जनगणना-2027: 40 सवालों की सूची जारी, जाति-धर्म से टीकाकरण तक
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अगस्त 2026 में जनगणना-2027 के लिए पूछे जाने वाले 40 सवालों की एक विस्तृत सूची जारी की है। यह महत्वपूर्ण घोषणा मोदी सरकार द्वारा की गई, जिसमें देश के नागरिकों से जाति, धर्म, बैंक खाते, बच्चों की संख्या और कोविड वैक्सीनेशन जैसी विभिन्न जानकारियां मांगी जाएंगी। जनगणना की प्रक्रिया बर्फीले और पहाड़ी इलाकों में 1 सितंबर से शुरू होगी, जबकि देश के बाकी हिस्सों में यह अगले साल यानी 2027 में संपन्न की जाएगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य भारत की विशाल जनसंख्या के सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय स्वरूप का एक व्यापक और अद्यतन चित्र प्रस्तुत करना है, जो भविष्य की नीतियों और विकास योजनाओं के निर्माण के लिए आधार प्रदान करेगा।
सवालों की विस्तृत सूची
गृह मंत्रालय द्वारा अधिसूचित 40 सवालों का यह सेट देश के हर नागरिक से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियों को कवर करेगा। रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त द्वारा जारी आदेश के अनुसार, इन सवालों में व्यक्ति का नाम, परिवार के मुखिया से संबंध, लिंग, जन्म की तारीख और उम्र, वर्तमान वैवाहिक स्थिति और शादी के समय की उम्र शामिल है। इसके अतिरिक्त, जीवनसाथी का नाम, राष्ट्रीयता और धर्म जैसी बुनियादी पहचान संबंधी जानकारी भी एकत्र की जाएगी। एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि लोगों से उनकी जाति के बारे में भी पूछा जाएगा, साथ ही यह भी कि क्या वे अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से संबंधित हैं। यह जानकारी सामाजिक समावेश और कल्याणकारी योजनाओं के लिए आवश्यक है।
अन्य सवालों में पिता और माता की जानकारी, किसी भी प्रकार की विकलांगता की स्थिति, मातृभाषा और अन्य ज्ञात भाषाएं शामिल हैं। शिक्षा के स्तर को मापने के लिए साक्षरता और डिजिटल साक्षरता की स्थिति, शिक्षण संस्थान में उपस्थिति, सबसे ज़्यादा हासिल की गई शिक्षा का स्तर और स्ट्रीम/विषय के बारे में भी पूछा जाएगा। यह डेटा शिक्षा और कौशल विकास नीतियों के निर्माण में मदद करेगा। आर्थिक स्थिति से संबंधित सवालों में बैंक खातों की जानकारी और क्या व्यक्ति ने पिछले साल के दौरान कभी काम किया था, जैसे प्रश्न भी शामिल होंगे। यह श्रम बल भागीदारी और वित्तीय समावेशन का आकलन करेगा। कोविड-19 महामारी के बाद, वैक्सीनेशन की स्थिति से जुड़े सवाल भी इस सूची का हिस्सा हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य डेटा के लिए नया आयाम जोड़ते हैं।
जनगणना का समय और प्रक्रिया
यह जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी ताकि भौगोलिक और जलवायु संबंधी चुनौतियों का सामना किया जा सके। रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, बर्फीले और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में जनगणना की प्रक्रिया 1 सितंबर से शुरू होगी। इन क्षेत्रों में प्रतिकूल मौसम की स्थिति के कारण पहले गणना की जाती है ताकि डेटा संग्रह सुचारू रूप से हो सके। देश के बाकी हिस्सों में, जनगणना का मुख्य चरण अगले साल यानी 2027 में संचालित किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जनगणना अधिकारी, जिन्हें उनके स्थानीय क्षेत्र की सीमा के भीतर नियुक्त किया गया है, वे हाउसहोल्ड शेड्यूल के माध्यम से जानकारी इकट्ठा करेंगे।
यह प्रक्रिया व्यवस्थित और चरणबद्ध तरीके से की जाएगी ताकि हर घर तक पहुंचा जा सके। जनगणना अधिकारियों को व्यापक प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे सवालों को सही ढंग से पूछ सकें और सटीक जानकारी एकत्र कर सकें। इस बार की जनगणना में डिजिटल उपकरणों का उपयोग भी बढ़ने की संभावना है, जिससे डेटा प्रविष्टि और प्रसंस्करण में तेज़ी आएगी और त्रुटियां कम होंगी। यह एक विशाल अभ्यास है जिसमें लाखों जनगणना कर्मी देश के कोने-कोने तक पहुंचेंगे।
डेटा का महत्व और भविष्य की नीतियां
जनगणना-2027 से एकत्र की गई जानकारी भारत के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी। यह देश की सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय वास्तविकताओं का एक व्यापक चित्र प्रस्तुत करेगी। प्राप्त डेटा का उपयोग सरकार द्वारा विभिन्न नीतियों और कार्यक्रमों को तैयार करने में किया जाएगा। उदाहरण के लिए, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, ग्रामीण विकास, शहरी नियोजन और गरीबी उन्मूलन जैसे क्षेत्रों में संसाधनों का आवंटन और रणनीतियों का निर्माण इस डेटा पर आधारित होगा। जाति और धर्म से संबंधित विस्तृत जानकारी सामाजिक न्याय और समावेशी विकास सुनिश्चित करने वाली योजनाओं को बनाने में मदद करेगी।
बैंक खातों और डिजिटल साक्षरता से जुड़ी जानकारी वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने और डिजिटल इंडिया पहल को मज़बूत करने के लिए महत्वपूर्ण होगी। कोविड वैक्सीनेशन से संबंधित डेटा सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों के लिए भविष्य की तैयारियों और स्वास्थ्य अवसंरचना के विकास में सहायक होगा। यह जनगणना भारत की प्रगति और विकास की दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जिससे सरकार की नीतियां जमीनी हकीकत पर आधारित हों और समाज के हर वर्ग की ज़रूरतों को पूरा कर सकें। यह डेटा नीति निर्माताओं के लिए एक अमूल्य संसाधन होगा, जो भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में योगदान देगा।