MP में 1200 करोड़ पोषण आहार अब महिला बाल विकास विभाग संभालेगा
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मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही में लिए गए एक बड़े निर्णय के तहत, 1200 करोड़ रुपये के पोषण आहार वितरण का कार्य अब महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) को सौंप दिया है। यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी, जो पहले राज्य नागरिक आपूर्ति निगम और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से संचालित हो रही थी, पूरे राज्य में कुपोषण से प्रभावी ढंग से निपटने, वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने और लाभार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण आहार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बदली गई है। इस प्रशासनिक बदलाव का मुख्य लक्ष्य आंगनवाड़ियों के माध्यम से लाखों बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं तक पहुंचने वाले पोषण आहार की गुणवत्ता और समय पर उपलब्धता को सुनिश्चित करना है, जिससे कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को और मजबूती मिल सके।
नए बदलाव का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
इस महत्वपूर्ण बदलाव के पीछे सरकार का प्राथमिक उद्देश्य पोषण आहार कार्यक्रम में व्याप्त कथित अनियमितताओं और वितरण प्रणाली की खामियों को दूर करना है। पिछले कुछ समय से पोषण आहार की गुणवत्ता, आपूर्ति में देरी और वित्तीय प्रबंधन को लेकर कई सवाल उठ रहे थे, जिससे कार्यक्रम के वास्तविक लाभार्थियों तक इसका पूरा लाभ नहीं पहुंच पा रहा था। मुख्यमंत्री ने स्वयं इस मामले पर गंभीरता दिखाते हुए एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की थी, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। 1200 करोड़ रुपये का यह बजट लाखों बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य से जुड़ा है, इसलिए सरकार इस व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाना चाहती है। अब महिला एवं बाल विकास विभाग, जो सीधे आंगनवाड़ी केंद्रों और उनके लाभार्थियों के साथ जुड़ा हुआ है, इस कार्य को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित कर पाएगा। यह कदम सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता लाने और अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
विभाग की बढ़ी हुई जिम्मेदारी और चुनौतियाँ
महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए 1200 करोड़ रुपये के इस वृहद पोषण आहार कार्यक्रम का संचालन एक बड़ी चुनौती और जिम्मेदारी दोनों है। अब विभाग को न केवल पोषण आहार के वितरण की निगरानी करनी होगी, बल्कि इसके उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण और आपूर्ति श्रृंखला के प्रबंधन में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। इसमें गेहूं, दाल, सोया आधारित उत्पाद, रेडी-टू-ईट फूड जैसे विभिन्न प्रकार के पोषण आहार शामिल हैं, जिनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। विभाग को आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और स्थानीय स्वशासन इकाइयों के साथ समन्वय स्थापित करना होगा ताकि आहार समय पर और सही लाभार्थियों तक पहुंचे। यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक होगा कि पोषण आहार की बर्बादी न हो और उसका भंडारण सही तरीके से किया जाए। विभाग को आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके एक मजबूत निगरानी प्रणाली विकसित करनी होगी, जिसमें डिजिटल ट्रैकिंग और फीडबैक तंत्र शामिल हो, ताकि पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी जा सके और किसी भी समस्या का त्वरित समाधान किया जा सके।
लाभार्थियों पर सीधा प्रभाव और भविष्य की उम्मीदें
इस निर्णय से सबसे बड़ा लाभ कार्यक्रम के लाभार्थियों को मिलेगा। मध्य प्रदेश में लाखों गर्भवती महिलाएं, धात्री माताएं और 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चे आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण आहार प्राप्त करते हैं। जब वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी और कुशल होगी, तो उन्हें नियमित रूप से उच्च गुणवत्ता वाला पोषण आहार प्राप्त होगा, जिससे उनके स्वास्थ्य में सुधार आएगा। यह राज्य में कुपोषण के स्तर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे बच्चों की मृत्यु दर में कमी आएगी और उनके शारीरिक व मानसिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। सरकार को उम्मीद है कि इस बदलाव से महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होगा और कुपोषण मुक्त मध्य प्रदेश के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। यह कदम न केवल पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि महिलाओं और बच्चों के समग्र कल्याण में भी योगदान देगा। सरकार ने सख्त गुणवत्ता जांच और नियमित ऑडिट का भी प्रावधान किया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह नई व्यवस्था अपने उद्देश्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त करे।
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