मोदी-ह्लाइंग मुलाकात: भारत-म्यांमार संबंधों को नया आयाम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार, 1 जून, 2026 को दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग से मुलाकात की। यह महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता राष्ट्रपति ह्लाइंग की पांच दिवसीय भारत यात्रा का एक अहम पड़ाव है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत-म्यांमार संबंधों को एक नया आकार देना, क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देना, और विशेष रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करना है। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब म्यांमार सैन्य नेतृत्व द्वारा पांच साल पहले एक लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को अपदस्थ करने के बाद क्षेत्रीय रूप से फिर से जुड़ाव की तलाश में है। राष्ट्रपति बनने के बाद मिन आंग ह्लाइंग की यह पहली विदेश यात्रा है, जो म्यांमार के लिए राजनयिक अलगाव से बाहर निकलने के प्रयासों का संकेत है।
क्षेत्रीय भू-राजनीति में म्यांमार का महत्व
म्यांमार का भारत के लिए रणनीतिक महत्व निर्विवाद है, खासकर चीन की बढ़ती क्षेत्रीय उपस्थिति को देखते हुए। भारत म्यांमार को अपने 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत एक महत्वपूर्ण पड़ोसी मानता है, जो चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत विशेष रूप से व्यापार, बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी और रणनीतिक संसाधनों तक पहुंच में सहयोग का विस्तार करने में रुचि रखता है। म्यांमार के पास महत्वपूर्ण दुर्लभ पृथ्वी (rare earths) के भंडार हैं, जिन तक भारत पहुँच बनाने के लिए उत्सुक है। दोनों देशों के बीच 1,600 किलोमीटर लंबी सीमा भी साझा होती है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिरता बनाए रखने के लिए द्विपक्षीय सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। यह स्थिरता विशेष रूप से विद्रोही समूहों, अवैध आव्रजन और सीमा पार तस्करी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक है। म्यांमार के लिए भी यह यात्रा महत्वपूर्ण है, क्योंकि नोबेल शांति पुरस्कार विजेता आंग सान सू की के नेतृत्व वाली चुनी हुई नागरिक सरकार के तख्तापलट के बाद से उसने क्षेत्रीय अलगाव का सामना किया है, जिसके कारण देशव्यापी विद्रोह हुआ था।
द्विपक्षीय चर्चा के प्रमुख बिंदु और सहयोग के क्षेत्र
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ह्लाइंग के बीच हुई वार्ता में सुरक्षा और कनेक्टिविटी सहित कई प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया। सुरक्षा मोर्चे पर, भारत-म्यांमार सीमा पर उत्पन्न होने वाली चुनौतियों, जैसे कि उग्रवाद, अवैध आव्रजन और सीमा पार तस्करी पर गहन चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने खुफिया सहयोग और रक्षा जुड़ाव को मजबूत करने पर जोर दिया, जिसे शीर्ष-स्तरीय सूत्रों ने 'पड़ोस की स्थिरता के प्रति भारत के सुविचारित दृष्टिकोण' के रूप में वर्णित किया है। कनेक्टिविटी के संदर्भ में, कलादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना और भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग जैसी प्रमुख बुनियादी ढांचा पहलें चर्चा का विषय बनीं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य क्षेत्रीय व्यापार और लोगों से लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देना है। आर्थिक सहयोग के तहत, व्यापार, बुनियादी ढांचे के विकास और रणनीतिक संसाधनों तक पहुंच बढ़ाने के अवसरों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
भारत की रणनीतिक साझेदारी और भविष्य की दिशा
राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग की भारत यात्रा में एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी शामिल है, जिसमें कई कैबिनेट मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और व्यापारिक नेता शामिल हैं। यह प्रतिनिधिमंडल शनिवार को बिहार के बोधगया पहुंचा था। अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान, राष्ट्रपति ह्लाइंग ने रविवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी मुलाकात की, जिसमें सीमा सुरक्षा चुनौतियों पर विशेष ध्यान दिया गया। इससे पहले शनिवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी म्यांमार के राष्ट्रपति से मुलाकात की थी और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के प्रति उनके सकारात्मक दृष्टिकोण की सराहना की थी। ये उच्च-स्तरीय बैठकें भारत की उस रणनीति को दर्शाती हैं जिसके तहत वह म्यांमार के साथ संबंधों को मजबूत करना चाहता है, ताकि न केवल क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित हो, बल्कि चीन के अत्यधिक प्रभाव को भी कम किया जा सके। भारत का यह दृष्टिकोण क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को मजबूत करने और पड़ोसी देशों के साथ मजबूत, विश्वसनीय संबंध बनाने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो भविष्य में दोनों देशों के लिए सामरिक और आर्थिक रूप से लाभकारी साबित होगा।
और पढ़ें
- देश न्यूज़
- ताज़ा खबरें
- विश्व आदिवासी दिवस: पारंपरिक शिल्प और आभूषणों की धूम, मोरपंख की विशेष मांग
- भोपाल में प्रदेश की दूसरी सरकारी आयुर्वेदिक फार्मेसी, मिलेंगी सस्ती दवाएं
- दीपा कर्माकर: फ्लैट फीट से ओलंपिक इतिहास रचने तक का सफर
- विजय की पत्नी संगीता सोर्नालिंगम की शिक्षा: लंदन विश्वविद्यालय से बायोमेडिकल साइंसेज की डिग्री