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हरेली तिहार पर गुरुचरण सिंह होरा का संदेश: प्रकृति, परंपरा और किसान सम्मान का पर्व है हरेली | Raipur News Today

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हरेली तिहार पर गुरुचरण सिंह होरा का संदेश: प्रकृति, परंपरा और किसान सम्मान का पर्व है हरेली | Raipur News Today
रायपुर

आज की रायपुर खबर के अनुसार... रायपुर। छत्तीसगढ़ टेनिस एसोसिएशन के महासचिव गुरुचरण सिंह होरा ने प्रदेशवासियों को हरेली तिहार की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, कृषि परंपरा, लोकजीवन और प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव का प्रतीक है। यह पर्व केवल हरियाली का उत्सव नहीं, बल्कि किसान, मिट्टी और पर्यावरण के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर भी है।

होरा ने क्या कहा

होरा ने कहा कि सावन की पहली अमावस्या पर मनाया जाने वाला हरेली तिहार सदियों से छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहा है। इस समय किसान बुआई का कार्य पूरा कर अच्छी वर्षा और बेहतर फसल की कामना करता है। इसलिए हरेली किसानों के परिश्रम और धरती के प्रति उनकी आस्था को सम्मान देने वाला महत्वपूर्ण पर्व है।

उन्होंने बताया कि हरेली के दिन किसान हल, गैंती, कुदाल सहित कृषि उपकरण...

उन्होंने बताया कि हरेली के दिन किसान हल, गैंती, कुदाल सहित कृषि उपकरणों की पूजा करते हैं। यह परंपरा खेती और कृषि उपकरणों के महत्व को दर्शाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस अवसर पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की जाती है और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

गुरुचरण सिंह होरा ने क्या कहा

गुरुचरण सिंह होरा ने कहा कि वर्तमान समय में हरेली तिहार का संदेश और अधिक प्रासंगिक हो गया है। पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा यह पर्व हमें देता है। उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास हरियाली बढ़ाने और प्रकृति संरक्षण के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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उन्होंने प्रदेशवासियों से हरेली के अवसर पर वृक्षारोपण करने और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की। उनके अनुसार, हरियाली बढ़ेगी तो पर्यावरण संतुलित रहेगा और किसान भी समृद्ध होंगे।

होरा ने क्या कहा

होरा ने कहा कि हरेली तिहार पर गांव-गांव में गेड़ी चढ़ना, खो-खो और कबड्डी जैसे पारंपरिक खेलों की रौनक देखने को मिलती है। वहीं घरों में चीला, खुरमी, फरहा, बबरा और ठेठरी जैसे पारंपरिक व्यंजन तैयार किए जाते हैं। यही कारण है कि हरेली केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार और समाज को एक सूत्र में जोड़ने वाला लोकपर्व भी है।

उन्होंने कहा कि हरेली तिहार सामाजिक समरसता और छत्तीसगढ़ी अस्मिता को मजबूत करने वाला पर्व है। यह जाति, वर्ग और सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर सभी को एक साथ जोड़ता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अपनी लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लें।

अंत में गुरुचरण सिंह होरा ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की आत्मा से जुड़ा पर्व है, जो हमें अपनी मिट्टी, किसान, प्रकृति और परंपराओं से जोड़ता है तथा प्रदेश में सुख-समृद्धि, हरियाली और भाईचारे का संदेश देता है।

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लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

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