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प्रभसिमरन की चूक से भारत ए को लगा झटका, गायकवाड़ हुए आगबबूला

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प्रभसिमरन की चूक से भारत ए को लगा झटका, गायकवाड़ हुए आगबबूला
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मंगलवार को रंगिरी दंबुला इंटरनेशनल स्टेडियम में भारत ए और श्रीलंका ए के बीच खेले गए त्रि-राष्ट्र ए सीरीज के मुकाबले में एक हाई-ड्रामा और विवादास्पद क्षण देखने को मिला, जब एक रन-आउट के फैसले ने भारतीय खेमे को गुस्से से भर दिया। यह घटना श्रीलंका ए की पारी के 42वें ओवर में घटी, जिसने मैच का रुख नाटकीय रूप से बदल दिया। भारत ए के विकेटकीपर प्रभसिमरन सिंह की एक अनजाने में की गई गलती के कारण एक स्पष्ट रन-आउट को रद्द कर दिया गया, जिससे कप्तान रुतुराज गायकवाड़ और पूरी टीम मैदान पर अंपायरों से तीखी बहस करती नजर आई। इस निर्णय से भारतीय टीम की जीत की उम्मीदों को गहरा झटका लगा और उन्होंने इस पर अपनी तीव्र निराशा व्यक्त की, क्योंकि उन्हें लगा कि यह फैसला उनकी मेहनत पर पानी फेरने वाला था।

विवादास्पद रन-आउट का नाटकीय क्षण

यह घटना उस समय हुई जब श्रीलंका ए अपनी पारी के 42वें ओवर में लक्ष्य का पीछा कर रही थी। भारत ए के गेंदबाज विपराज निगम ने ऑफ स्टंप के बाहर एक लेंथ डिलीवरी फेंकी, जिसे बल्लेबाज चमिका करुणारत्ने ने बैकवर्ड पॉइंट की दिशा में टैप किया और तेजी से एक रन के लिए दौड़ पड़े। हालांकि, वह बीच रास्ते से ही वापस भेज दिए गए। जैसे ही करुणारत्ने अपनी क्रीज पर लौटने की कोशिश कर रहे थे, विकेटकीपर के छोर पर एक सीधा थ्रो आया। नग्न आंखों से देखने पर ऐसा लग रहा था कि यह एक सीधा हिट था और करुणारत्ने अपनी क्रीज से काफी बाहर थे। भारत ए के खिलाड़ी तुरंत जश्न मनाने लगे, उन्हें पूरा विश्वास था कि उन्होंने मैच के एक महत्वपूर्ण चरण में एक निर्णायक रन-आउट हासिल कर लिया है। मैदान पर तनाव साफ महसूस किया जा सकता था और दर्शकों ने अपनी सांसें रोक ली थीं, यह जानने के लिए कि आगे क्या होने वाला है।

प्रभसिमरन की अनजाने में हुई महंगी चूक

हालांकि, नाटक अभी शुरू ही हुआ था। ऑन-फील्ड अंपायरों ने निर्णय के लिए तीसरे अंपायर को बुलाया। रीप्ले में जो सामने आया, उसने सभी को चौंका दिया और भारत ए के लिए निराशा का कारण बना। रीप्ले में स्पष्ट रूप से दिखाया गया कि विकेटकीपर प्रभसिमरन सिंह ने इनकमिंग थ्रो के स्टंप्स से टकराने से पहले ही अनजाने में गिल्लियां गिरा दी थीं। क्रिकेट के नियमों के अनुसार, यदि गेंद के स्टंप्स से टकराने से पहले ही गिल्लियां गिर जाती हैं, तो रन-आउट को वैध नहीं माना जा सकता है। इसी नियम के तहत, करुणारत्ने को नॉट आउट करार दिया गया। यह बारीक नियम भारतीय टीम के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण साबित हुआ, जिसने उन्हें एक महत्वपूर्ण विकेट से वंचित कर दिया। यह फैसला मैच के माहौल को पूरी तरह से बदल गया और भारतीय खेमे में निराशा छा गई।

गायकवाड़ का गुस्सा और भारतीय टीम की निराशा

इस फैसले ने भारतीय खेमे में तुरंत एनिमेटेड प्रतिक्रियाएं पैदा कीं। कप्तान रुतुराज गायकवाड़ विशेष रूप से नाखुश दिखे और उन्हें ऑन-फील्ड अंपायर के साथ लंबी चर्चा में उलझे देखा गया। भारतीय खिलाड़ी न केवल परिणाम से बल्कि इस बात से भी निराश थे कि निर्णय कितनी जल्दी पहुंचा। भारत का मानना था कि सीधा हिट होना चाहिए था और करुणारत्ने, जो अपनी क्रीज से बाहर थे, यदि स्टंप्स बरकरार रहते तो आसानी से रन आउट हो जाते। मैच के इस महत्वपूर्ण मोड़ पर यह फैसला भारतीय टीम के मनोबल पर भारी पड़ा और उन्हें लगा कि उनके साथ अन्याय हुआ है। टीम के अन्य खिलाड़ी भी अपनी निराशा व्यक्त करते हुए देखे गए, क्योंकि उन्हें लगा कि यह एक स्पष्ट मौका था जिसे नियमों की एक तकनीकी कमी के कारण गंवा दिया गया। इस घटना ने मैदान पर खेल भावना और नियमों की व्याख्या पर एक नई बहस छेड़ दी।

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क्रिकेट नियमों की पेचीदगी और खेल भावना

यह घटना क्रिकेट के नियमों की पेचीदगी और मैदान पर खिलाड़ियों द्वारा की गई छोटी से छोटी गलती के बड़े परिणामों को उजागर करती है। नियम 29.1.1 (विकेट गिराना) स्पष्ट रूप से कहता है कि विकेट को तब गिराया गया माना जाता है जब गिल्लियां पूरी तरह से हट जाएं या स्टंप्स जमीन से हट जाएं। इस मामले में, प्रभसिमरन ने अनजाने में थ्रो आने से पहले ही गिल्लियां गिरा दी थीं, जिससे रन-आउट का अवसर समाप्त हो गया। भले ही करुणारत्ने अपनी क्रीज से बाहर थे, नियम की यह व्याख्या भारतीय टीम के खिलाफ गई। यह घटना विकेटकीपिंग में सटीकता के महत्व को भी दर्शाती है, जहां एक सेकंड का भी अंश मैच का परिणाम बदल सकता है। यह घटना क्रिकेट के मैदान पर नियमों की सही व्याख्या और खिलाड़ियों की जागरूकता के महत्व को रेखांकित करती है। भले ही यह एक अनजाने में हुई गलती थी, लेकिन इसका असर पूरे मैच पर पड़ा और इसने खेल के रोमांच को एक नया आयाम दिया।

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