केजरीवाल का केंद्र पर हमला: 'तेल कंपनियां कमा रहीं नाजायज मुनाफा'
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (आप) के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर ईंधन की कीमतों को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के बावजूद तेल कंपनियां 'नाजायज मुनाफा' कमा रही हैं, जिसका सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कच्चे तेल के दाम कम हुए हैं, तो पेट्रोल की कीमतें भी कम होनी चाहिए थीं। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश भर में ईंधन की बढ़ती कीमतें लगातार चर्चा का विषय बनी हुई हैं और उपभोक्ताओं पर इसका आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, फिर भी महंगा पेट्रोल
अरविंद केजरीवाल ने अपनी बात को पुख्ता करने के लिए फरवरी के कच्चे तेल की कीमतों की तुलना मौजूदा अंतरराष्ट्रीय दरों से की। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में काफी कमी आई है, लेकिन इसके बावजूद पेट्रोल की कीमत ₹102 प्रति लीटर पर बनी हुई है, जो कि इस साल मई में सरकार द्वारा तय की गई कीमत के समान है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से अनुचित है और सीधे तौर पर तेल कंपनियों को अतिरिक्त और नाजायज मुनाफा कमाने की अनुमति देने जैसा है। केजरीवाल ने मांग की कि पेट्रोल की कीमतों को ₹102 से घटाकर तत्काल ₹82 प्रति लीटर किया जाना चाहिए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार को उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करनी चाहिए न कि तेल कंपनियों के मुनाफे को बढ़ावा देना चाहिए। वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव का लाभ उपभोक्ताओं को भी मिलना चाहिए।
E20 इथेनॉल-मिश्रित ईंधन पर सवाल
ईंधन की कीमतों के साथ-साथ, अरविंद केजरीवाल ने E20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल के उपयोग पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि सरकार द्वारा E20 ईंधन को बढ़ावा देने के बावजूद पेट्रोल की कीमतें ऊंची क्यों बनी हुई हैं। इस संबंध में, केजरीवाल ने बुधवार को देश की 29 प्रमुख ऑटोमोबाइल निर्माताओं को पत्र लिखकर E20 इथेनॉल-मिश्रित ईंधन के वाहन माइलेज और इंजन सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में लिखित स्पष्टीकरण मांगा था। उन्होंने इन कंपनियों को सात दिनों के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है। केजरीवाल का यह कदम उपभोक्ताओं के बीच E20 ईंधन के उपयोग को लेकर बढ़ती चिंताओं और भ्रांतियों को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने सरकार की जिम्मेदारी पर जोर दिया कि वह नए ईंधन विकल्प की विश्वसनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करे, ताकि उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिल सके।
ऑटोमोबाइल कंपनियों को भेजे गए पत्र
आप प्रमुख ने अपने संवाददाता सम्मेलन में विस्तार से बताया कि उन्होंने किस प्रकार विभिन्न ऑटोमोबाइल निर्माताओं को पत्र भेजे हैं। उन्होंने कहा कि मारुति सुजुकी इंडिया, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर और हीरो मोटोकॉर्प जैसी बड़ी कंपनियों को अलग-अलग पत्र भेजे गए हैं, जिनमें विशिष्ट प्रश्न पूछे गए हैं। वहीं, शेष 26 निर्माताओं को एक अलग पत्र भेजा गया है, जिसमें E20 ईंधन के उपयोग और उपभोक्ताओं की चिंताओं पर उनकी स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है। केजरीवाल ने जोर देकर कहा कि इन कंपनियों का जवाब पारदर्शिता और उपभोक्ता विश्वास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी कंपनियां समय पर और संतोषजनक जवाब देंगी ताकि उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिल सके। यह पहल ईंधन नीतियों और उपभोक्ता हितों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अरविंद केजरीवाल की यह पहल न केवल ईंधन की कीमतों में पारदर्शिता की मांग करती है, बल्कि उपभोक्ताओं के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को भी प्राथमिकता देती है। उनका मानना है कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह आम जनता के हितों का ध्यान रखे और कंपनियों को अनुचित लाभ कमाने से रोके। उच्च ईंधन कीमतें सीधे तौर पर महंगाई को बढ़ाती हैं और आम आदमी के बजट पर अतिरिक्त बोझ डालती हैं। केंद्र सरकार और तेल कंपनियों पर अब इन गंभीर आरोपों का जवाब देने और ईंधन कीमतों को लेकर स्पष्टीकरण देने का दबाव बढ़ गया है। यह देखना होगा कि ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनियां E20 ईंधन पर केजरीवाल के सवालों का क्या जवाब देती हैं और सरकार इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाती है।