8वीं वेतन आयोग की ओडिशा में बैठकें; रेलवे परिचालन का निरीक्षण
8वीं वेतन आयोग ने देश भर में हितधारकों के साथ परामर्श की अपनी श्रृंखला जारी रखते हुए, 6 जुलाई, 2026 को ओडिशा के भुवनेश्वर में कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के निकायों के साथ महत्वपूर्ण चर्चाएँ शुरू कीं। यह दो दिवसीय दौरा वेतन, पेंशन, कार्य स्थितियों और भत्तों जैसे मुद्दों पर केंद्रित है। इस बीच, आयोग ने भारतीय रेलवे के परिचालन का सीधा निरीक्षण करने की इच्छा व्यक्त की है, ताकि वेतन संशोधन से पहले कर्मचारियों की जमीनी कार्य स्थितियों, जोखिमों और चुनौतियों को गहराई से समझा जा सके। आगामी बैठकों के लिए आयोग 9 से 10 जुलाई, 2026 तक पश्चिम बंगाल के कोलकाता का दौरा करेगा, जहाँ यह विभिन्न हितधारकों के साथ अपनी चर्चाएँ जारी रखेगा। आयोग का यह कदम कर्मचारियों की वास्तविक परिस्थितियों को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, विशेषकर रेलवे कर्मचारियों के लिए, जिनकी कार्य प्रकृति में अद्वितीय जोखिम और जटिलताएँ शामिल हैं।
ओडिशा और कोलकाता में परामर्श का दौर
8वीं वेतन आयोग ने अपनी परामर्श प्रक्रिया को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाया है, जिसका उद्देश्य केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक न्यायसंगत और व्यापक वेतन संरचना की सिफारिश करना है। भुवनेश्वर में हुई बैठकों में, आयोग ने कर्मचारी संघों और पेंशनभोगी निकायों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया। इन चर्चाओं में वेतनमानों के पुनरीक्षण, विभिन्न भत्तों की समीक्षा, पेंशन संबंधी मुद्दों और सेवा शर्तों में सुधार जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर गहनता से गौर किया गया। आयोग ने इन हितधारकों के सुझावों और चिंताओं को ध्यानपूर्वक सुना, जो आगामी सिफारिशों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेंगे। ओडिशा में अपनी बैठकों से पहले, आयोग ने जून में लखनऊ में भी परामर्श का एक दौर सफलतापूर्वक पूरा किया था। अब, आयोग अपनी अगली महत्वपूर्ण बैठकें 9 और 10 जुलाई, 2026 को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में आयोजित करेगा, जहाँ यह पूर्वी क्षेत्र के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के दृष्टिकोण को समझेगा। यह चरणबद्ध परामर्श प्रक्रिया आयोग को देश के विभिन्न हिस्सों से डेटा और राय इकट्ठा करने में मदद कर रही है, ताकि एक संतुलित और समग्र रिपोर्ट तैयार की जा सके।
रेलवे परिचालन के निरीक्षण की आयोग की इच्छा
एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, रेलवे बोर्ड ने 2 जुलाई, 2026 को नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन (NFIR) और ऑल इंडिया रेलवेमेन फेडरेशन (AIRF) को एक पत्र के माध्यम से सूचित किया है कि 8वीं वेतन आयोग ने भारतीय रेलवे के कामकाज और रेल यातायात के संचालन एवं रखरखाव से जुड़े सभी पहलुओं का सीधा अवलोकन करने की इच्छा व्यक्त की है। आयोग का मानना है कि वेतन संशोधन की सिफारिशें करने से पहले, रेलवे कर्मचारियों द्वारा किए जाने वाले कार्यों की प्रकृति, उसमें शामिल जोखिमों, कठिनाइयों और जटिलताओं को व्यक्तिगत रूप से समझना अत्यंत आवश्यक है। इस प्रत्यक्ष अनुभव से आयोग को इन कर्मचारियों के पारिश्रमिक के संबंध में अधिक सूचित और न्यायसंगत निर्णय लेने में सहायता मिलेगी। हालांकि, आयोग के दौरे का सटीक स्थान अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन रेलवे बोर्ड ने सुझाव दिया है कि यह दौरा मुंबई (CSMT/मध्य रेलवे) में आयोजित किया जा सकता है। मुंबई (CSMT) को इसलिए प्रस्तावित किया गया है क्योंकि यह रेलवे स्टेशन ट्रेन संचालन और रखरखाव के विभिन्न पहलुओं को प्रदर्शित करने के लिए एक आदर्श स्थान है, जिसमें शहरी और उपनगरीय दोनों तरह के परिचालन शामिल हैं।
किन रेलवे गतिविधियों का होगा निरीक्षण?
8वीं वेतन आयोग द्वारा प्रस्तावित निरीक्षण में विभिन्न रेलवे परिचालन और गतिविधियों को शामिल किया जाएगा, जिनका उद्देश्य कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की गहरी समझ प्राप्त करना है। रेलवे बोर्ड के पत्र में उन विशिष्ट क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है जिनका आयोग अवलोकन कर सकता है। इनमें सबसे प्रमुख है ट्रैक मेंटेनर्स, विशेष रूप से कीमैन और पेट्रोलमैन द्वारा की जाने वाली ट्रैक रखरखाव गतिविधियाँ। इन कर्मचारियों द्वारा अपने कर्तव्य के दौरान सामना की जाने वाली शारीरिक कठिनाइयों और मृत्यु या गंभीर चोटों के उच्च जोखिम पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, आयोग सिग्नल कार्य और ट्रेन नियंत्रण जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियों का भी निरीक्षण कर सकता है। इन निरीक्षणों के माध्यम से आयोग रेलवे के विभिन्न विभागों द्वारा किए जाने वाले बहुआयामी कार्यों की गहनता और जोखिमों का आकलन करेगा। रेलवे तकनीकी पर्यवेक्षकों ने भी व्यापक परिचालन निरीक्षण की वकालत की है ताकि एक समग्र समीक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह जमीनी स्तर का मूल्यांकन आयोग को विभिन्न रेलवे नौकरियों में शामिल वास्तविक चुनौतियों और जिम्मेदारियों को समझने में मदद करेगा, जिससे वेतन संशोधन संबंधी सिफारिशें अधिक यथार्थवादी और उचित हो सकेंगी। आयोग का यह सक्रिय दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करेगा कि रेलवे कर्मचारियों के योगदान और उनके द्वारा झेली जाने वाली विशेष परिस्थितियों को वेतन संरचना में उचित रूप से दर्शाया जाए।