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रेवाड़ी: कृषि विवि का पर्यावरण अभियान, खातीवास में पौधारोपण व स्वच्छता संदेश

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रेवाड़ी: कृषि विवि का पर्यावरण अभियान, खातीवास में पौधारोपण व स्वच्छता संदेश
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रेवाड़ी जिले के बावल स्थित गांव खातीवास में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई ने विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में एक महत्वपूर्ण स्वच्छता एवं पौधारोपण अभियान का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस कार्यक्रम में हिसार स्थित कृषि विश्वविद्यालय के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. नरेश कौशिक ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और स्वयं पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश दिया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य वायुमंडल में तेजी से बढ़ते प्रदूषण के गंभीर दुष्प्रभावों और उसके दीर्घकालिक परिणामों के प्रति स्थानीय ग्रामीणों और स्वयंसेवकों को जागरूक करना था, साथ ही इस वैश्विक समस्या को थामने के लिए सामूहिक और समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल देना।

पर्यावरण संरक्षण का संदेश और जागरूकता अभियान

इस विशेष अवसर पर, डॉ. नरेश कौशिक ने अपने संबोधन में पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि औद्योगिक विकास और अनियंत्रित मानवीय गतिविधियों के कारण वायु, जल और मृदा प्रदूषण में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसका सीधा असर मानव स्वास्थ्य और पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ रहा है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को बताया कि कैसे प्रदूषण के कारण श्वास संबंधी बीमारियाँ, हृदय रोग और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ रही हैं। डॉ. कौशिक ने जोर देकर कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों या विशिष्ट संगठनों का ही नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का सामूहिक दायित्व है। उन्होंने ग्रामीणों और NSS स्वयंसेवकों से अपील की कि वे अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण के प्रति अधिक संवेदनशील बनें और सिंगल-यूज़ प्लास्टिक से बचने, ऊर्जा की बचत करने और जल संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने जैसे सुझावों को अपनाएं। यह अभियान केवल पौधारोोपण तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य जनमानस में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना को जागृत करना था ताकि वे अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित कर सकें।

'यादगार पलों' में करें पौधारोपण: डॉ. कौशिक का अनूठा आह्वान

डॉ. नरेश कौशिक ने प्रदूषण की समस्या के स्थायी समाधान के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने को सबसे प्रभावी तरीका बताया। उन्होंने ग्रामीणों से एक अनूठा आग्रह किया कि वे अपने जीवन के सुखद या दुखद पलों को यादगार बनाने के लिए एक छायादार या फलदार पौधा अवश्य लगाएं। यह पहल न केवल पर्यावरण को हरा-भरा बनाएगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने में भी मदद करेगी। डॉ. कौशिक ने दक्षिणी हरियाणा की विशिष्ट जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नीम, पीपल और बरगद जैसे पौधों को प्राथमिकता देने की सलाह दी। उन्होंने वैज्ञानिक तथ्य प्रस्तुत करते हुए समझाया कि ये देशी पेड़ अन्य पौधों की तुलना में कहीं अधिक मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) ग्रहण करते हैं और पर्याप्त ऑक्सीजन (O2) छोड़ते हैं। इन विशाल वृक्षों की गहरी जड़ें मिट्टी के कटाव को रोकने और भूजल स्तर को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस प्रकार, इन पौधों का रोपण न केवल वायु गुणवत्ता में सुधार करता है, बल्कि जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में भी योगदान देता है। उन्होंने ग्रामीणों को पौधारोपण के बाद उनकी देखभाल करने और उन्हें बड़ा होने तक पोषित करने के महत्व पर भी जोर दिया, क्योंकि एक स्वस्थ पौधा ही लंबे समय तक पर्यावरण को लाभ पहुंचा सकता है।

खातीवास को पॉलिथीन मुक्त बनाने का संकल्प और सामुदायिक भागीदारी

पौधारोपण अभियान के साथ-साथ, इस कार्यक्रम में गांव खातीवास को पॉलिथीन मुक्त बनाने का महत्वपूर्ण संकल्प भी लिया गया। NSS स्वयंसेवकों और ग्रामीणों ने मिलकर गांव के विभिन्न हिस्सों में सफाई अभियान चलाया, जिसमें कूड़ा-कचरा और विशेष रूप से पॉलिथीन अपशिष्ट को इकट्ठा किया गया। पॉलिथीन प्रदूषण आज एक वैश्विक चुनौती है, जो मिट्टी, जल स्रोतों और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है। डॉ. कौशिक ने पॉलिथीन के हानिकारक प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह सैकड़ों वर्षों तक विघटित नहीं होता और पर्यावरण को लगातार दूषित करता रहता है। उन्होंने स्थानीय समुदाय से आग्रह किया कि वे पॉलिथीन के उपयोग से पूरी तरह बचें और इसके स्थान पर कपड़े या जूट के थैलों जैसे पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को अपनाएं। यह संकल्प स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी और पर्यावरण के प्रति उनकी बढ़ती जागरूकता का प्रतीक था। ऐसे स्थानीय अभियान बड़े बदलाव लाते हैं, क्योंकि वे जनता को शामिल कर उन्हें पर्यावरण की जिम्मेदारी लेने के लिए प्रेरित करते हैं। इस पहल के माध्यम से, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की NSS इकाई ने न केवल खातीवास गांव में एक सकारात्मक बदलाव की नींव रखी, बल्कि अन्य समुदायों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।

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