मोदी सरकार के 12 साल: विदेश नीति में बड़े बदलाव, जयशंकर ने गिनाई 10 उपलब्धियां
हाल ही में, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विदेश मंत्रालय की उपलब्धियों को विस्तार से बताया। नई दिल्ली में दिए गए बयानों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की गई जानकारी के माध्यम से, उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे पिछले 12 वर्षों में भारत की विदेश नीति में कई महत्वपूर्ण और दूरगामी परिवर्तन आए हैं। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य न केवल वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति को मजबूत करना रहा है, बल्कि आम नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाना और विदेशों में रहने वाले भारतीयों के हितों की रक्षा करना भी रहा है। विदेश मंत्री ने इन परिवर्तनों को 10 प्रमुख बिंदुओं में समेटा, जो यह दर्शाते हैं कि भारत अब एक अधिक आत्मविश्वासी, सक्रिय और जन-केंद्रित विदेश नीति अपना रहा है।
आम नागरिक से जुड़ती विदेश नीति
मोदी सरकार के तहत विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू इसे आम नागरिक के करीब लाना रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि कैसे पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया को अभूतपूर्व रूप से आसान बनाया गया है। अब पासपोर्ट के लिए आवेदन करना और आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन कराना पहले से कहीं अधिक सुलभ हो गया है, जिससे लाखों भारतीयों को लाभ हुआ है। यह बदलाव तकनीक के उपयोग और प्रक्रियात्मक सरलीकरण के माध्यम से संभव हो पाया है, जिससे आम जनता को सरकारी सेवाओं का लाभ उठाने में अत्यधिक सुविधा मिली है।
इसके साथ ही, विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों को हर संभव सहायता प्रदान करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। विभिन्न देशों में स्थित भारतीय दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को अधिक सक्रिय और उत्तरदायी बनाया गया है। भारतीय समुदाय कल्याण कोष का उपयोग भी काफी बढ़ाया गया है, ताकि संकट की स्थिति में विदेशों में फंसे भारतीयों को तत्काल सहायता मिल सके। यह प्रवासी भारतीयों के प्रति सरकार की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो देश की अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती धमक
पिछले 12 वर्षों में भारत ने वैश्विक मंचों पर अपनी भूमिका को और अधिक मुखर किया है। भारत अब किसी एक गुट का हिस्सा बनने के बजाय बहु-संरेखण (multi-alignment) की नीति पर चलता है, जिससे वह विभिन्न देशों के साथ अपने हितों के अनुरूप संबंध स्थापित कर पाता है। विदेश मंत्री ने बताया कि कैसे भारत ने G20, BRICS, शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और क्वाड जैसे महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मंचों पर अपनी सक्रियता बढ़ाई है और नेतृत्वकारी भूमिका निभाई है।
भारत ने इन मंचों पर वैश्विक चुनौतियों, जैसे जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और आर्थिक अस्थिरता, पर ठोस समाधान प्रस्तुत किए हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता के लिए भारत का अभियान भी तेज हुआ है, जिसमें कई देशों का समर्थन मिल रहा है। यह दर्शाता है कि दुनिया अब भारत को एक जिम्मेदार और विश्वसनीय वैश्विक साझेदार के रूप में देखती है, जो अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता में योगदान देने में सक्षम है। आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता बनाने में भारत ने अग्रणी भूमिका निभाई है, जिससे सीमा पार आतंकवाद पर लगाम लगाने के प्रयासों को बल मिला है।
पड़ोसी प्रथम, आर्थिक और सांस्कृतिक कूटनीति
मोदी सरकार की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ 'पड़ोसी प्रथम' की नीति रही है। इस नीति के तहत, भारत ने अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया है। आपसी विश्वास और कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए कई पहलें की गई हैं, जो दक्षिण एशिया में स्थिरता और विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और श्रीलंका जैसे देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाया गया है।
इसके साथ ही, आर्थिक कूटनीति को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। विदेश मंत्रालय ने वैश्विक व्यापार, निवेश और कनेक्टिविटी परियोजनाओं को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों को वैश्विक स्तर पर समर्थन दिलाने के लिए राजनयिक प्रयासों का उपयोग किया गया है। भारत अब विभिन्न देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों पर सक्रिय रूप से बातचीत कर रहा है, जिससे भारतीय उत्पादों और सेवाओं के लिए नए बाजार खुल रहे हैं।
विदेश नीति के दायरे को बढ़ाते हुए, भारत ने वैश्विक मानवीय सहायता और सांस्कृतिक कूटनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की 'वैक्सीन मैत्री' पहल ने दुनियाभर में लाखों लोगों की जान बचाई, जिससे भारत की छवि एक विश्वसनीय और परोपकारी राष्ट्र के रूप में स्थापित हुई। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता मिलना और दुनियाभर में इसका उत्साहपूर्वक मनाया जाना भारत की सांस्कृतिक विरासत की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर का मानना है कि इन 12 वर्षों में भारत की विदेश नीति ने वास्तव में एक नया अध्याय लिखा है, जो देश को 21वीं सदी की चुनौतियों और अवसरों का सामना करने के लिए तैयार करता है।
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