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आयुष्मान भारत योजना: पश्चिम बंगाल में आठ साल बाद, आज केंद्र संग एमओयू

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आयुष्मान भारत योजना: पश्चिम बंगाल में आठ साल बाद, आज केंद्र संग एमओयू
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पश्चिम बंगाल आज केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना का हिस्सा बन जाएगा, जिससे राज्य के लगभग छह करोड़ 'स्वास्थ्य साथी' लाभार्थियों को आठ साल बाद इस योजना का लाभ मिल सकेगा। राज्य सरकार और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के बीच नई दिल्ली में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस ऐतिहासिक कदम से पश्चिम बंगाल आयुष्मान भारत योजना को लागू करने वाला देश का 36वां राज्य बन जाएगा, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को बेहतर और व्यापक स्वास्थ्य सुविधाएँ प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। यह समझौता केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की उपस्थिति में संपन्न होगा, जो केंद्र और राज्य के बीच स्वास्थ्य सेवा सहयोग के एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है।

आयुष्मान भारत योजना: एक राष्ट्रीय पहल और बंगाल का जुड़ाव

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई) के नाम से भी जानी जाने वाली आयुष्मान भारत योजना को केंद्र सरकार ने वर्ष 2018 में पूरे देश में शुरू किया था। इसका मुख्य उद्देश्य देश के गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों को वित्तीय बोझ से मुक्त कर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया जाता है, जिसमें द्वितीयक और तृतीयक देखभाल के लिए अस्पताल में भर्ती होने का खर्च शामिल है। यह योजना लाभार्थियों को देश भर के किसी भी सूचीबद्ध निजी या सरकारी अस्पताल में उपचार कराने की सुविधा देती है, जिससे उन्हें अपने निवास स्थान से बाहर भी चिकित्सा सहायता मिल सके। पश्चिम बंगाल का इस योजना से जुड़ना राज्य के स्वास्थ्य सेवा परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव लाएगा, क्योंकि अब राज्य के लगभग छह करोड़ लोग इस व्यापक राष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा बन जाएंगे। यह कदम सुनिश्चित करेगा कि राज्य के सबसे जरूरतमंद लोगों को अब तक वंचित रहने के बजाय राष्ट्रीय स्तर की स्वास्थ्य सुरक्षा प्राप्त हो सके।

'स्वास्थ्य साथी' से 'आयुष्मान भारत' तक: नीतिगत बदलाव और उसके निहितार्थ

पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत योजना को लागू करने में आठ साल की देरी हुई क्योंकि पूर्ववर्ती ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार ने इसे लागू करने से इनकार कर दिया था। तत्कालीन सरकार ने अपनी राज्य-विशिष्ट स्वास्थ्य बीमा योजना 'स्वास्थ्य साथी' का हवाला देते हुए केंद्र की योजना को अपनाने से मना कर दिया था। 'स्वास्थ्य साथी' योजना, जो वर्ष 2016 में शुरू की गई थी, राज्य के सभी निवासियों को प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर प्रदान करती है, जिसमें परिवार की महिला मुखिया के नाम पर स्मार्ट कार्ड जारी किया जाता है। हालांकि, 'स्वास्थ्य साथी' का लाभ मुख्य रूप से राज्य के भीतर ही सीमित था और इसमें केंद्र सरकार की फंडिंग का अभाव था, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर पोर्टेबिलिटी जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएँ उपलब्ध नहीं थीं।

मौजूदा शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य के नागरिकों के व्यापक हित को देखते हुए इस नीति में बदलाव का निर्णय लिया है। इस बदलाव का मुख्य कारण लाभार्थियों को आयुष्मान भारत के तहत मिलने वाले अतिरिक्त लाभ जैसे देश भर में पोर्टेबिलिटी, केंद्रीय वित्त पोषण और एक बड़े अस्पताल नेटवर्क तक पहुंच प्रदान करना है। यह निर्णय राज्य के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को मजबूत करेगा और केंद्र-राज्य संबंधों में एक सकारात्मक मोड़ भी लाएगा। केंद्र सरकार आयुष्मान भारत के तहत योजना के कुल खर्च का 60 प्रतिशत वहन करती है, जबकि राज्य सरकार को 40 प्रतिशत का योगदान देना होता है। यह वित्तीय साझेदारी राज्य पर पड़ने वाले बोझ को कम करने में भी सहायक होगी, और सुनिश्चित करेगी कि स्वास्थ्य सेवाएँ बिना किसी बाधा के जारी रहें।

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लाभार्थियों के लिए व्यापक लाभ और भविष्य की संभावनाएं

आयुष्मान भारत योजना से जुड़ने के बाद पश्चिम बंगाल के लाभार्थियों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे। सबसे प्रमुख लाभ यह है कि अब वे न केवल पश्चिम बंगाल में बल्कि देश भर के 28,000 से अधिक सूचीबद्ध अस्पतालों में 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज करा सकेंगे। यह सुविधा उन लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होगी जिन्हें विशेष उपचार या सर्जरी के लिए राज्य से बाहर जाने की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, आयुष्मान भारत योजना में कई ऐसी बीमारियों और प्रक्रियाओं को भी शामिल किया गया है जो 'स्वास्थ्य साथी' में पूरी तरह से कवर नहीं हो सकती थीं, जिससे लाभार्थियों को अधिक व्यापक कवरेज मिलेगा। यह कदम पश्चिम बंगाल के लोगों को एक मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करेगा, जिससे वे गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अपनी गाढ़ी कमाई खर्च करने से बच सकेंगे।

इस एमओयू पर हस्ताक्षर होने के बाद, पश्चिम बंगाल का स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र एक नए युग में प्रवेश करेगा। इससे राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं का आधुनिकीकरण और विस्तार होने की संभावना है, क्योंकि अधिक अस्पताल आयुष्मान भारत के तहत सूचीबद्ध होने का प्रयास करेंगे। यह न केवल स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए अवसर पैदा करेगा बल्कि मरीजों को भी गुणवत्तापूर्ण और सस्ती देखभाल प्राप्त करने में मदद करेगा। यह पहल राज्य के गरीब और वंचित परिवारों के लिए एक वरदान साबित होगी, जो अब तक महंगी चिकित्सा के कारण स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रह जाते थे। यह केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी स्थापित करेगा, जिससे भविष्य में अन्य विकास परियोजनाओं और जन कल्याणकारी योजनाओं के लिए मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

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