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छत्तीसगढ़ में वन महोत्सव और तुहर पौधा तिहार का भव्य शुभारंभ, तेंदुपत्ता संग्राहकों को मिला बोनस

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छत्तीसगढ़ में वन महोत्सव और तुहर पौधा तिहार का भव्य शुभारंभ, तेंदुपत्ता संग्राहकों को मिला बोनस
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छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण और वनवासियों के सशक्तिकरण के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल के तहत, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राजधानी रायपुर में आयोजित भव्य समारोह में 'छत्तीसगढ़ वन महोत्सव' और 'तुहर पौधा तिहार' का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर, राज्य के लाखों तेंदुपत्ता संग्राहकों को उनकी मेहनत का फल देते हुए, सरकार ने करोड़ों रुपये का बोनस वितरित किया, जिससे उनके जीवन में आर्थिक संबल और खुशहाली लाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया। यह आयोजन राज्य के सभी जिलों में एक साथ शुरू हुआ, जिसका मुख्य लक्ष्य हरियाली बढ़ाना, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करना और वन आधारित समुदायों को मुख्यधारा में लाना है।

'तुहर पौधा तिहार' की व्यापकता और उद्देश्य

इस वर्ष 'छत्तीसगढ़ वन महोत्सव' के साथ ही 'तुहर पौधा तिहार' का आयोजन राज्यभर में एक नई ऊर्जा और उत्साह के साथ किया गया। इस अनूठी पहल का उद्देश्य केवल वृक्षारोपण करना नहीं, बल्कि जन-जन को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना है। इसके तहत, राज्य सरकार ने प्रत्येक नागरिक को अपने आस-पास पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने के लिए प्रेरित किया। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत लाखों पौधे वितरित किए गए, जिनमें फलदार, औषधीय और छायादार वृक्षों की प्रजातियाँ शामिल थीं। यह कार्यक्रम विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को अपनी भूमि पर या सार्वजनिक स्थलों पर पौधे लगाने के लिए प्रोत्साहित करता है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए वृक्षारोपण ही एकमात्र प्रभावी उपाय है, और 'तुहर पौधा तिहार' इसी दिशा में एक सामूहिक प्रयास है। उन्होंने राज्य के नागरिकों से अपील की कि वे इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लें और छत्तीसगढ़ को एक हरा-भरा और स्वस्थ राज्य बनाने में अपना योगदान दें। इस पहल से न केवल राज्य की हरियाली में वृद्धि होगी, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों को कम करने में भी सहायक सिद्ध होगा।

तेंदुपत्ता संग्राहकों को मिला आर्थिक संबल

वन महोत्सव के इस पावन अवसर पर, छत्तीसगढ़ सरकार ने अपने वादे को पूरा करते हुए तेंदुपत्ता संग्राहकों के लिए एक बड़ा तोहफा पेश किया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्वयं विभिन्न जिलों से आए हजारों तेंदुपत्ता संग्राहकों की उपस्थिति में करोड़ों रुपये के बोनस का वितरण किया। यह बोनस राज्य के करीब 12 लाख तेंदुपत्ता संग्राहक परिवारों को सीधे लाभ पहुंचाएगा, जो अपनी आजीविका के लिए काफी हद तक वनोपज पर निर्भर रहते हैं। वन मंत्री ने इस दौरान बताया कि सरकार ने तेंदुपत्ता संग्रहण की दर में भी वृद्धि की है, जिससे संग्राहकों की आय में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सिर्फ एक बोनस नहीं, बल्कि उन लाखों मेहनतकश हाथों के प्रति सरकार की कृतज्ञता और सम्मान का प्रतीक है, जो वनों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस आर्थिक सहायता से संग्राहक परिवार अपनी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा कर सकेंगे, बच्चों की शिक्षा पर ध्यान दे सकेंगे और अपने जीवन स्तर में सुधार ला सकेंगे। सरकार का यह कदम वनवासियों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में कदम

'छत्तीसगढ़ वन महोत्सव' और 'तुहर पौधा तिहार' का आयोजन केवल एक वार्षिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राज्य सरकार की पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की व्यापक रणनीति का एक अभिन्न अंग है। मुख्यमंत्री बघेल ने अपने उद्बोधन में राज्य की समृद्ध वन संपदा के महत्व पर प्रकाश डाला और इसे भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ एक वन-बहुल राज्य है, और यहाँ के वनों का संरक्षण न केवल स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी सहायक है। सरकार वन आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने और वनोपज के मूल्य संवर्धन के माध्यम से वनवासियों के लिए नए रोजगार के अवसर सृजित करने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। इस तरह की पहलें वन संरक्षण को जन आंदोलन में बदलने में मदद करती हैं, जहाँ हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझता है। अधिकारियों ने बताया कि आने वाले वर्षों में भी ऐसे कार्यक्रमों को और अधिक व्यापक दिया जाएगा, ताकि छत्तीसगढ़ को देश के सबसे हरे-भरे और पर्यावरण-अनुकूल राज्यों में से एक बनाया जा सके। यह दीर्घकालिक दृष्टि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और उसके नागरिकों के कल्याण को सुनिश्चित करने की दिशा में एक मजबूत नींव रखती है।

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