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भारत ने अमेरिकी कार्रवाई के बाद भारतीय नाविकों के बचाव पर ओमान का आभार जताया

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भारत ने अमेरिकी कार्रवाई के बाद भारतीय नाविकों के बचाव पर ओमान का आभार जताया
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मंगलवार को, भारत ने ओमान के अधिकारियों को 24 भारतीय नाविकों के समय पर बचाव के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। यह बचाव तब हुआ जब अमेरिकी सेना ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक खाली तेल टैंकर, एमटी मैरिवेक्स, को निष्क्रिय कर दिया। यह घटना ओमान के तट के करीब हुई, जहाँ जहाज को एक प्रक्षेप्य से मारा गया और उसमें आग लगने की सूचना मिली। अमेरिका ने दावा किया कि जहाज ईरान के खिलाफ जारी नौसैनिक नाकाबंदी का उल्लंघन करते हुए एक ईरानी बंदरगाह की ओर जाने का प्रयास कर रहा था, जिसके परिणामस्वरूप यह सैन्य कार्रवाई हुई।

भारतीय नाविकों का सुरक्षित बचाव और भारत का आभार

विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया कि पलाऊ-ध्वजांकित जहाज एमटी मैरिवेक्स को ओमान के तट पर निष्क्रिय कर दिया गया था। मंत्रालय ने ओमान के अधिकारियों द्वारा भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकालने में दिए गए बहुमूल्य समर्थन के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक मीडिया ब्रीफिंग में बताया, "जहाज एमटी मैरिवेक्स को ओमान के तट पर निष्क्रिय कर दिया गया था। हमें पता चला है कि यह एक पलाऊ-ध्वजांकित पोत है। हमें यह भी जानकारी है कि घटना से पहले जहाज और अमेरिकी नौसेना के बीच कुछ संचार आदान-प्रदान हुआ था।"

सभी 24 भारतीय चालक दल के सदस्यों को भारतीय नौसेना द्वारा ओमान के अधिकारियों की मदद से सुरक्षित निकाल लिया गया। भारतीय दूतावास ने ओमान के अधिकारियों के साथ मिलकर इस बचाव अभियान का समन्वय किया। जायसवाल ने आगे कहा, "हम चालक दल को बचाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में उनके समर्थन के लिए ओमान सरकार को धन्यवाद देते हैं। हमारा मिशन नाविकों के साथ लगातार संपर्क में है।" भारतीय अधिकारी चालक दल और स्थानीय एजेंसियों के साथ संपर्क में बने हुए हैं ताकि नाविकों के कल्याण को सुनिश्चित किया जा सके। यह तत्काल और समन्वित प्रतिक्रिया क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बीच मानवीय सहायता के महत्व को रेखांकित करती है।

अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और उसके कारण

घटना के संबंध में, अमेरिकी सेना ने तेल टैंकर पर हमले की पुष्टि की, जिसमें 24 भारतीय चालक दल सवार थे। अमेरिका ने एक बयान में कहा कि जहाज ईरान के खिलाफ जारी नौसैनिक नाकाबंदी का उल्लंघन करते हुए एक ईरानी बंदरगाह की ओर जाने का प्रयास कर रहा था, जिसके बाद उसे निष्क्रिय कर दिया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने घोषणा की कि उन्होंने एक खाली तेल टैंकर को निष्क्रिय कर दिया क्योंकि वह ईरान के खिलाफ चल रही नाकाबंदी का उल्लंघन कर रहा था।

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अमेरिकी सेना के अनुसार, यूएसएस अब्राहम लिंकन (CVN 72) से एक F/A-18 सुपर हॉर्नेट ने जहाज के इंजीनियरिंग और स्टीयरिंग स्थानों पर सटीक गोला-बारूद दागा। यह कार्रवाई तब की गई जब चालक दल अमेरिकी सेना के निर्देशों का पालन करने में विफल रहा। बयान में स्पष्ट रूप से कहा गया, "मैरिवेक्स अब ईरान की ओर नहीं जा रहा है।" इस घटना से पता चलता है कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास अपनी समुद्री सुरक्षा प्रतिबद्धताओं को कितनी गंभीरता से लेता है, खासकर उन जहाजों के खिलाफ जो ईरान के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हैं। इस कार्रवाई का उद्देश्य क्षेत्र में समुद्री यातायात की सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना था, हालांकि इससे क्षेत्रीय तनाव में वृद्धि हो सकती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव और भविष्य की चुनौतियाँ

यह घटना एक ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्र में, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापक तनाव बना हुआ है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारों में से एक है, जिससे वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस तरह की घटनाएं न केवल समुद्री सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करती हैं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकती हैं। अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून और नेविगेशन की स्वतंत्रता का सम्मान ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इस क्षेत्र में पहले भी इसी तरह की घटनाएं देखी गई हैं, जो अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन की भेद्यता को उजागर करती हैं। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस गलियारे पर बहुत अधिक निर्भर करता है, इन घटनाओं पर बारीकी से नज़र रख रहा है। भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना भारत की विदेश नीति के लिए महत्वपूर्ण है। इस घटना ने समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता को फिर से रेखांकित किया है। क्षेत्रीय शक्तियों और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के बीच संवाद और समन्वय ही इस महत्वपूर्ण जलमार्ग में शांति और सुरक्षा बनाए रखने की कुंजी हो सकती है।

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