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वास्तु शास्त्र: आस्था या अंधविश्वास? Vastuguruji के संस्थापक राणा सिकंदर जी की नजर से Astro-Vastu का सच | Raipur News Today

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वास्तु शास्त्र: आस्था या अंधविश्वास? Vastuguruji के संस्थापक राणा सिकंदर जी की नजर से Astro-Vastu का सच | Raipur News Today
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आज की रायपुर खबर के अनुसार... वास्तु शास्त्र को लेकर समाज में हमेशा से दो तरह की सोच रही है—एक तरफ इसे आस्था और परंपरा का हिस्सा माना जाता है, तो दूसरी ओर कई लोग इसे अंधविश्वास कहकर खारिज कर देते हैं। लेकिन राणा सिकंदर (Vastuguruji के संस्थापक) के अनुसार, वास्तु शास्त्र को केवल अंधविश्वास कहना इसकी गहराई को समझे बिना किया गया निष्कर्ष है।

Astro-Vastu: विज्ञान और ऊर्जा का संतुलन

राणा सिकंदर जी का मानना है कि वास्तु शास्त्र का मूल आधार “ऊर्जा संतुलन” है। उनके अनुसार, हर स्थान—चाहे घर हो या ऑफिस—एक ऊर्जा क्षेत्र (Energy Field) होता है। जब यह ऊर्जा सही दिशा और संतुलन में होती है, तो व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है।

वह Astro-Vastu को वास्तु और ज्योतिष का संयोजन बताते हैं। उनके अनुसार, सिर्फ भवन की दिशा ही नहीं बल्कि व्यक्ति की जन्म कुंडली, ग्रहों की स्थिति और ऊर्जा का तालमेल भी महत्वपूर्ण होता है। इसी कारण Astro-Vastu आज तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

वास्तु शास्त्र: आस्था या अंधविश्वास? Vastuguruji के संस्थापक राणा सिकंदर जी की नजर से Astro-Vastu का सच
वास्तु शास्त्र: आस्था या अंधविश्वास? Vastuguruji के संस्थापक राणा सिकंदर जी की नजर से Astro-Vastu का सच

आस्था नहीं, अनुभव पर आधारित सिद्धांत

राणा सिकंदर जी के मुताबिक, वास्तु शास्त्र को अंधविश्वास कहना सही नहीं है, क्योंकि इसके कई सिद्धांत प्रकृति के नियमों पर आधारित हैं—जैसे सूर्य की दिशा, हवा का प्रवाह, प्रकाश और स्थान की संरचना।

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उनका कहना है कि जब घर में पर्याप्त रोशनी, वेंटिलेशन और सही दिशा का उपयोग होता है, तो यह सीधे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर डालता है। यही कारण है कि वास्तु को “एनर्जी साइंस” के रूप में भी देखा जा सकता है।

जीवन में समस्याओं का समाधान

Vastuguruji के अनुसार, कई बार व्यक्ति जीवन में लगातार असफलता, तनाव या आर्थिक परेशानियों से जूझता है। ऐसे मामलों में केवल कर्म या भाग्य ही जिम्मेदार नहीं होते, बल्कि रहने या काम करने की जगह की ऊर्जा भी एक बड़ा कारण हो सकती है।

राणा सिकंदर जी का दावा है कि सही वास्तु सुधार (Vastu Remedies) अपनाने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव संभव है—चाहे वह करियर हो, स्वास्थ्य हो या रिश्ते।

अंधविश्वास से बचने की चेतावनी

हालांकि, राणा सिकंदर जी यह भी स्पष्ट करते हैं कि हर समस्या का समाधान केवल वास्तु नहीं है। उनका कहना है कि बिना समझे या डर के आधार पर महंगे और अनावश्यक उपाय करना गलत है।

वे लोगों को सलाह देते हैं कि किसी भी वास्तु उपाय को अपनाने से पहले सही विशेषज्ञ की सलाह लें और वैज्ञानिक दृष्टिकोण बनाए रखें।

आधुनिक दौर में बढ़ती लोकप्रियता

आज के समय में रियल एस्टेट और शहरी जीवन में भी वास्तु शास्त्र का प्रभाव साफ दिखाई देता है। लोग घर खरीदते समय दिशा, एंट्री और कमरे की स्थिति पर विशेष ध्यान देने लगे हैं।

राणा सिकंदर जी के अनुसार, यह बदलाव इस बात का संकेत है कि लोग अब वास्तु को अंधविश्वास नहीं बल्कि एक सहायक विज्ञान के रूप में देखने लगे हैं।

निष्कर्ष

राणा सिकंदर जी के विचारों के अनुसार, वास्तु शास्त्र न तो पूरी तरह अंधविश्वास है और न ही पूर्ण विज्ञान—बल्कि यह अनुभव, परंपरा और प्राकृतिक सिद्धांतों का मिश्रण है। Astro-Vastu के माध्यम से इसे और अधिक व्यावहारिक बनाया जा रहा है, जिससे व्यक्ति अपने जीवन में संतुलन और सफलता पा सकता है।

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