो वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए एक आधारस्तंभ का काम करती है। वैश्विक स्तर पर होने वाले कुल कृषि उत्पादन का 42 फीसदी से अधिक हिस्सा इन्हीं देशों के पास है, जो यह दर्शाता है कि खाद्य आपूर्ति में इनकी भूमिका कितनी अहम है। उन्होंने आगे कहा कि दुनिया भर में मौजूद 58 करोड़ किसानों में से 68 फीसदी किसान ब्रिक्स देशों में रहते हैं। यह आंकड़ा इस बात को प्रमाणित करता है कि ब्रिक्स देशों के कृषि नीतियां और पहल सीधे तौर पर करोड़ों किसानों के जीवन और वैश्विक खाद्य आपूर्ति को प्रभावित करती हैं। चौहान ने यह भी याद दिलाया कि भारत इससे पहले साल 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स की सफल अध्यक्षता कर चुका है, जिससे उसे ऐसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों को सफलतापूर्वक संचालित करने का व्यापक अनुभव है। इस बार, मध्य प्रदेश की धरती पर होने वाला यह सम्मेलन, भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता को और मजबूत करेगा।
भारत का 'सतत कृषि' मॉडल और दृष्टिकोण
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि भारत का विषय सिर्फ कृषि उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ किसान की आजीविका और रोजगार को भी सुरक्षित रखना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कृषि क्षेत्र में केवल मात्रात्मक वृद्धि ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि गुणवत्ता और स्थिरता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। हमारा ध्यान इस बात पर है कि 'सस्टेनेबल एग्रीकल्चर' में तेजी आए, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण हो सके और भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी कृषि योग्य भूमि बनी रहे। इसके अतिरिक्त, उत्पादन लागत को घटाना भी भारत की प्राथमिकता में शामिल है, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके और उनकी आय में वृद्धि हो। चौहान ने यह भी कहा कि युवाओं का रुझान खेती की तरफ दोबारा बढ़े, इसके लिए कृषि को अधिक आकर्षक और लाभदायक बनाने की आवश्यकता है। यह दृष्टिकोण न केवल भारत के किसानों के लिए लाभकारी है, बल्कि ब्रिक्स देशों के लिए भी एक मॉडल प्रस्तुत करता है, जहां कृषि क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है।
ब्रिक्स सम्मेलन की चार मुख्य प्राथमिकताएं
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ब्रिक्स कृषि मंत्रियों के सम्मेलन के लिए चार प्रमुख प्राथमिकताओं का उल्लेख किया, जो वैश्विक कृषि परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती हैं। ये प्राथमिकताएं ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने और साझा चुनौतियों का समाधान खोजने पर केंद्रित हैं:
1. लघु और सीमांत किसानों का सशक्तिकरण तथा उनकी आय में वृद्धि: इस प्राथमिकता का उद्देश्य छोटे किसानों को नवीनतम कृषि तकनीकों, वित्तीय सहायता और बाजार तक पहुंच प्रदान करना है, ताकि उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो सके।
2. पर्यावरण-अनुकूल और सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना: इसमें जैविक खेती, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और जलवायु-स्मार्ट कृषि तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया जाएगा, जिससे कृषि का पर्यावरणीय प्रभाव कम हो सके।
3. कृषि उत्पादन लागत में कमी लाना और किसानों को किफायती इनपुट प्रदान करना: इस प्राथमिकता के तहत उर्वरक, बीज, कीटनाशक और मशीनरी जैसे कृषि इनपुट को किसानों के लिए अधिक किफायती बनाने के तरीकों पर चर्चा की जाएगी, जिससे उनकी उत्पादन लागत कम हो सके।
4. कृषि क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी बढ़ाना और उन्हें उद्यमिता के अवसर प्रदान करना: इस लक्ष्य के तहत कृषि को युवाओं के लिए आकर्षक बनाने, उन्हें कृषि-तकनीक और कृषि-उद्यमिता में प्रशिक्षित करने तथा नए व्यावसायिक अवसर सृजित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
चौहान ने क्या कहा
चौहान ने कहा कि इन प्राथमिकताओं के माध्यम से, ब्रिक्स देश न केवल अपनी आबादी के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे, बल्कि वैश्विक कृषि परिदृश्य में भी सकारात्मक बदलाव लाएंगे। यह सम्मेलन ब्रिक्स देशों के लिए एक साझा मंच प्रदान करेगा, जहाँ वे अनुभव साझा कर सकते हैं और कृषि विकास के लिए नई रणनीतियों पर मिलकर काम कर सकते हैं। मध्य प्रदेश में इस सम्मेलन का आयोजन राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए भी एक नई दिशा प्रदान करेगा और स्थानीय किसानों को वैश्विक नवाचारों से परिचित कराएगा।
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