पंजाब में आवारा कुत्तों पर सख्त कार्रवाई, CM मान ने शुरू किया अभियान
पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के एक अहम आदेश के बाद राज्य के सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के लिए एक व्यापक अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुक्रवार को इस पहल की घोषणा की, जिसमें कहा गया कि उनकी सरकार खतरनाक और आक्रामक कुत्तों के खिलाफ इच्छामृत्यु सहित कानूनी रूप से अनुमेय उपायों का उपयोग करेगी, जो मानव जीवन के लिए खतरा पैदा करते हैं। इस कदम का उद्देश्य बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और परिवारों को बिना किसी डर के सार्वजनिक स्थानों पर स्वतंत्र रूप से घूमने की सुविधा प्रदान करना है। यह अभियान सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंगलवार को दिए गए उस निर्देश के बाद आया है, जिसमें रेबीज ग्रस्त, असाध्य रूप से बीमार या सिद्ध रूप से खतरनाक आवारा कुत्तों के लिए इच्छामृत्यु की अनुमति दी गई है ताकि मानव जीवन को होने वाले खतरे को कम किया जा सके।
मुख्यमंत्री का जन सुरक्षा पर जोर
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक बयान साझा करते हुए कहा कि उनकी सरकार सुप्रीम कोर्ट के 19 मई के आदेश को पूरी तरह से लागू करेगी। उन्होंने विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने पर जोर दिया, ताकि बच्चे, वरिष्ठ नागरिक और परिवार अपनी सुरक्षा के डर के बिना खुले तौर पर घूम सकें। मान ने यह भी बताया कि सरकार पर्याप्त संख्या में डॉग शेल्टर बनाएगी और उनका रखरखाव करेगी, जहाँ इन आवारा कुत्तों की उचित देखभाल की जा सकेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इच्छामृत्यु जैसे कानूनी रूप से अनुमेय उपाय केवल उन्हीं मामलों में लागू किए जाएंगे, जिनमें कुत्ते रेबीज ग्रस्त, असाध्य रूप से बीमार या स्पष्ट रूप से खतरनाक और आक्रामक हों और मानव जीवन के लिए खतरा पैदा करते हों। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ये उपाय पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और एबीसी नियमों के सख्त अनुसार ही किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को ही घोषणा कर दी थी कि राज्य सरकार शुक्रवार से आवारा और जानलेवा कुत्तों के खिलाफ एक अभियान शुरू करेगी, जो लोगों के जीवन को जोखिम में डालते हैं।
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई को एक महत्वपूर्ण फैसले में रेबीज ग्रस्त, असाध्य रूप से बीमार, खतरनाक और आक्रामक कुत्तों के लिए इच्छामृत्यु की अनुमति दी ताकि मानव जीवन के जोखिम को कम किया जा सके। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने देश भर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या से निपटने के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि गरिमा के साथ जीने के अधिकार में कुत्तों से नुकसान के डर के बिना स्वतंत्र रूप से घूमने का अधिकार भी शामिल है। यह अपनी तरह का पहला आदेश था, जिसमें न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जब लोगों की सुरक्षा और जीवन को संवेदनशील प्राणियों के हितों और कल्याण के मुकाबले तोला जाता है, तो संवैधानिक संतुलन को मानव जीवन की सुरक्षा और संरक्षण के पक्ष में स्पष्ट रूप से होना चाहिए। यह आदेश पिछले साल 28 जुलाई को स्वप्रेरणा से शुरू किए गए एक मामले में आया था, जब मीडिया रिपोर्टों में राष्ट्रीय राजधानी में आवारा कुत्तों के हमलों के कारण, विशेषकर बच्चों में, रेबीज के मामले सामने आए थे।
वैश्विक परिदृश्य और पंजाब की आगे की राह
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद भारत अब तुर्की, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, जापान, मोरक्को और रोमानिया जैसे उन देशों में शामिल हो गया है, जहाँ विनियमित प्रावधानों के तहत खतरनाक या लावारिस आवारा जानवरों के लिए इच्छामृत्यु की अनुमति है। यह कदम न केवल पंजाब में, बल्कि पूरे देश में आवारा कुत्तों की समस्या के प्रबंधन के लिए एक नया मानक स्थापित करता है। पंजाब सरकार का यह अभियान जन सुरक्षा सुनिश्चित करने और मानव-पशु संघर्ष को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आश्रय स्थलों के निर्माण और रखरखाव का वादा यह सुनिश्चित करता है कि जिन कुत्तों को हटाया जाएगा, उनकी उचित देखभाल हो सकेगी, जब तक कि वे किसी उपयुक्त परिवार को गोद न लिए जाएं या इच्छामृत्यु के मानदंडों को पूरा न करें। इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के नागरिक अपने दैनिक जीवन में सुरक्षित महसूस करें और आवारा कुत्तों के हमलों के लगातार डर के बिना खुले और सार्वजनिक स्थानों का उपयोग कर सकें। यह पहल राज्य में एक संतुलित और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने का प्रयास करती है, जहाँ मानव सुरक्षा और पशु कल्याण दोनों का ध्यान रखा जा सके।