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राष्ट्रपति मुर्मू का एमपी दौरा: विकास, आस्था और वन्यजीव संरक्षण

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राष्ट्रपति मुर्मू का एमपी दौरा: विकास, आस्था और वन्यजीव संरक्षण
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने पांच दिवसीय मध्य प्रदेश दौरे पर हैं, जहाँ वे राज्य के विभिन्न हिस्सों में विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, जनजातीय समुदायों से संवाद और धार्मिक व प्राकृतिक स्थलों का भ्रमण कर रही हैं। यह दौरा 15 नवंबर से शुरू होकर 19 नवंबर तक चलेगा। इंदौर और बैतूल में महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भाग लेने के बाद, राष्ट्रपति अब ओंकारेश्वर पहुंची हैं, जहाँ उन्होंने पवित्र ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए। उनके दौरे का अगला पड़ाव ग्वालियर और कूनो नेशनल पार्क होगा, जहाँ वे सांस्कृतिक विरासत और वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों का अवलोकन करेंगी। इस बहुआयामी दौरे का उद्देश्य राज्य में विकास को गति देना, जनजातीय उत्थान को बढ़ावा देना और देश की सांस्कृतिक व प्राकृतिक विविधता को रेखांकित करना है।

ओंकारेश्वर में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव

अपने मध्य प्रदेश दौरे के तीसरे चरण में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ओंकारेश्वर के पवित्र नगरी में पहुँचकर भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने नर्मदा नदी के तट पर विशेष पूजा-अर्चना भी की और देश की सुख-समृद्धि की कामना की। राष्ट्रपति का यह दौरा धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ओंकारेश्वर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसका अत्यधिक धार्मिक महत्व है। राष्ट्रपति के साथ राज्य के राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री मोहन यादव भी उपस्थित थे, जिन्होंने उन्हें मंदिर के इतिहास और महत्व से अवगत कराया। इस यात्रा के माध्यम से राष्ट्रपति ने देश की आध्यात्मिक विरासत के प्रति अपने सम्मान को व्यक्त किया

इंदौर और बैतूल में जनसंवाद और विकास के कार्यक्रम

राष्ट्रपति ने अपने दौरे की शुरुआत इंदौर से की थी, जिसे भारत के सबसे स्वच्छ शहरों में से एक माना जाता है। इंदौर में उन्होंने स्वच्छता मॉडल की सराहना की और शहर के शैक्षणिक संस्थानों में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लिया। यहाँ उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित कियाइंदौर के बाद राष्ट्रपति बैतूल जिले पहुंचीं, जहाँ उन्होंने जनजातीय समुदायों के साथ सीधा संवाद कियाबैतूल में उन्होंने जनजातीय गौरव दिवस समारोह में हिस्सा लिया और कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास व उद्घाटन किया। इन परियोजनाओं में जनजातीय कल्याण, शिक्षा और स्वास्थ्य से संबंधित योजनाएं शामिल थीं। राष्ट्रपति ने महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न उद्यमों का भी अवलोकन किया और उनकी आत्मनिर्भरता की सराहना की। उन्होंने जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण पर जोर दिया तथा उनके उत्थान के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई

ग्वालियर और कूनो नेशनल पार्क का आगामी दौरा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अगला पड़ाव ग्वालियर होगा, जो अपनी समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। ग्वालियर में वे ऐतिहासिक ग्वालियर किले का दौरा कर सकती हैं और स्थानीय कला व संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा ले सकती हैं। यहाँ वे शिक्षण संस्थानों के छात्रों और संकाय सदस्यों से भी मुलाकात कर सकती हैंग्वालियर के बाद राष्ट्रपति का दौरा कूनो नेशनल पार्क की ओर बढ़ेगा, जो भारत में चीता पुनर्वास परियोजना का केंद्र बिंदु है। कूनो में वे चीता परियोजना की प्रगति का अवलोकन करेंगी और वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों की समीक्षा करेंगी। यह दौरा भारत के वन्यजीव संरक्षण के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धता को दर्शाता है और अफ्रीका से लाए गए चीतों के अनुकूलन की स्थिति का firsthand आकलन प्रदान करेगा। राष्ट्रपति का यह दौरा पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालेगा और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा के लिए जागरूकता बढ़ाएगा

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दौरे का व्यापक उद्देश्य और राष्ट्रीय संदेश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का पांच दिवसीय मध्य प्रदेश दौरा केवल एक औपचारिक भ्रमण नहीं है, बल्कि यह देश के विभिन्न क्षेत्रों में विकास को गति देने, जनजातीय समुदायों के उत्थान और सांस्कृतिक व प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इस दौरे के माध्यम से उन्होंने केंद्र सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का संदेश जमीनी स्तर तक पहुँचाया। उन्होंने जनजातीय गौरव दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर जनजातीय नायकों के योगदान को याद किया और उनके अधिकारों व सम्मान के लिए अपनी आवाज बुलंद की। यह दौरा राज्य और केंद्र के बीच समन्वय को मजबूत करने और देश के दूरस्थ क्षेत्रों में विकास की नई राहें खोलने में सहायक होगा। राष्ट्रपति का यह व्यापक दौरा एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को सुदृढ़ करता है और देश के हर वर्ग को साथ लेकर चलने के संकल्प को दोहराता है

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