नीट विरोध पर लाठीचार्ज: खरगे ने सरकार पर साधा निशाना, संसद में चर्चा की मांग
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मंगलवार, 21 जुलाई, 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट-यूजी पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की कड़ी निंदा की। खरगे ने इस गंभीर मुद्दे पर संसद के भीतर तत्काल पूर्ण चर्चा कराने की मांग की, यह कहते हुए कि सरकार को छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों और छात्र समुदाय में गहरा रोष पैदा कर दिया है।
खरगे का सरकार पर सीधा हमला और राज्यसभा में हंगामा
मल्लिकार्जुन खरगे, जो कांग्रेस के अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता हैं, ने मंगलवार को उच्च सदन में सरकार की तीखी आलोचना की। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश में एक स्वतंत्र और योग्यता-आधारित शिक्षा प्रणाली होनी चाहिए, न कि ऐसी व्यवस्था जहां लाखों छात्रों को अपने अधिकारों और भविष्य के लिए आवाज उठाने पर दमन का सामना करना पड़े। खरगे के इस संवेदनशील मुद्दे को उठाते ही सदन में भारी हंगामा हुआ, जिसके परिणामस्वरूप राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर तक के लिए स्थगित कर दी गई। उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर भी इस घटना पर अपनी पीड़ा और आक्रोश व्यक्त किया। खरगे ने लिखा, "कल एक बहुत ही दुखद घटना हुई। उस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में, हमारे छात्र—जो पेपर लीक और नीट परीक्षा में हुई धांधली के संबंध में अपनी आवाज उठा रहे थे—उन पर बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज किया गया और आंसू गैस छोड़ी गई, और उन्हें बेरहमी से पीटा गया।" छात्रों के भविष्य की चिंता में डूबे खरगे ने इस गंभीर घटना के विरोध में मंगलवार को अपना जन्मदिन भी नहीं मनाने का फैसला किया, जो छात्रों के प्रति उनकी गहरी एकजुटता और सरकार की कार्रवाई के प्रति उनके गंभीर असंतोष को दर्शाता है। यह कदम दर्शाता है कि विपक्ष इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और सरकार से ठोस जवाब चाहता है।
जंतर-मंतर पर छात्रों का आक्रोश और पुलिस की कार्रवाई
यह घटना सोमवार, 20 जुलाई, 2026 को घटी, जब नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की खबरों से त्रस्त हजारों छात्र दिल्ली के जंतर-मंतर पर एकत्र हुए थे। वे कॉकक्रोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा संसद तक मार्च की योजना के तहत केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। देश भर के छात्र इस परीक्षा में हुई धांधली को अपने भविष्य के साथ खिलवाड़ मान रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने इस मार्च के लिए पहले ही अनुमति देने से इनकार कर दिया था और नई दिल्ली क्षेत्र के आसपास धारा 144 सहित निषेधाज्ञा लागू कर दी थी। इसके बावजूद, बड़ी संख्या में छात्र अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने पहुंचे थे। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को बर्बर लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा, जिसमें कई छात्रों को गंभीर चोटें आईं। पुलिस द्वारा आंसू गैस के गोले भी दागे गए, जिससे क्षेत्र में भगदड़ मच गई। छात्रों का आरोप है कि उन्हें अपनी बात रखने का लोकतांत्रिक अधिकार भी नहीं दिया गया और उन पर अनावश्यक बल प्रयोग किया गया।
भविष्य की चिंता और लोकतांत्रिक आवाज़ का दमन
मल्लिकार्जुन खरगे ने छात्रों पर हुए इस बर्बर हमले को देश के लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। उन्होंने पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, "मैं लाखों छात्रों के भविष्य की बात कर रहा हूँ। उसके लिए हजारों बच्चे जंतर-मंतर आए हैं। उन पर लाठीचार्ज हुआ है। सरकार उन्हें चोट पहुँचाने की कोशिश कर रही है, जो गलत है।" यह घटना ऐसे समय में हुई है जब नीट-यूजी परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर पहले से ही गंभीर सवाल उठ रहे हैं। देश भर के छात्र और अभिभावक परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। सरकार की ओर से अभी तक इस लाठीचार्ज पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विपक्षी दल इसे लोकतंत्र में विरोध के अधिकार का सीधा दमन मान रहे हैं। यह घटना सरकार और छात्र समुदाय के बीच बढ़ते तनाव को उजागर करती है, जहां छात्र न्याय की मांग कर रहे हैं और उन्हें पुलिस बल का सामना करना पड़ रहा है। खरगे की संसद में तत्काल पूर्ण चर्चा की मांग इस बात पर जोर देती है कि यह मुद्दा राष्ट्रीय महत्व का है, जिस पर गहन विचार-विमर्श और सरकार की जवाबदेही तय करने की आवश्यकता है। छात्रों का मनोबल तोड़ने और उनकी आवाज़ को दबाने की यह कोशिश देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
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